World Heart Day 2026: देर रात तक काम, कम नींद और घंटों बैठना, बदल रही है दिल की सेहत की कहानी

Published on 29 सित॰ 2026

World Heart Day 2026: देर रात तक काम, कम नींद और घंटों बैठना, बदल रही है दिल की सेहत की कहानी

दिल का रखें ख्यालImage Credit source: Getty Images

दिल को स्वस्थ रखने के लिए आमतौर पर खान-पान, एक्सरसाइज, धूम्रपान से दूरी और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने की सलाह दी जाती है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी शहरी जिंदगी में लंबे काम के घंटे, लगातार तनाव, नींद की कमी और घंटों बैठे रहने जैसी आदतें भी दिल की सेहत को प्रभावित कर रही हैं. ऐसे में दिल को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ डाइट और एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि पूरी दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी हो गया है. खासकर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा या धूम्रपान जैसी समस्याओं वाले लोगों के लिए तनाव, कम नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

हार्ट को हेल्दी रखने के लिए आवश्यक है कि आप सिर्फ सुबह या शाम एक वक्त एक्सरसाइज न करें, बल्कि अपने पूरे दिन के रूटीन में बदलाव करें. हालांकि ये बहुत मुश्किल चेंज नहीं हैं, बल्कि छोटी-छोटी चीजें की जा सकती हैं. तो चलिए जान लेते हैं इस बारे में एक्सपर्ट का क्या कहना है.

लंबे समय का तनाव दिल के लिए चिंता का कारण

डॉ. आनंद कुमार एम, कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, स्पर्श हॉस्पिटल, यशवंतपुर, बेंगलुरु ने कहा, अब हमें दिल की सेहत को सिर्फ कोलेस्ट्रॉल जैसी किसी एक रिपोर्ट से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. यह पूरी जीवनशैली से जुड़ा विषय है. लगातार तनाव, पर्याप्त नींद न लेना, लंबे समय तक काम करना और दिनभर बैठे रहना. ये सब मिलकर दिल के लिए अच्छा माहौल नहीं बनाते. इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ तनाव से दिल की बीमारी होती है, लेकिन तनाव ब्लड प्रेशर, नींद और रोजमर्रा की आदतों को प्रभावित कर सकता है. इसलिए जरूरी है कि ऐसी आदतों को समय रहते पहचाना जाए और धीरे-धीरे उनमें बदलाव किया जाए.

काम के दबाव में नींद से समझौता

डॉ. (मेजर) अभिनव श्रीवास्तव ने कहा, दिल की बीमारी से बचाव की बात करते समय नींद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. जो लोग लगातार कम सोते हैं, उनमें शारीरिक गतिविधि कम होने और जंक फूड खाने जैसी आदतें भी देखने को मिल सकती हैं. हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज से परेशान लोगों के लिए यह और भी जरूरी है. दिल को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ एक बदलाव करना काफी नहीं है, बल्कि ऐसी रोज की दिनचर्या बनानी जरूरी है, जिसमें शरीर को पर्याप्त आराम और कुछ न कुछ शारीरिक गतिविधि मिलती रहे.

दिनभर बैठे रहने से बढ़ी परेशानी

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली के डायरेक्टर कार्डियोलॉजी डॉ. अमर सिंघल ने कहा, सच्चाई यह है कि रोज एक घंटे जिम जाने से पूरे दिन बैठे रहने की आदत की भरपाई हमेशा नहीं हो सकती. शारीरिक गतिविधि को पूरे दिन की दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है. काम के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर में चलना, लगातार बैठे रहने से बचना और नियमित एक्सरसाइज करना मददगार हो सकता है. इसके साथ ही अनियमित खान-पान, नींद की कमी और लंबे समय तक स्क्रीन देखने जैसी आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है. दिल की बीमारी से बचाव के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि बहुत महत्वपूर्ण है.

दिल की सेहत के लिए पूरी जीवनशैली पर ध्यान जरूरी

मेट्रो हॉस्पिटल्स, दिल्ली के कार्डियोलॉजी और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार बहल ने कहा, सबसे जरूरी बदलाव यह है कि हमें बीमारी होने के बाद इलाज कराने के बजाय पहले से बचाव पर ध्यान देना चाहिए. लोगों को सीने में दर्द जैसे लक्षण आने का इंतजार नहीं करना चाहिए. नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है, लेकिन सिर्फ रिपोर्ट के आंकड़े देखना ही पर्याप्त नहीं है. यह भी समझना जरूरी है कि व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी कैसी है. अगर किसी को लगातार तनाव रहता है, नींद पूरी नहीं होती, लंबे समय तक बैठना पड़ता है और शारीरिक गतिविधि कम है, तो इन बातों को भी गंभीरता से लेना चाहिए. समय पर किए गए छोटे बदलाव बाद में गंभीर स्थिति आने के बाद किए गए बदलावों से ज्यादा मददगार हो सकते हैं.

बहुत बड़े बदलाव की नहीं जरूरत

दिल को स्वस्थ रखने के लिए हमेशा बहुत बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती. नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त आराम, पौष्टिक खान-पान, धूम्रपान से दूरी, वजन को सामान्य रखना और हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज को कंट्रोल में रखना दिल की सेहत के लिए जरूरी कदम हैं. इस विश्व हृदय दिवस का व्यापक संदेश यही है कि दिल की सेहत सिर्फ अस्पताल या डॉक्टर के पास होने वाली जांच और इलाज से तय नहीं होती. हम काम के दौरान और घर पर किस तरह की दिनचर्या अपनाते हैं, उसका भी दिल की सेहत पर असर पड़ता है. दिल को स्वस्थ रखने के लिए बचाव को सिर्फ कुछ दिनों की कोशिश नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है.

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शशि सिंह

शशि सिंह

शशि सिंह टीवी9 डिजिटल हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं. उत्तर प्रदेश के बरेली शहर से ताल्लुक रखने वाली शशि ने बरेली कॉलेज (महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय) से आर्ट्स से ग्रेजुएशन किया है और अमर उजाला से संबंद्ध इंस्टीट्यूट 'द आरोहन मीडिया स्कूल' से इंटीग्रेटेड डिजिटल मीडिया में पीजी डिप्लोमा कर चुकी हैं. इसके साथ ही अमर उजाला से ही इन्होंने बतौर जूनियर कंटेंट राइटर पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की. वह रिलीजन, रिलेशनशिप, फूड, हेल्थ, और मनोरंजन जैसे टॉपिक्स पर लिखती हैं. इन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन सालों से ज्यादा का अनुभव है. वहीं मनोरंजन के साथ राजनीति, क्राइम और देश-दुनिया की खबरों के लेखन में भी दिलचस्पी रखती हैं. इसके अलावा इन्होंने 'टेकवन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन' से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री भी ली है. वह किताबें पढ़ने, कविताएं और शायरी लिखने-पढ़ने का शौक रखती हैं और नई-नई चीजों को एक्सप्लोर करना पसंद करती हैं.

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