
सोशल मीडिया का मानसिक स्वास्थ पर असरImage Credit source: pexels
10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है, जिसका मकसद मानसिक स्वास्थ से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरुकता लाना और खराब मेंटल हेल्थ से जूझ रहे लोगों की मदद करने के लिए लोगों को प्रेरित करना है. आज के टाइम में लोगों का लाइफस्टाइल इतना खराब हो गया है कि इसका असर शारीरिक के साथ ही मानसिक स्वास्थ पर भी पड़ने लगा है. युवाओं से लेकर व्यस्क और यहां तक कि बच्चे भी कई घंटों तक सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं. इस दौरान या तो वो वीडियो देखते हैं या फिर अपनी खुद की पोस्ट पर लाइक्स, कमेंट्स को चेक करते रहते हैं. सोशल मीडिया पर पॉपुलर होने की चाह भी लोगों में खराब मेंटल हेल्थ को बढ़ावा दे रही है.
आपने अपने आसपास कुछ ऐसे लोग देखे होंगे, जिनमें सोशल मीडिया पर लाइक्स, व्यूज और कमेंट पाने का जबरदस्त क्रेज देखने को मिलता है. वो इसे लेकर नई-नई जानकारियां और तरकीबे निकालते रहते हैं. खासकर युवाओं और टीनएज बच्चों में ये काफी ज्यादा देखने को मिलने लगा है. एक्सपर्ट ने इस बारे में बात करते हुए बताया है कि किस तरह से इससे मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचता है.
व्यू-लाइक-कमेंट की चाह और मेंटल हेल्थ
यथार्थ हॉस्पिटल, मॉडल टाउन, नई दिल्ली की सीनियर कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट ऋचा अग्रवाल कहती हैं कि आजकल युवाओं में सोशल मीडिया पर ज्यादा लाइक्स और फॉलोअर्स पाने की चाह बढ़ रही है. इसी की वजह से कई बार कम लाइक्स या कमेंट्स मिलने पर वो अपनी तुलना दूसरों से करना शुरू कर देते हैं. यहां तक कि वो उनके आगे खुद को कम आंकने लगते हैं. इसका सीधा असर ये होता है कि उनके आत्मविश्वास में कमी आ सकती है और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ सकता है. वीडियो, फोटो पोस्ट करने के बाद लगातार दूसरों की प्रतिक्रिया का इंतजार करने की वजह से तनाव, बेचैनी हो सकती है. यहां तक कि ये नींद से जुड़ी परेशानियों का कारण भी बन सकता है.
नेगेटिव कमेंट्स का बुरा असर
सोशल मीडिया पर वीडियो या फोटो पोस्ट करने के बाद लोग बार-बार चेक करते हैं कि कितने लाइक या फिर कमेंट आए, लेकिन इसमें सबसे ध्यान देने वाली चीज होती है कि आप ट्रोलिंग जैसी चीजों को कैसे फेस कर पा रहे हैं. कई बार नेगेटिव कमेंट्स भी आने लगते हैं. ज्यादातर लोगों की मेंटल हेल्थ पर इससे कहीं न कहीं बुरा इफेक्ट पड़ता है.
साइबर बुलिंग कर सकती है परेशान
इसके अलावा कुछ पर्सनल मैसेज (DM डायरेक्ट मैसेज) भी कई बार परेशान कर देते हैं. इसके अलावा फेक आईडी बन जाना, झूठी चीजें सोशल मीडिया पर फैलने लगना,स्टॉकिंग, जैसी चीजें भी होती हैं. इसे साइबर बुलिंग कहा जाता है, जिसका शिकार कई बड़े सेलिब्रिटी भी हो चुके हैं. इससे मानसिक स्वास्थ पर कई बार बहुत गहरा असर पड़ सकता है और ये लंबे समय के लिए भावनात्मक रूप से तोड़ देने वाला भी हो सकता है.
लंबे समय तक फोन में लगे रहना
वीडियो, पोस्ट की रीच बढ़ाने और रील को स्क्रॉल करते रहने की आदत की वजह से लोग कई घंटे तक फोन में लगे रहते हैं. यहां तक कि ये ऐसी लत हो जाती है कि अगर कोई मोबाइल रखने को कह दे तो चिड़चिड़ाहट होने लगती है. ये समझना बेहद जरूरी है कि असल जिंदगी इससे कहीं ज्यादा आवश्यक होती है.
कैसे करें इसे हैंडल?
एक्सपर्ट ऋचा अग्रवाल का कहना है कि युवाओं को समझना होगा चाहिए…उनकी काबिलियत और पहचान लाइक्स या फॉलोअर्स से तय नहीं होती है. सोशल मीडिया से कुछ समय का ब्रेक लेना, दोस्तों और परिवार के साथ वक्त बिताना और अपनी भावनाओं को खुलकर साझा करना जरूरी है. सबसे अहम बात यह है कि हम अपनी तुलना दूसरों की जिंदगी से करने के बजाय अपनी खूबियों और क्षमताओं को पहचानें.
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शशि सिंह
शशि सिंह टीवी9 डिजिटल हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं. उत्तर प्रदेश के बरेली शहर से ताल्लुक रखने वाली शशि ने बरेली कॉलेज (महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय) से आर्ट्स से ग्रेजुएशन किया है और अमर उजाला से संबंद्ध इंस्टीट्यूट 'द आरोहन मीडिया स्कूल' से इंटीग्रेटेड डिजिटल मीडिया में पीजी डिप्लोमा कर चुकी हैं. इसके साथ ही अमर उजाला से ही इन्होंने बतौर जूनियर कंटेंट राइटर पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की. वह रिलीजन, रिलेशनशिप, फूड, हेल्थ, और मनोरंजन जैसे टॉपिक्स पर लिखती हैं. इन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन सालों से ज्यादा का अनुभव है. वहीं मनोरंजन के साथ राजनीति, क्राइम और देश-दुनिया की खबरों के लेखन में भी दिलचस्पी रखती हैं. इसके अलावा इन्होंने 'टेकवन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन' से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री भी ली है. वह किताबें पढ़ने, कविताएं और शायरी लिखने-पढ़ने का शौक रखती हैं और नई-नई चीजों को एक्सप्लोर करना पसंद करती हैं.
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