Updated: Thursday, July 23, 2026, 18:48 [IST]
Uttarakhand UTU Paper Leak: NEET पेपर लीक के चल रहे राष्ट्रव्यापी विवाद और CJP जैसे आंदोलनों के बीच उत्तराखंड में एक और बड़ा पेपर लीक मामला सामने आया है। बताया या जा रहा है कि वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी (VMSB UTU) ने दो सब्जेक्ट के BTech सेमेस्टर परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। परीक्षा से पहले ही पेपर लीक होने की आशंका पर यूनिवर्सिटी ने तुरंत एक्शन लिया।
यह घटना न सिर्फ उत्तराखंड की परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़ा कर रही है, बल्कि पूरे देश में परीक्षा सुधार की मांग को और तेज कर रही है। आइए इस मामले को विस्तार से समझते हैं...
Who Is Paper Leak Accused Ashish Kumar Gupta: कौन है पेपर लीक का दोषी आशीष कुमार गुप्ता ?
VMSB UTU ने इवन सेमेस्टर 2025-26 की दो परीक्षाएं रद्द की हैं। इसमें Machine Learning for Internet of Things (IOTT004) और Electromagnetic Field Theory (ECT043) शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून के असिस्टेंट प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता पर मुख्य आरोप है। वे परीक्षा में एक्सटर्नल इनविजिलेटर भी थे। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि उन्होंने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र छात्रों के साथ इंस्टीट्यूट के इंटरनल पोर्टल और WhatsApp पर शेयर कर दिए।
यूनिवर्सिटी ने तुरंत हाई-लेवल जांच समिति गठित की। कॉलेज की इन-हाउस जांच और यूनिवर्सिटी की जांच दोनों ने लीक की पुष्टि की। नतीजे में दोनों परीक्षाएं रद्द कर दी गईं। नई परीक्षाएं अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह में प्रस्तावित हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी संबद्ध कॉलेजों के डायरेक्टर्स और प्रिंसिपल्स को छात्रों को तुरंत सूचित करने के निर्देश दिए। आशीष कुमार गुप्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और उन्हें 7 साल के लिए डिबार किया गया है।
NEET प्रोटेस्ट के बीच यह लीक क्यों महत्वपूर्ण?
आपको बता दें कि, यह घटना NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के ठीक बाद आई है, जिसमें लाखों छात्र प्रभावित हुए और CJP (Cockroach Janata Party) जैसे आंदोलनों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उत्तराखंड में UTU लीक ने राष्ट्रीय बहस को और हवा दी है। छात्रों में गुस्सा है क्योंकि सेमेस्टर परीक्षाएं उनके कैरियर का अहम हिस्सा होती हैं। हजारों छात्रों का समय, मेहनत और तैयारी बर्बाद हुई है। कई छात्र नई तारीखों की घोषणा और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कुछ जगहों पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए।
उत्तराखंड का सख्त एंटी-चीटिंग कानून: फिर भी लीक क्यों?
उत्तराखंड सरकार ने कुछ साल पहले देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया था। इसमें पेपर लीक करने वालों के लिए भारी जुर्माना, जेल और संपत्ति जब्त करने जैसे प्रावधान हैं। फिर भी पेपर लीक जैसे मामले सामने आ रहे हैं। सवाल उठता है कि कानून का भय क्यों नहीं? क्या प्रशासनिक लापरवाही है? क्या कॉलेज स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है? पिछले मामलों (जैसे UKSSSC) में भी SIT, CBI जांच और सख्त कार्रवाई हुई, लेकिन समस्या जड़ से नहीं सुलझ रही है।
BJP सरकार की भूमिका क्या?
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार पेपर लीक को बर्दाश्त नहीं करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तकनीकी शिक्षा विभाग और UTU प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने तकनीकी शिक्षा सचिव और यूनिवर्सिटी को निष्पक्ष जांच के सख्त निर्देश दिए। जोशी ने याद दिलाया कि CM पहले भी छात्रों के बीच जाकर CBI जांच की घोषणा कर चुके हैं। अगले 1-2 दिनों में जांच के महत्वपूर्ण परिणाम आने की उम्मीद है। दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।