Published: Friday, October 16, 2026, 8:05 [IST]
Vidya Balan: बॉलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन आज हिंदी सिनेमा की उन कलाकारों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और दमदार अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाई है। उन्होंने अपने करियर में कई ऐसे किरदार निभाए, जिन्होंने महिलाओं को पर्दे पर देखने के पारंपरिक नजरिए को चुनौती दी। हालांकि इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। करियर की शुरुआत में उन्हें भी कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था।
विद्या बालन के साथ हुई थी असहज करनी वाली घटना
विद्या बालन ने एक पुराने इंटरव्यू में फिल्म इंडस्ट्री में काम तलाशने के दौरान हुए एक असहज अनुभव का खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि एक फिल्म के सिलसिले में उनसे मिलने आए निर्देशक ने होटल के कमरे में बातचीत करने पर जोर दिया। उस समय एक्ट्रेस को कुछ ठीक नहीं लगा और उन्होंने सूझबूझ से काम लेते हुए कमरे का दरवाजा खुला रखा। विद्या बालन ने ये भी बताया था कि इस घटना के बाद उन्हें उस फिल्म से बाहर कर दिया गया था। आइए जानते हैं कि एक्ट्रेस ने इस घटना के बारे में क्या बताया था।
जब डायरेक्टर ने होटल के कमरे में मिलने के लिए बुलाया
-विद्या बालन ने ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे को दिए एक इंटरव्यू में फिल्म इंडस्ट्री में अपने शुरुआती दिनों से जुड़ा अनुभव शेयर किया था। बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह खुद को कास्टिंग काउच का शिकार नहीं मानतीं लेकिन एक ऐसी घटना जरूर हुई थी, जिसने उन्हें असहज कर दिया था।
-विद्या बालन के मुताबिक उन्हें एक फिल्म के सिलसिले में डायरेक्टर से मिलना था। उस दौरान वह एक विज्ञापन की शूटिंग के लिए चेन्नई गई हुई थीं। वहीं निर्देशक उनसे मिलने पहुंचे थे। विद्या बालन ने उन्हें सुझाव दिया कि दोनों किसी कॉफी शॉप में बैठकर बातचीत कर सकते हैं।
-हालांकि डायरेक्टर ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बजाय होटल के रूम में जाकर बात करने पर जोर दिया। विद्या बालन के लिए ये स्थिति असहज थी क्योंकि वह उस समय अकेली थीं और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर निर्देशक सार्वजनिक जगह पर मिलने से क्यों बच रहे हैं।
विद्या बालन ने समझदारी से निकाला रास्ता
-इंटरव्यू में विद्या बालन ने बताया था कि जब वह निर्देशक के साथ होटल के रूम में गई थीं, तो उन्होंने दरवाजा बंद नहीं किया और उसे खुला ही रहने दिया। एक्ट्रेस को अंदाजा हो गया था कि उन्हें इस परिस्थिति में सतर्क रहने की जरूरत है।
-विद्या बालन के मुताबिक दरवाजा खुला रहने से वहां मौजूद व्यक्ति को ये समझ आ गया कि वह किसी भी तरह की अनुचित स्थिति को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके बाद निर्देशक करीब 5 मिनट के भीतर वहां से चला गया।
-विद्या बालन ने इस घटना को याद करते हुए बताया था कि उस समय उन्होंने अपने स्तर पर स्थिति को संभालने की कोशिश की। उन्होंने किसी सीधे टकराव के बजाय ऐसा रास्ता चुना, जिससे वह खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें और बातचीत भी वहीं समाप्त हो जाए। ये घटना उनके शुरुआती करियर के उन अनुभवों में से एक थी, जिसने फिल्म इंडस्ट्री में काम पाने के दौरान आने वाली चुनौतियों की एक झलक दिखाई।
इस घटना के बाद फिल्म से कर दिया गया बाहर
-विद्या बालन ने इंटरव्यू में ये भी कहा था कि वह इस घटना को सीधे तौर पर कास्टिंग काउच का अनुभव नहीं मानतीं। उन्होंने बताया कि जब वह इस विषय पर बात कर रही थीं, तब उन्हें यह पुराना वाकया याद आ गया। हालांकि इस मुलाकात का एक दूसरा पहलू भी था। विद्या बालन ने हंसते हुए बताया था कि उस घटना के बाद उन्हें संबंधित फिल्म से बाहर कर दिया गया।
-विद्या बालन की इस बात से उनके शुरुआती करियर में आने वाली चुनौतियों का अंदाजा लगाया जा सकता है। किसी फिल्म में काम मिलने की उम्मीद के बीच अचानक प्रोजेक्ट से बाहर हो जाना किसी भी कलाकार के लिए निराशाजनक हो सकता है। विद्या बालन ने इस अनुभव को साझा करते हुए बताया था कि उस समय उन्होंने स्थिति को किस तरह संभाला।
कास्टिंग काउच को लेकर क्या था विद्या बालन के माता-पिता का डर?
