Sep 07, 2026 09:16 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

उत्तराखंड सरकार ने मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना शुरू की है। जिसके तहत 11 हजार छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग मिलेगी।

कोचिंग (प्रतीकात्मक तस्वीर)
पहाड़ों की गोद में बसे उत्तराखंड के हजारों नौजवानों के लिए सोमवार का दिन किसी सौगात से कम नहीं रहा। पैसों की तंगी की वजह से जिन छात्रों का यूपीएससी, एसएससी या बैंकिंग जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी का सपना अधूरा रह जाता था, अब उनके लिए राज्य सरकार खुद आगे आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7 सितंबर को मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना का शुभारंभ करते हुए ऐलान किया कि प्रदेश के 11 हजार विद्यार्थियों को बिल्कुल मुफ्त में ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी। यह योजना उन छात्रों के लिए वरदान साबित होगी, जो प्रतिभा तो रखते हैं मगर संसाधनों की कमी उनके रास्ते का रोड़ा बन जाती है।
किस परीक्षा के लिए कितने छात्रों को मिलेगा मौका
सरकार ने इस योजना को बड़े ही सोच-समझकर बनाया है, ताकि हर तरह की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को इसका फायदा मिल सके। योजना के पहले चरण में कुल 11 हजार स्टूडेंट्स को इससे जोड़ा जाएगा। इनमें से यूपीएसी और राज्य पीसीएस की तैयारी करने वाले 2,000 छात्रों को कोचिंग मिलेगी, जबकि एसएससी, रेलवे और बैंकिंग जैसी परीक्षाओं के लिए सबसे ज्यादा यानी 5,000 सीटें रखी गई हैं। इसके अलावा डिफेंस सर्विसेज की तैयारी करने वाले 2,000 युवाओं, NET, GATE, CSIR-JRF के लिए 1,000 तथा CAT-MAT जैसी मैनेजमेंट परीक्षाओं के लिए भी 1,000 विद्यार्थियों को इस मुहिम में शामिल किया जाएगा।
स्क्रीनिंग टेस्ट से होगा चयन
अब सवाल उठता है कि इतने सारे छात्रों में से चुनाव कैसे होगा? इसके लिए सरकार ने साफ रास्ता तय किया है, जिसके तहत एक खुली ऑनलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा। जो भी छात्र इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें पहले तय पोर्टल पर आवेदन करना होगा और फिर स्क्रीनिंग परीक्षा में शामिल होना होगा। इस परीक्षा में जो बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उन्हीं का चयन आगे की कोचिंग के लिए किया जाएगा। यानी टॉपर और मेहनती छात्रों को यहां प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि योजना का असली फायदा उन्हीं तक पहुंचे जो वाकई गंभीरता से तैयारी में जुटे हैं।
छात्रों को पूरा डिजिटल पैकेज मिलेगा
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि छात्रों को महज लाइव ऑनलाइन क्लासेज तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्हें रिकॉर्डेड लेक्चर की सुविधा भी मिलेगी, ताकि जो टॉपिक क्लास में समझ न आया हो, उसे बाद में दोबारा देखा जा सके। साथ ही डिजिटल स्टडी मटेरियल, विषयवार सवालों के बैंक, नियमित टेस्ट और मॉक टेस्ट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इस तरह की टेस्टिंग व्यवस्था से छात्रों को यह पता चल सकेगा कि उनकी किस विषय में पकड़ कमजोर है और कहां और मेहनत करने की जरूरत है।
गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने दिल्ली की स्टडी आईक्यू, लखनऊ की महेंद्रा प्राइवेट लिमिटेड और देहरादून की दून ड्रीम्स जैसी नामी संस्थाओं को इस अभियान से जोड़ा है। इन्हीं के अनुभवी शिक्षक और विषय-विशेषज्ञ छात्रों को पढ़ाएंगे। इतना ही नहीं, देशभर के मशहूर ट्यूटरों को भी इस मुहिम में शामिल किया जाएगा, जिससे पहाड़ी राज्य के बच्चों को देश के बड़े शहरों जैसी पढ़ाई घर बैठे मिल सके।
आगे बनेगा अलग युवा आयोग
लॉन्च कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह योजना अभी अपने पहले चरण में है और आने वाले समय में और भी छात्र इससे जुड़ेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सिर्फ मेहनत करने से ही सफलता नहीं मिलती, बल्कि सही दिशा, अच्छी रणनीति और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन भी उतना ही जरूरी होता है। खासतौर पर दूरदराज और पहाड़ी इलाकों के प्रतिभाशाली छात्रों की परेशानी को समझते हुए यह पहल शुरू की गई है, ताकि आर्थिक तंगी किसी के सपनों के आड़े न आए।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwari
शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव
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