
चंबल के बागी का पोता बना अधिकारी
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में कई उम्मीदवारों को असफलता, आर्थिक चुनौतियों और करियर से जुड़े कठिन फैसलों का सामना करना पड़ता है. देव प्रभाकर सिंह तोमर की कहानी भी ऐसे ही संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल है. चंबल क्षेत्र से आने वाले तोमर ने सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए IIT रोपड़ से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की. इसके बाद उन्होंने नीदरलैंड्स में फिलिप्स कंपनी में नौकरी की, लेकिन विदेश में स्थिर करियर के बावजूद यूपीएससी का सपना नहीं छोड़ा. आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया और कई प्रयासों के बाद UPSC CSE 2025 में 629वीं रैंक हासिल की.
चंबल से IIT रोपड़ तक का सफर
देव प्रभाकर सिंह तोमर का शुरुआती जीवन चंबल क्षेत्र में बीता. उन्होंने अपनी पढ़ाई मध्य प्रदेश बोर्ड के स्कूल से शुरू की. छठी कक्षा में उनका एडमिशन CBSE स्कूल में हुआ. ग्रामीण बैकग्राउंड से आने के कारण नए स्कूल का माहौल और भाषा उनके लिए शुरुआत में चुनौतीपूर्ण रहे.
इंजीनियरिंग को करियर के तौर पर चुना
कक्षा 11 तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने इंजीनियरिंग को करियर के तौर पर चुना और एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी शुरू कर दी. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह कोटा जाकर कोचिंग कर सकें. इसलिए उन्होंने स्कूल की पढ़ाई के साथ किताबों और सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया. मेहनत के दम पर उन्हें IIT रोपड़ में एडमिश मिला, जहां उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की.
नीदरलैंड्स में मिली नौकरी
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद तोमर के सामने नौकरी पाने की चुनौती थी. उन्होंने खुद अलग-अलग कंपनियों में आवेदन करना शुरू किया. इसी दौरान उन्हें नीदरलैंड्स की फिलिप्स कंपनी से नौकरी का ऑफर मिला. इसके बाद वह विदेश चले गए और प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. नौकरी और अच्छा करियर होने के बावजूद कुछ समय बाद उन्होंने अपने भविष्य को लेकर दोबारा विचार किया. उन्हें महसूस हुआ कि उनका लक्ष्य कुछ और है.
नौकरी छोड़ भारत लौटे
यूपीएससी की तैयारी के लिए तोमर ने विदेश की नौकरी छोड़ने का कठिन फैसला लिया और भारत वापस आ गए. इसके बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का सफर शुरू किया. कई प्रयासों और चुनौतियों के बाद UPSC CSE 2025 में उन्होंने AIR 629 हासिल की. उनका चयन भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) के लिए हुआ. अभी वह रेल मंत्रालय में कार्यरत हैं. तोमर की यात्रा बताती है कि करियर में लिया गया बड़ा फैसला, लगातार प्रयास और असफलताओं से सीखना किसी लक्ष्य तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

सपना यादव
दिल्ली में जन्मीं सपना यादव TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों से ज्यादा के अनुभव के साथ काम जारी है. ह्यूमन इंटरेस्ट, राजनीति, वर्ल्ड, एजुकेशन, नॉलेज, करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी रखती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता को लक्ष्य बनाया, फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा इन टीवी जर्नलिज्म किया, जामिया से ही हिस्ट्री में मास्टर्स भी किया और फिर इसके बाद गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. मास कम्यूनिकेशन में पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा. इसके बाद उन्होंने बतौर ट्रेनी TV9 भारतवर्ष डिजिटल में एक साल तक काम किया. ट्रेनी के दौरान अलग-अलग तरह की खबरों का अनुभव लेने के बाद TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्टेंट प्रड्यूसर के पद पर काम शुरू किया. यहां पर एंकरिंग, वॉइस ओवर, वीडियो प्रोडक्शन, न्यूज राइटिंग जैसे काम किए. इस समय वह एजुकेशन डेस्क पर कार्यरत हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर से जुड़े विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं और यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर कर रही हैं. सपना यादव को ट्रेवल करना, लिखना- पढ़ना पसंद है और वो प्रकृति को करीब से महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं. पत्रकारिता में सफर अभी जारी है.
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