-विद्या बालन ने इसी बातचीत में बताया था कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच से जुड़ी कई कहानियां सुनी थीं। उनके माता-पिता को भी इस बात की चिंता रहती थी कि कहीं उनकी बेटी को काम की तलाश में ऐसी किसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े।
-एक्ट्रेस ने खुद को भाग्यशाली बताया था कि उन्हें अपने करियर में इस तरह के अनुभवों का बार-बार सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि चेन्नई में हुई उस मुलाकात ने उन्हें एक असहज स्थिति में जरूर डाल दिया था।
-विद्या बालन का ये अनुभव इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि फिल्म इंडस्ट्री में काम की तलाश कर रहे कलाकारों के लिए पेशेवर सीमाओं और व्यक्तिगत सुरक्षा का ध्यान रखना कितना जरूरी है। किसी भी प्रोजेक्ट के सिलसिले में मुलाकात के दौरान अगर कोई स्थिति असहज लगे तो सार्वजनिक जगह पर मिलने का विकल्प चुनना और अपनी सहजता को प्राथमिकता देना जरूरी है।
टीवी से बॉलीवुड तक ऐसा रहा विद्या बालन का सफर
-विद्या बालन ने अपने करियर की शुरुआत टेलीविजन से की थी। पॉपुलर टीवी शो 'हम पांच' में काम करके उन्होंने दर्शकों के बीच पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने साल 2003 में बंगाली फिल्म 'भालो थेको' से बड़े पर्दे पर कदम रखा था।
-साल 2005 में आई फिल्म 'परिणीता' से उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इस फिल्म में उनके अभिनय को सराहना मिली और उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद विद्या बालन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए अपनी अभिनय क्षमता साबित की।
-'लगे रहो मुन्ना भाई', 'भूल भुलैया', 'पा', 'कहानी' और 'तुम्हारी सुलु' जैसी फिल्मों में उनके काम को दर्शकों ने काफी पसंद किया। वहीं साल 2011 में रिलीज हुई 'द डर्टी पिक्चर' मूवी में उनके अभिनय ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ एक्ट्रेस का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।
-विद्या बालन ने अपने करियर में ऐसे किरदारों को चुना, जिनमें महिला पात्रों को कहानी के केंद्र में रखा गया। यही वजह है कि आज उन्हें हिंदी सिनेमा की प्रतिभाशाली और बेबाक एक्ट्रेसेस में गिना जाता है।
मुश्किल अनुभवों के बावजूद बनाई अपनी अलग पहचान
-विद्या बालन के करियर का सफर इस बात का उदाहरण है कि सफलता तक पहुंचने के लिए प्रतिभा के साथ धैर्य और आत्मविश्वास भी जरूरी हैं। शुरुआती दिनों में आई चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने अभिनय पर ध्यान बनाए रखा और धीरे-धीरे इंडस्ट्री में मजबूत पहचान बनाई।
-चेन्नई में निर्देशक के साथ हुई घटना को याद करते हुए विद्या बालन ने अपने अनुभव को जिस तरह शेयर किया, उससे उनके शुरुआती संघर्ष की एक अनकही कहानी सामने आती है। आज विद्या बालन अपने दमदार किरदारों और बेबाक विचारों के लिए जानी जाती हैं। उनका सफर बताता है कि शुरुआती मुश्किलें किसी कलाकार की पूरी पहचान तय नहीं करतीं।