UP Elections 2027: उत्तर प्रदेश के एटा जिले का सीटवार परिणाम…

Published on 18 अक्टू॰ 2026

ऐतिहासिक रूप से एटा की राजनीति में समाजवादी पार्टी (SP), भारतीय जनता पार्टी (BJP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और क्षेत्र के कद्दावर स्थानीय नेताओं के प्रभाव के बीच दिलचस्प व बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलता है.

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ऐतिहासिक रूप से एटा की राजनीति में समाजवादी पार्टी (SP), भारतीय जनता पार्टी (BJP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और क्षेत्र के कद्दावर स्थानीय नेताओं के प्रभाव के बीच दिलचस्प व बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलता है.

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उत्तर प्रदेश के मध्य-पश्चिम और बृज अंचल की सांस्कृतिक सीमा पर स्थित एटा जिला केवल अपनी प्राचीन ऐतिहासिक विरासत, घुंघरुओं की झंकार, अनूठी कृषि संस्कृति और हथकरघा व पीतल उद्योग के पारंपरिक स्वरूप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला प्रदेश की सियासत में 'राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़' देने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण सियासी गढ़ माना जाता है. जहां आसपास के जिले अपने पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव के लिए जाने जाते हैं, वहीं एटा को अलीगढ़, मैनपुरी और आगरा के बीच की वह सियासी धुरी होने का गौरव प्राप्त है, जो राज्य के चुनावी मिज़ाज की सटीक दिशा तय करती है. वीरों की इस पावन माटी और संघर्षशील किसानों की कर्मभूमि का हर एक सामाजिक मोड़ समूचे बृज क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को बदलने की ताकत रखता है. आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक रूप से सजग इस जिले में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है.

एटा न केवल प्रदेश का एक प्रमुख कृषि व सांस्कृतिक केंद्र है, बल्कि ऐतिहासिक अछरलगढ़, प्राचीन मंदिर, पटियाली का अमीर खुसरो से जुड़ा पौराणिक वैभव और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पटल पर चमकती घुंघरुओं व पीतल उद्योग की विरासत इसकी विशिष्ट पहचान हैं. कृषि आधारित बाजारों से लेकर जलेसर के पारंपरिक उद्योग बेल्ट तक, और मारहरा के राजनीतिक रूप से सजग अंचलों से लेकर अलीगंज के ग्रामीण इलाकों तक, एटा की समझदार जनता का हर एक सियासी फैसला लखनऊ के सिंहासन के समीकरणों को सीधे प्रभावित करता है.

‘कुर्सी का काउंटडाउन’ की इस सीरीज में आज बात एटा जिले की...

एटा की राजनीति का मिज़ाज राज्य के अन्य जिलों की तुलना में बेहद संवेदनशील, जातिगत रूप से जागरूक और चुनावी दृष्टि से अत्यंत निर्णायक माना जाता है. 4 विधानसभा सीटों (एटा सदर, अलीगंज, मारहरा और जलेसर) वाला यह जिला सामाजिक, रणनीतिक और कृषि-औद्योगिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण है. यहां चुनावी वैतरणी पार करने के लिए किसानों के लिए सिंचाई व बिजली की बेहतर व्यवस्था, जलेसर के पीतल उद्योग के पुनरुद्धार व कच्चे माल पर राहत, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, बेहतर स्वास्थ्य तंत्र, शिक्षा का विस्तार और बुनियादी ढांचे का विकास बेहद निर्णायक सिद्ध होते हैं.

ऐतिहासिक रूप से एटा की राजनीति में समाजवादी पार्टी (SP), भारतीय जनता पार्टी (BJP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और क्षेत्र के कद्दावर स्थानीय नेताओं के प्रभाव के बीच दिलचस्प व बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलता है. यहां का लोधी, यादव, शाक्य, ठाकुर, ब्राह्मण और दलित सामाजिक समीकरण हर बार चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है. एटा की राजनीति में लंबे समय से कृषि विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, स्थानीय पहचान और सामाजिक समीकरण ही हार-जीत की दिशा तय करते आए हैं.

यहां के सियासी मैदान में मुख्य मुद्दे जलेसर के पीतल उद्योग की चुनौतियां, किसानों की समस्याएं, बंद पड़े रोजगार के साधनों का विस्तार, क्षेत्र का पलायन रोकना और युवाओं के लिए बेहतर अवसरों के इर्द-गिर्द घूमते हैं. आखिर एटा जिले की विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किन सीटों पर किस दल का पलड़ा भारी रहा है? और आगामी महामुकाबले में किसकी चुनावी रणनीति सटीक बैठेगी? आइये सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं…

 2011 की जनगणना के अनुसार, एटा जिले की कुल आबादी और साक्षरता दर

जनसंख्या आंकड़े 

श्रेणी कुल आबादी 

कुल आबादी

1,761,152

पुरुष आबादी

947,339

महिला आबादी 

827,141

साक्षरता दर

श्रेणी साक्षरता प्रतिशत 

कुल साक्षरता 

73.27%

पुरुष साक्षरता

81.28%

महिला साक्षरता

58.80%

एटा जिले की धार्मिक आबादी

धर्म / समुदायजनसंख्याप्रतिशत (अनुमानित)

हिंदू

1,611,126

90.79%

मुस्लिम

146,346

8.25%

जैन

5,671

0.32%

बौद्ध

2,887

0.16%

ईसाई

2,464

0.14%

सिख

708

0.04%

अन्य

5,260

0.30%

कुल योग

1,774,462

100.00%

 2022 विधानसभा चुनाव परिणाम 

विधानसभा सीट

उम्मीदवार का नाम

राजनीतिक पार्टी

कुल मिले वोट

अलीगंज (103)

सत्यपाल सिंह राठौर

BJP

1,02,873

रामेश्वर सिंह यादव

SP

99,063

सऊद अली खान (जुनैद मियां)

BSP

17,751

एटा सदर (104)

विपिन कुमार डेविड

BJP

97,539

जुगेंद्र सिंह यादव

SP

80,292

अजय सिंह

BSP

26,871

मारहरा (105)

वीरेंद्र सिंह लोधी

BJP

1,01,387

अमित गौरव

SP

83,778

योगेश कुमार

BSP

16,900

जलेसर - SC (106)

संजीव कुमार दिवाकर

BJP

91,339

रंजीत सुमन

SP

86,898

आकाश सिंह

BSP

19,364

 जानें इन सीटों के बारे में

अलीगंज विधानसभा सीट (103): यह सीट भाजपा और सपा के बीच बेहद कड़े मुकाबले की गवाह रही है, जहाँ 2022 में भाजपा के सत्यपाल सिंह राठौर ने सपा के मजबूत नेता रामेश्वर सिंह यादव को करीब 3,810 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया था.

एटा सदर विधानसभा सीट (104): जिले की इस मुख्य केंद्रीय सीट पर भाजपा के विपिन कुमार डेविड ने सपा के जुगेंद्र सिंह यादव को हराकर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी.

मारहरा विधानसभा सीट (105): इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के वीरेंद्र सिंह लोधी ने एक लाख से अधिक वोट हासिल करके सपा के अमित गौरव पर एक बड़ी और एकतरफा जीत दर्ज की थी.

जलेसर (आरक्षित) विधानसभा सीट (106): अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर भाजपा के संजीव कुमार दिवाकर और सपा के रंजीत सुमन के बीच कांटे की टक्कर हुई, जिसमें अंततः भाजपा ने बाजी मारी.