थर-थर कांपेगा ड्रैगन! समंदर में भारत का बड़ा दांव, पानी में उतरेंगे 1 लाख करोड़ के 16 खतरनाक युद्धपोत

Published on 13 जुल॰ 2026

भारतीय नौसेना आने वाले सालों में अपनी समुद्री ताकत को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक, नौसेना करीब 1 लाख करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट-15C, प्रोजेक्ट-17B और प्रोजेक्ट-18A के तहत 16 नए स्वदेशी युद्धपोत बनाने की योजना पर आगे बढ़ रही है. इनमें नई पीढ़ी के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, स्टेल्थ फ्रिगेट और विशाल सरफेस कॉम्बैटेंट शामिल होंगे.

अगर ये योजना तय समय पर आगे बढ़ती है तो यह प्रोजेक्ट सिर्फ भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिंद महासागर और पूरे इंडो-पैसिफिक में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच भारत की समुद्री शक्ति को नई दिशा देगा.

क्यों जरूरी है यह मेगा प्रोजेक्ट?

पिछले एक दशक में चीन ने अपनी नौसेना का तेजी से विस्तार किया है. चीन हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी भी लगातार बढ़ा रहा है. चीनी युद्धपोत, पनडुब्बियां और सर्विलांस जहाज नियमित रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में दिखाई देते हैं. जिबूती में उसका पहला विदेशी नौसैनिक अड्डा पहले से सक्रिय है, जबकि पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह, श्रीलंका के हम्बनटोटा और हिंद महासागर के अन्य बंदरगाहों में चीन का बढ़ता निवेश भारत के लिए रणनीतिक चुनौती माना जाता है.

ऐसे में भारतीय नौसेना के लिए सिर्फ अपनी मौजूदा ताकत बनाए रखना पर्याप्त नहीं है. उसे भविष्य की जरूरतों के हिसाब से अधिक आधुनिक, लंबी दूरी तक ऑपरेट करने वाले और मल्टी लेवल के युद्धपोतों की जरूरत है.

3 मेगा प्रोजेक्ट, तीन बड़ी ताकत

#प्रोजेक्ट-15C

इस परियोजना के तहत 50,000 करोड़ की लागत से 4 नई पीढ़ी के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर बनाए जाएंगे. इन युद्धपोतों में अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, बेहतर एयर डिफेंस और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता होगी. ये मौजूदा कोलकाता और विशाखापत्तनम क्लास डिस्ट्रॉयर से भी ज्यादा आधुनिक होंगे.

#प्रोजेक्ट-17B

इस परियोजना में 40,000 करोड़ को लागत से 6 स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जाएंगे. इनमें से 3 युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और 3 गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) बनाएंगे. स्टेल्थ तकनीक के कारण दुश्मन के रडार पर इनकी पहचान करना कठिन होगा. इनका इस्तेमाल एस्कॉर्ट मिशन, एंटी-सबमरीन ऑपरेशन, एयर डिफेंस और समुद्री निगरानी जैसे कई अभियानों में किया जाएगा.

#प्रोजेक्ट-18A

ये भारत का सबसे महत्वाकांक्षी सरफेस वॉरशिप प्रोजेक्ट माना जा रहा है. इसके तहत 6 विशाल युद्धपोत बनाए जाएंगे, जिनका वजन 14 से 15 हजार टन होगा. ये भारत में अब तक बने सबसे बड़े सतही युद्धपोतों में शामिल होंगे. इनमें लंबी दूरी तक ऑपरेशन, मजबूत एयर एवं मिसाइल डिफेंस, आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और भविष्य के हथियारों को शामिल करने की क्षमता होगी.

चीन के खिलाफ भारत की समुद्री रणनीति

भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा अब सिर्फ हिमालयी सीमा तक सीमित नहीं है. आने वाले सालों में हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक इस प्रतिस्पर्धा का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बनेंगे. भारत के लगभग 95 प्रतिशत व्यापार (मात्रा के आधार पर) और बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात समुद्री मार्गों से होते हैं. यदि हिंद महासागर में किसी प्रतिद्वंद्वी देश का दबदबा बढ़ता है तो उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है.

चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे का विस्तार भारत के लिए चिंता का विषय रहा है. ऐसे में नए युद्धपोत भारतीय नौसेना को समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, लंबी दूरी की तैनाती, कैरियर बैटल ग्रुप की रक्षा और किसी भी संकट की स्थिति में तेजी से जवाब देने की क्षमता देंगे.

आत्मनिर्भर भारत को भी मिलेगा बड़ा फायदा

इन परियोजनाओं का एक बड़ा उद्देश्य भारत के रक्षा विनिर्माण को मजबूत करना भी है. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) जैसे सरकारी शिपयार्ड इन युद्धपोतों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे.

निर्धारित टाइमलाइन

• प्रोजेक्ट-15C: अगले एक साल में RFP जारी होने की संभावना, निर्माण लगभग तीन साल में शुरू होगा. • प्रोजेक्ट-17B: अगले 18 महीनों में RFP, निर्माण करीब चार साल में शुरू होगा. • प्रोजेक्ट-18A: अगले तीन सालों में RFP होगा, योजना अभी शुरुआती फेस में है.

हालांकि, ये तीनों योजना अभी शुरुआती चरण में है अंतिम निर्णय रक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.

क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?

यदि ये तीनों परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो भारतीय नौसेना को 16 अत्याधुनिक युद्धपोत मिलेंगे. इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री ताकत और डिटरेन्स मजबूत होगी, चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी का संतुलित जवाब देने की क्षमता बढ़ेगी और भारत इंडो-पैसिफिक में एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा.

अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण भारत की लीडिंग डिफेंस पत्रकारों में से एक हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर अपनी सटीक रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण के लिए जानी जाती हैं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने इंडिया टीवी, न्यूज़ 24, ज़ी न्यूज़, इंडिया न्यूज़, ईटीवी और रिपब्लिक भारत जैसे प्रमुख समाचार चैनलों में रिपोर्टर, एंकर, प्रोड्यूसर और खोजी पत्रकार के रूप में काम किया है. सितंबर 2022 से अंजू निर्वाण टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वह रक्षा मामलों की कवरेज का नेतृत्व करती हैं, भारत के सैन्य आधुनिकीकरण, नौसेना की प्रगति, मिसाइल प्रणालियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर कवरेज करती हैं. अंजू निर्वाण ने युद्ध क्षेत्रों से रिपोर्टिंग की है, अग्रिम पंक्ति के सैन्य अभ्यासों को कवर किया है और शीर्ष रक्षा अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं.

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