Ram Mandir Trust First CEO: कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा? जिन्हें बनाया गया राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ - Haribhoomi

Published on 2 सित॰ 2026

Who is Air Marshal Jitendra Mishra: कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा? जिन्हें बनाया गया राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में राम मंदिर के प्रशासनिक, प्रबंधकीय और सुरक्षा ढांचे को विश्वस्तरीय स्वरूप देने के लिए भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी सीईओ नियुक्त किया है। देवरिया के मूल निवासी एयर मार्शल मिश्रा करीब चार दशक तक वायुसेना में अपनी असाधारण सेवाएं दे चुके हैं।

Air Marshal Jitendra Mishra appointed as the first CEO of the Ram Temple Trust (file photo)

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ (फाइल फोटो)

  • Published: 02 Sep 2026, 05:01 PM IST
  • Last Updated: 02 Sep 2026, 05:08 PM IST

अयोध्या स्थित राम मंदिर परिसर की सुरक्षा, वित्तीय व्यवस्था और श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के प्रबंधन को विश्वस्तरीय बनाने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने पहली बार प्रशासनिक कमान एक अनुभवी सैन्य अधिकारी को सौंपी है।

एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा को उनके 38 वर्षों से अधिक के बेदाग सैन्य रिकॉर्ड, रणनीतिक सूझबूझ और उत्कृष्ट प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए यह जिम्मेदारी दी गई है।

​फाइटर पायलट से एयर मार्शल तक का शानदार सैन्य करियर 
देवरिया जिले के मूल निवासी जितेंद्र मिश्रा ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पुणे से अपनी सैन्य यात्रा शुरू की। इसके बाद उन्होंने एयर फोर्स अकादमी (डुंडीगल), एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल (बेंगलुरु), अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से उच्च शिक्षा व प्रशिक्षण प्राप्त किया।

उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को फाइटर पायलट के रूप में भारतीय वायु सेना में कमीशन प्राप्त किया। अपने करियर में 3000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव रखने वाले जितेंद्र मिश्रा एक कुशल फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के रूप में जाने जाते हैं।

​कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर में निभाई ऐतिहासिक भूमिका 
जितेंद्र मिश्रा को कारगिल युद्ध के दौरान लड़ाकू अभियानों और परीक्षण उड़ानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने वाले अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है। जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 तक उन्होंने भारतीय वायु सेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान उन्होंने पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायु सेना की पूरी रणनीति और हवाई अभियानों का सफल समन्वय किया। देश के लिए उनकी असाधारण और पराक्रमी सेवाओं के लिए उन्हें 'सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक' (SYSM), 'अति विशिष्ट सेवा पदक' (AVSM) और 'विशिष्ट सेवा पदक' (VSM) से नवाजा जा चुका है।

​महत्वपूर्ण पद और राम मंदिर के पहले CEO के रूप में नई भूमिका 
अपने लंबे सेवाकाल में वह फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, चीफ टेस्ट पायलट (ASTE), दो फ्रंटलाइन एयरबेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग, असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसे कई शीर्ष प्रशासनिक पदों पर रहे।

सितंबर 2026 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा ली गई अहम बैठक के बाद उन्हें राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक CEO नियुक्त किया गया। उनकी नियुक्ति से मंदिर परिसर के अनुशासन, सुरक्षा और संचालन को नई मजबूती और पारदर्शिता मिलेगी।