India on US Tariff: अमेरिका के 100 प्रतिशत टैरिफ का भारत ने करारा जवाब दिया है. भारत ने कहा है कि वह अपनी शर्तों के हिसाब से तेज की खरीदारी जारी रखेगा. विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इसे लेकर एक बयान जारी किया.
India on US Tariff: अमेरिका के 100 प्रतिशत टैरिफ का भारत ने करारा जवाब दिया है. भारत ने कहा है कि वह अपनी शर्तों के हिसाब से तेज की खरीदारी जारी रखेगा. विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इसे लेकर एक बयान जारी किया.
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सौ फीसदी टैरिफ पर भारत का US को करारा जवाब Photograph: (ANI/X@WhiteHouse)
India on US Tariff: अमेरिकी संसद के निचले सदन- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बुधवार (16 सितंबर) को 'सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट' पारित हो गया. इस बिल के पास होने के बाद अमेरिका भारत-चीन समेत दुनिया भर के देशों पर रूस से तेल खरीदने पर उनके सामानों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का रास्ता साफ हो गया है. इसके बाद भारत ने वाशिंगटन को करारा जवाब दिया है.
भारत ने कहा है कि वह अपनी शर्तों पर तेल खरीदेगा और किसी के सामने नहीं झुकेगा. गुरुवार को विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस की खरीद जारी रखेगा. बता दें कि 16 सितंबर 2026 को पारित अमेरिकी विधेयक में रूस से ऊर्जा आयात करने वाले मुल्कों पर कड़े अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जिसका सीधा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है.
भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून (Sanctioning Russia and Iran Act) के पारित होने का संज्ञान लिया है और वह इस मामले में आगे की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है. जैसा कि पहले भी कई बार कहा जा चुका है, भारत अपनी 1.4 अरब आबादी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त करके और बाज़ार की बदलती स्थितियों के आधार पर ऐसा करना जारी रखेगा.
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 17, 2026
रूप पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर क्या बोला विदेश मंत्रालय?
वहीं रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि सरकार इसके असर से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी. भारत का ये बयान US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में उस बिल के पास होने के बाद आया है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर प्रतिबंध लगाने और भारत और चीन समेत तेल और गैस के क्षेत्र में उसके व्यापारिक साझेदारों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देगा. 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' नाम का यह बिल पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने पास किया था. बुधवार शाम को हाउस ने 262-159 वोटों से इसे मंजूरी दी और अब यह बिल ट्रंप के पास कानून बनने के लिए जाएगा.
रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के पक्ष में किसने दिया वोट?
रूप पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल के पक्ष में 203 रिपब्लिकन के अलावा, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सदस्य ने भी वोट किया. वहीं रिपब्लिकन के 7 और डेमोक्रेट के 152 सदस्यों ने इसका विरोध किया. बता दें कि डेमोक्रेट्स का विरोध मुख्य रूप से ट्रंप को दिए गए टैरिफ अधिकारों को लेकर था. इस नए बिल का नाम साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिनका जुलाई में निधन हो गया था. उन्होंने इस बिल के लिए समर्थन जुटाने में एक साल से ज्यादा का समय दिया था.
बिल पर बहस के दौरान डेमोक्रेट कांग्रेसमैन रिचर्ड नील ने कहा, "हम इस राष्ट्रपति को और ज्यादा टैरिफ अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं." नया बिल न केवल रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करता है, बल्कि उन जहाजों के "शैडो फ्लीट" (गुप्त बेड़े) पर भी प्रतिबंध लगाने की ताकत रखता है जो मॉस्को को तेल की डिलीवरी पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं.
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नए बिल से ट्रंप को मिल जाएगा भारत-चीन पर टैरिफ लगाने का अधिकार?
बता दें कि इस नए बिल में ट्रंप को चीन, भारत और दूसरे देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देने की भी बात है, ताकि रूसी तेल और गैस पर उनकी निर्भरता कम हो सके. साथ ही, इसमें ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है. बिल पास होने के बाद डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने पत्रकारों से कहा, "चीन और भारत, बेहतर होगा कि आप अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें."
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