UNGA81: जनरल डिबेट के पाँचवें दिन पर एक नज़र
27 सितम्बर 2026 यूएन मामले
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लेकर प्रवासन तक, दुनिया में बड़े बदलाव ला रहे कई अहम मुद्दे शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में चर्चा के केन्द्र में रहे. नेताओं ने इस बात पर विचार किया कि तकनीकी एवं सामाजिक बदलावों का लाभ कैसे उठाया जाए, ताकि देशों व समुदायों के बीच मौजूदा खाई और न बढ़े. महासभा की वार्षिक उच्चस्तरीय जनरल डिबेट के पाँचवें दिन की प्रमुख झलकियाँ...
AI: अपार सम्भावनाएँ, गम्भीर जोखिम
यह मुद्दा क्यों अहम है: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) दिन की चर्चा का प्रमुख विषय रही. नेताओं ने कहा कि यह टैक्नॉलॉजी अर्थव्यवस्थाओं और लोगों का जीवन बदल सकती है, लेकिन इससे असमानता बढ़ने, भरोसा कमज़ोर होने और सुरक्षा को ख़तरा पैदा होने की आशंका भी है.
- चीन के उपराष्ट्रपति हान ज़ेंग ने मानव कल्याण के लिए AI के विकास और डिजिटल खाई कम करने पर ज़ोर दिया.
- सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने AI को “सबसे तात्कालिक चुनौती” बताते हुए सख़्त नियमों और सुरक्षा उपायों के साथ बुनियादी ढाँचे व कौशल विकास में निवेश की अपील की. उन्होंने कहा, “नियंत्रण और जवाबदेही मनुष्यों के हाथों में ही रहनी चाहिए.”
AI का भविष्य तय करने में किसकी भूमिका?
बड़ी तस्वीर: कई नेताओं ने आगाह किया कि AI से जुड़े फ़ैसले और तकनीकी शक्ति कुछ ही देशों तक सीमित रहने से वैश्विक असमानताएँ और बढ़ सकती हैं.
- जमैका की विदेश मंत्री कमिना जॉनसन स्मिथ ने कहा कि AI को “पुरानी असमानताएँ बढ़ाने और नई वैश्विक खाई पैदा करने” का ज़रिया नहीं बनने देना चाहिए. उन्होंने विकासशील देशों में बुनियादी ढाँचे, कौशल और क्षमता निर्माण में निवेश पर ज़ोर दिया.
- मलेशिया के विदेश मंत्री मोहम्मद हाजी हसन ने कहा, “ऐसा नहीं हो सकता कि AI के डेटा केन्द्र तो वैश्विक दक्षिण में हों, लेकिन उससे जुड़े सभी फ़ैसले दूसरे देशों में लिए जाएँ.”
- बेलीज़ के प्रधानमंत्री जॉन ब्रिसेन्यो ने कहा कि प्रभावी नियमन और निगरानी के तहत संचालित AI, ज्ञान तक पहुँच बढ़ाने और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है. लेकिन प्रभावी नियमन के अभाव में इससे असमानता बढ़ने, रोज़गार छिनने और विकासशील देशों की विदेशी टैक्नॉलॉजी व नियमों पर निर्भरता बढ़ने का ख़तरा है.
नियम बनाने की रफ़्तार पीछे
मौजूदा स्थिति: टैक्नॉलॉजी इतनी तेज़ी से विकसित हो रही है कि कई देशों की सरकारें उसके लिए नियम बनाने में पीछे छूट रही हैं.
- मोल्दोवा के प्रधानमंत्री वासिले टोफ़ान ने चेताया कि “लगभग हर जगह टैक्नॉलॉजी, नियम-क़ानूनों से तेज़ी से आगे बढ़ रही है” और AI इस अन्तर को और बढ़ा रही है.
- जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफ़ुल ने AI की सम्भावनाओं और जोखिमों पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि AI अकाल रोकने और कैंसर का इलाज खोजने में मदद कर सकती है, लेकिन ग़लत हाथों में पड़ने पर अर्थव्यवस्थाओं को अस्थिर और वैश्विक शान्ति व सुरक्षा को ख़तरे में डाल सकती है. उन्होंने कहा, “जब शक्ति वैश्विक हो जाती है, तो ज़िम्मेदारी भी वैश्विक होनी चाहिए.”
प्रवासन से एकजुटता की परीक्षा
टैक्नॉलॉजी से परे: सीमाओं के पार पलायन और विस्थापन ने चर्चा का ध्यान मानवीय चुनौतियों की ओर मोड़ा.
- जिबूती ने अन्तरराष्ट्रीय सहायता की अपील करते हुए कहा कि यमन में हिंसा से भागकर आ रहे हज़ारों लोगों के कारण शरणार्थियों को आश्रय देने की उसकी क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है.
- होली सी ने लाखों राष्ट्रविहीन रोहिंग्या लोगों की पीड़ा समाप्त करने की अपील की. वहीं, ट्यूनीशिया ने अनियमित प्रवासन को केवल सुरक्षा का मुद्दा मानने के बजाय हिंसक टकराव, ग़रीबी और बेरोज़गारी जैसे उसके मूल कारणों से निपटने पर ज़ोर दिया.
- फ़िलिपीन्स ने कहा कि प्रवासी कामगारों को, उनकी क़ानूनी स्थिति चाहे जो भी हो, मानवाधिकारों और मानव तस्करी व शोषण से सुरक्षा का अधिकार है.
युवा आबादी: संकट नहीं, अवसर
आगे की राह: ज़ाम्बिया ने अफ़्रीका की युवा आबादी को महाद्वीप की बड़ी ताक़त बताते हुए इससे जुड़े अवसरों पर ज़ोर दिया.
- विदेश मंत्री मुलाम्बो हमाकुनी हाइम्बे ने कहा कि 2050 तक दुनिया के हर चार युवाओं में से एक अफ़्रीकी होगा. उन्होंने कहा कि शिक्षा, कौशल, टैक्नॉलॉजी, उद्यमिता और सम्मानजनक रोज़गार के अवसर तय करेंगे कि यह बदलाव वैश्विक समृद्धि का आधार बनेगा या नहीं.
आगे क्या होगा: सोमवार को महासभा की जनरल डिबेट का अन्तिम दिन होगा. इसके साथ ही वैश्विक चुनौतियों और उनसे निपटने के उपायों पर केन्द्रित इस वर्ष की उच्चस्तरीय बहस का समापन होगा.
बैठक की विस्तृत कवरेज यहाँ और जनरल डिबेट की विशेष वेबसाइट यहाँ उपलब्ध है.
♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिये यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एण्ड्रॉयड