UNGA81: जनरल डिबेट का समापन, शब्दों को सार्थक कार्रवाई में बदलने का आहवान
29 सितम्बर 2026 यूएन मामले
संयुक्त राष्ट्र महासभा की छह दिवसीय उच्चस्तरीय जनरल डिबेट में एक सन्देश सबसे अधिक गूँजा: शान्ति. यूएन महासभा के 81वें सत्र के दौरान विश्व नेताओं के प्रमुख सन्देशों और 193 सदस्य देशों वाली महासभा के आगामी कामकाज पर एक नज़र.
यूएन महासभा के अध्यक्ष ख़लीलुर रहमान ने सोमवार को जनरल डिबेट का समापन करते हुए कहा कि नेताओं ने हिंसक टकराव, विकास में ठहराव, बढ़ती असमानता और तेज़ी से बदलती टैक्नॉलॉजी जैसी वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की.
उन्होंने कहा कि अलग-अलग दृष्टिकोणों के बावजूद, सभी नेताओं के सन्देशों में एक साझा विश्वास झलका - संयुक्त राष्ट्र की भूमिका अपरिहार्य है.
छह दिवसीय चर्चा, छह प्रमुख सन्देश
- शान्ति, सर्वोच्च प्राथमिकता: महासभा अध्यक्ष ख़लीलुर रहमान ने कहा कि नेताओं ने कहा कि शान्ति कोई दूर स्थित लक्ष्य नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और आम नागरिकों की रक्षा के लिए तात्कालिक आवश्यकता है.
- विकास लक्ष्यों के लिए खिसकता समय: सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में से केवल कुछ ही लक्ष्य सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. क्या अब तक और अधिक प्रयास किए जाने चाहिए थे? महासभा अध्यक्ष ने कहा, “इसका जवाब निश्चित रूप से हाँ होना चाहिए.”
- असमानता, एक बड़ी चुनौती: उन्होंने कहा कि क़र्ज़ के भारी बोझ, जलवायु जोखिमों और वित्तीय सीमाओं से जूझ रहे देशों की आवाज़, वैश्विक आर्थिक फ़ैसले लेने वाली संस्थाओं में सबसे कम सुनी जाती है.
- मानवाधिकारों की असली परीक्षा: उन्होंने आम नागरिकों, अल्पसंख्यकों, प्रवासियों और शरणार्थियों के साथ व्यवहार तथा महिलाओं एवं लड़कियों को शिक्षा, रोज़गार व सार्वजनिक जीवन से वंचित किए जाने पर चिन्ता जताई. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में ही मानवाधिकारों की रक्षा की असली परीक्षा होती है.
- एआई, चर्चा के केन्द्र में: चार वर्ष पहले महासभा सत्र के दौरान केवल पाँच प्रतिनिधियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का मुद्दा उठाया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या 128 रही. एआई पर नियंत्रण, जवाबदेही और न्यायसंगत पहुँच चर्चा के प्रमुख विषय रहे.
- भरोसे की बहाली में कठिनाई: ख़लीलुर रहमान ने कहा, “भरोसा आदेश देकर हासिल नहीं किया जा सकता. इसे कथनी और करनी में एकरूपता से अर्जित करना होता है.”
AI का तेज़ी से बढ़ता प्रभाव
बड़ा बदलाव: महासभा के उच्चस्तरीय सत्र में हुई चर्चा दर्शाती है कि कूटनैतिक विमर्श में एआई का महत्व कितनी तेज़ी से बढ़ा है.
महासभा अध्यक्ष ने कहा कि इस वर्ष जलवायु परिवर्तन और मानवाधिकारों से भी अधिक प्रतिनिधिमंडलों ने एआई का मुद्दा उठाया. नेताओं ने इसकी अपार सम्भावनाओं के साथ अहम सवाल भी उठाए: इसे कौन विकसित करता है? लाभ किसे मिलता है? और जोखिम कौन उठाता है?
उन्होंने एक वक्तव्य का विशेष उल्लेख किया, “किसी मशीन को लोकतांत्रिक वैधता प्राप्त नहीं होती और कोई भी एल्गोरिदम संवैधानिक ज़िम्मेदारी नहीं उठा सकता.”
उन्होंने कहा कि AI का संचालन मानव-केन्द्रित और समावेशी होना चाहिए, जिसमें विकासशील देशों की ज़रूरतों का भी ध्यान रखा जाए. साथ ही, ऐसी नई वैश्विक खाई पैदा होने से रोकना होगा, जहाँ पूरी दुनिया का भविष्य तय करने वाली टैक्नॉलॉजी पर कुछ ही देशों और कम्पनियों का नियंत्रण हो.
सुधार केवल बजट तक सीमित नहीं
बड़ा सवाल: क्या पुराने दौर में बनी संस्थाएँ वर्तमान चुनौतियों से निपट सकती हैं?
महासभा अध्यक्ष ख़लीलुर रहमान ने कहा कि नेताओं ने बहुपक्षवाद का समर्थन करने के साथ उससे जुड़ी संस्थाओं में सुधार की माँग भी उठाई.
उन्होंने बताया कि केवल प्रशासनिक बदलाव काफ़ी नहीं है, और उसके साथ-साथ व्यापक राजनैतिक सुधार भी ज़रूरी हैं. उन्होंने सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता से अफ़्रीका को अब तक बाहर रखे जाने को अन्याय बताया.
उनके अनुसार, बहुपक्षवाद की सफलता का पैमाना वहाँ पारित होने वाले प्रस्तावों या बैठकों की संख्या नहीं, बल्कि यह होना चाहिए कि सामूहिक कार्रवाई से “ज़मीनी हालात में कितना बदलाव आता है.”
आँकड़ों पर एक नज़र:
महासभा अध्यक्ष के अनुसार, 2026 की जनरल डिबेट में कुल 194 वक्ताओं ने हिस्सा लिया. इनमें 113 राष्ट्राध्यक्ष व सरकार प्रमुख, एक युवराज, 11 उपराष्ट्रपति, सात उप प्रधानमंत्री और 48 मंत्री शामिल थे.
आगे क्या: सम्बोधन समाप्त, काम जारी
सोमवार को जनरल डिबेट का समापन हुआ, लेकिन महासभा का सत्र जारी रहेगा.
अक्टूबर से दिसम्बर तक, 193 सदस्य देशों वाली महासभा, वैश्विक मुद्दों पर चर्चा, प्रमुख पदाधिकारियों के चुनाव और संयुक्त राष्ट्र के बजट पर विचार समेत अपना कामकाज आगे बढ़ाएगी.
विस्तृत चर्चा और प्रस्तावों के मसौदे तैयार करने का काम मुख्य रूप से महासभा की छह प्रमुख समितियों में होगा, जहाँ सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व है. इनमें निरस्त्रीकरण, अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक, वित्तीय, मानवीय और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा होगी.
एक और अहम फ़ैसला भी होना है. सुरक्षा परिषद की सिफ़ारिश पर महासभा अगले संयुक्त राष्ट्र महासचिव की नियुक्ति करेगी, जो 1 जनवरी 2027 को एंतोनियो गुटेरेश का स्थान लेंगे.
महासभा अध्यक्ष ख़लीलुर रहमान ने जनरल डिबेट का समापन करते हुए कहा, “यह तो सत्र की केवल शुरुआत है.”
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