Updated On: Jul 19, 2026 | 07:35 PM IST
विज्ञापन
सार
Uttar Pradesh News: योगी सरकार टाटा मॉडल पर उत्तर प्रदेश में 16 नए औद्योगिक परिसर विकसित करेगी। परियोजना से कौशल विकास, निवेश और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

योगी आदित्यनाथ (सोर्स- सोशल मीडिया)
विस्तार
UP SVPEIZ Project: महाराष्ट्र व गुजरात में टाटा समूह द्वारा विकसित मॉडल की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर 16 नए औद्योगिक परिसर विकसित किए जाएंगे। युवाओं को कौशल, रोजगार, उद्योग और उद्यमिता से एक ही मंच पर जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र (एसवीपीईआईजेड) परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है।
इस साल उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर घोषित इस परियोजना के तहत पहले चरण में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग के माध्यम से 5, यूपीसीडा के माध्यम से 05, यूपीईडा के माध्यम से 02, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के माध्यम से 02, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के माध्यम से 01 तथा गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से 01, कुल 16 एसवीपीईआईजेड केंद्रों की स्थापना, विकास एवं संचालन कराया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश को 09 हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित औद्योगिक एवं कौशल विकास नेटवर्क के रूप में विकसित किया जाएगा।
निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में अभूतपूर्व वृद्धि
प्रमुख सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम शशि भूषण लाल सुशील ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। ग्लोबल निवेशकों के आगमन, नए औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार तथा बदलती तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर एसवीपीईआईजेड की अवधारणा तैयार की गई है, ताकि प्रदेश के युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से सीधे जोड़ा जा सके।
सम्बंधित ख़बरें
प्रदेश में विकसित होगा 09 हब एंड स्पोक जोन
उन्होंने बताया कि प्रदेश को 09 हब एंड स्पोक जोन में विकसित किया जाएगा। इनमें गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद एवं हापुड़, सहारनपुर मंडल के साथ मेरठ, बागपत और बुलंदशहर, मुरादाबाद एवं बरेली मंडल, आगरा एवं अलीगढ़ मंडल, लखनऊ एवं अयोध्या मंडल, कानपुर एवं प्रयागराज मंडल, चित्रकूट, झांसी एवं विंध्याचल मंडल, वाराणसी एवं आजमगढ़ मंडल तथा गोरखपुर, बस्ती एवं देवीपाटन मंडल को शामिल किया गया है। प्रत्येक जोन स्थानीय औद्योगिक क्षमता, उपलब्ध संसाधनों और निवेश की संभावनाओं के अनुरूप विकसित होगा।
युवाओं को बड़े पैमाने पर मिलेंगे रोजगार
प्रमुख सचिव ने बताया कि प्रत्येक एसवीपीईआईजेड को वन स्टॉप इंडस्ट्रियल, स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां कौशल विकास केंद्र, औद्योगिक भूखंड, प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेड, साझा सुविधा केंद्र, रोजगार सहायता केंद्र, उद्यमिता सहायता केंद्र, डिजिटल साक्षरता, विदेशी भाषा प्रशिक्षण, व्यावसायिक सेवाएं तथा आधुनिक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
प्लग एंड प्ले व्यवस्था के तहत उद्यमियों को तैयार औद्योगिक परिसर, विद्युत, जल, सड़क और अन्य आवश्यक सुविधाओं सहित ऐसा वातावरण मिलेगा, जहां वे न्यूनतम समय में उत्पादन शुरू कर सकेंगे। इससे निवेश को गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल पर होगा काम
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में परियोजना का भूमि उपयोग भी आधुनिक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप निर्धारित किया गया है। इसमें कौशल विकास, औद्योगिक इकाइयों, प्लग एंड प्ले सुविधाओं, हरित क्षेत्र, सड़क एवं आधारभूत संरचना तथा वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए पृथक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। जहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होगी, वहां बहुमंजिला औद्योगिक परिसर और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल अपनाया जाएगा।
उद्योगों की सक्रिय भागीदारी होगी सुनिश्चित
प्रमुख सचिव ने बताया कि प्रत्येक हब के लिए एसपीवी का गठन किया जाएगा तथा संबंधित हब के प्रमुख निवेशक को उसका अध्यक्ष बनाया जाएगा। इससे उद्योगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी और परियोजना का संचालन अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख होगा। उन्होंने बताया कि परियोजना का स्वरूप तय करने से पहले अधिकारियों के दल ने गुजरात और महाराष्ट्र में टाटा समूह द्वारा विकसित औद्योगिक एवं कौशल विकास मॉडल का अध्ययन एवं भ्रमण किया।
ये भी पढे़ं- राहुल गांधी के पत्र के बाद सियासी घमासान, BJP ने किया पलटवार; बोली- राम की अचानक चिंता जताना राजनीतिक ड्रामा
वहां के सफल अनुभवों और वैश्विक मानकों के आधार पर उत्तर प्रदेश के लिए उपयुक्त मॉडल तैयार किया गया है। परियोजना के विकास और संचालन में भी प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
