1,246 रुपये में एक OTP बेच रहे थे, सामने आया नया स्कैम, क्या है OTP फार्मिंग?

Published on 18 सित॰ 2026

साइबर ठगी के गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है, जिसमें इंटरनेशनल साइबर क्राइम सिंडिकेट शामिल है. ये गिरोह OTP फार्मिंग के जरिए लोगों को शिकार बनाता था. साथ ही पुलिस ने बताया है एक OTP के लिए 13 अमेरिका डॉलर (करीब 1,246 रुपये)  तक के क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान किया जाता था. 

मुंबई पुलिस ने बताया है कि यह गिरोह 'OTP फार्मिंग' के जरिए विदेशी साइबर ठगों को भारतीय WhatsApp नंबर उपलब्ध कराता था. 

पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. उनके पास से 669 एक्टिव SIM कार्ड और 100 मोबाइल हैंडसेट बरामद किए हैं. 

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मुंबई पुलिस ने लिया एक्शन 

यह एक्शन मुंबई क्राइम ब्रांच की वेस्टर्न रीजन साइबर पुलिस ने लिया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रमोद कुमार उर्फ बिपिन, धर्मेंद्र गुप्ता और राजीव कुमार गुप्ता के रूप में हुई है. 

पुलिस ने बताया है कि यह गिरोह कंबोडिया में बैठे साइबर क्रिमिनल्स को सपोर्ट करता था. ये विदेशी ठग भारतीय नागरिकों को शिकार बनाते थे. पहले उनको फेक इनवेस्टमेंट के जाल में फंसाते और उसके बाद उनके बैंक खाते में सेंधमारी करते थे. 

22.3 लाख रुपये की ठगी से हुआ खुलासा 

साइबर ठगों के इस रैकेट का खुलासा उस समय हुआ है, जब एक शख्स के साथ 22.30 लाख रुपये की ठगी की जांच हो रही थी. साइबर ठग WhatsApp के जरिए लोगों से संपर्क करते और ज्यादा रिटर्न का लालच देकर उनको शिकार बनाते हैं. 

पुलिस ने बताया है कि राजीव गुप्ता सेल एजेंट था. वह अनजान लोगों के डॉक्यूमेंट के आधार पर उनकी जानकारी के बिना उनके नाम से सिम जारी करवाता और फिर उन सिम को एक्टिवेट करता.

इसके बाद वह इन सिम कार्ड को धर्मेंद्र गुप्ता के जरिए प्रमोद कुमाल तक पहुंचाता था और उसके बदले में कमीशन भी लेता था. 

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SIM कार्ड को बेसिक कीपैड मोबाइल में लगाकर 

प्रमोद आगे इन SIM कार्ड को बेसिक कीपैड मोबाइल में लगाकर OTP फार्मिंग करता था. फिर इन SIM से भारतीय WhatsApp अकाउंट के लिए आने वाले वेरिफिकेशन OTP को कथित तौर पर Telegram के जरिए कंबोडिया में बैठे हैंडलर्स को बेचा जाता था. 

13 अमेरिका डॉलर में सेल करता OTP

पुलिस के मुताबिक, एक OTP के लिए 13 अमेरिका डॉलर (करीब 1,246 रुपये)  तक के क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान किया जाता था. फिर विदेशी हैंडलर्स इन भारतीय WhatsApp नंबर्स का इस्तेमाल भारतीय लोगों को निशाना बनाने के लिए करते थे. 

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ठगी से मिलने वाले पैसों को किराए के म्यूल बैंक अकाउंट्स की मदद से अलग-अलग लोकेशन पर शेयर किया जाता था. 

669 एक्टिव SIM और 100 फोन बरामद

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 91 कीपैड मोबाइल फोन, 9 स्मार्टफोन, 669 एक्टिव SIM कार्ड, एक CPU, Wi-Fi राउटर, फिंगरप्रिंट स्कैनर और अन्य इलेक्ट्रोनिक्स सामान को बरामद किया है. अब पुलिस इस मामले की आगे की जांच कर रही है और अन्य जुड़े हुए लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है. 

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