समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और जयंत चौधरी पर कसा गया 'चवन्नी से रुपया बनाया' वाला तंज अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ा सियासी बवंडर बन गया है। रालोद और भारतीय जनता पार्टी ने इसे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार और पूरे 'जाट समाज के अस्मिता' के अपमान से जोड़ दिया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाट वोट बैंक हमेशा से किंगमेकर की भूमिका में रहा है।
- Published: 30 Aug 2026, 09:04 AM IST
- Last Updated: 30 Aug 2026, 09:05 AM IST
उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले 'चवन्नी' बनाम 'इकन्नी' की जुबानी जंग छिड़ गई है। अखिलेश यादव ने कुछ दिनों पहले एक बयान में रालोद के साथ पुराने गठबंधन का जिक्र करते हुए तंज कसा था कि "गठबंधन वाले कहां-कहां से आ गए थे, हमने चवन्नी को रुपया बना दिया और वे छोड़कर चले गए।"
अब इस बयान को रालोद और बीजेपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और किसान समाज के स्वाभिमान से जोड़कर सपा को राजनीतिक बैकफुट पर धकेलने में जुट गए हैं।
'चवन्नी' से 'इकन्नी' तक का तंज: संगीत सोम ने बढ़ाई सियासी हलचल
मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व बीजेपी विधायक संगीत सोम ने सपा प्रमुख पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव को राजनीति में स्थापित करने वाले किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह ही थे।
संगीत सोम ने चुनौती देते हुए कहा, "आपने चौधरी चरण सिंह के परिवार और किसान बिरादरी का अपमान किया है। आपने जिन्हें चवन्नी कहा है, उनके समर्थक और 36 बिरादरी के लोग 2027 के चुनाव में आपको एक आने का भी नहीं छोड़ेंगे और पश्चिमी यूपी में सपा का खाता भी नहीं खुलने देंगे।"
रालोद ने बनाया 'जाट अस्मिता' का मुद्दा, बीजेपी भी साथ खड़ी
रालोद नेताओं और जयंत चौधरी के समर्थकों ने अखिलेश के बयान पर तीखा ऐतराज जताते हुए इसे केवल राजनीतिक तंज न मानकर पूरे जाट और किसान समाज के सम्मान पर हमला करार दिया है।
रालोद का कहना है कि जयंत चौधरी और चौधरी चरण सिंह की विरासत पर टिप्पणी करके सपा ने अपनी मानसिकता दिखाई है। बीजेपी भी इस मुद्दे को पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं के ध्रुवीकरण और रालोद-बीजेपी गठबंधन को मजबूत करने के मौके के रूप में भुना रही है।
बैकफुट पर सपा, अंकित बालियान हत्याकांड से साधने की कोशिश
'चवन्नी' बयान से जाट समाज की नाराजगी के जोखिम को देखते हुए सपा अब डैमेज कंट्रोल और नए राजनीतिक दांव में जुट गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में मुजफ्फरनगर के अंकित बालियान हत्याकांड को लेकर बयान जारी करते हुए 'जाट समाज' की जगह 'बालियान समाज' शब्द का इस्तेमाल किया।
सपा सांसद इकरा हसन और नाहिद हसन ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और अखिलेश यादव ने फोन पर बात कर न्याय का भरोसा दिलाया। सपा अब इस घटना के जरिए जाट समाज में अपनी पैठ बचाने और कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है।
2027 के समीकरणों पर पड़ेगा असर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाट वोट बैंक हमेशा से किंगमेकर की भूमिका में रहा है। अखिलेश यादव के एक बयान ने पुराने गठबंधन के जख्मों को तो हरा किया ही है, साथ ही बीजेपी और रालोद को एक मजबूत सियासी हथियार दे दिया है।
अब देखना यह होगा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदाता अखिलेश यादव के इस तंज का क्या जवाब देते हैं और पश्चिमी यूपी की 16 आने राजनीतिक ताकत किसके पाले में जाती है।