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सार
UN Report Global Hunger Rate: यूएन की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में लगातार तीसरे साल वैश्विक भूख की दर घटी है। एशिया में इस सुधार में भारत की भूमिका सबसे अहम रही है।

56 दुनिया में भूख की दर में कमी आई, भारत की अहम भूमिका (सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
UN Hunger Rate In World Decreased India Important Role: संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में भूख की समस्या लगातार तीसरे वर्ष कम हुई है और इस उपलब्धि में भारत की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। ‘द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, एशिया में भूख की दर में आए सुधार का प्रमुख कारण भारत में लागू लक्षित कल्याणकारी योजनाएं और कृषि उत्पादकता में हुई वृद्धि हैं। दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की आबादी वाले भारत में हंगर रेट घटकर 10 प्रतिशत से नीचे आ गया है।
रिपोर्ट में अफ्रीका के कई देशों में भी सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए हैं, जबकि डोमिनिकन गणराज्य वैश्विक भूख मानचित्र से बाहर हो गया है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि बच्चों में कुपोषण, महिलाओं में एनीमिया और वयस्कों में बढ़ता मोटापा अब भी गंभीर वैश्विक चुनौतियां हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं और वैश्विक व्यापार में व्यवधान भविष्य में इस प्रगति को प्रभावित कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने सभी देशों से पोषण, खाद्य सुरक्षा और सुलभ आहार सुनिश्चित करने वाली नीतियों को और मजबूत करने का आह्वान किया है।
भारत का हंगर रेट 10% से नीचे
दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की आबादी वाले भारत में भूख की दर घटकर 10 प्रतिशत से नीचे आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लक्षित कल्याणकारी योजनाओं और कृषि उत्पादकता में वृद्धि ने इस सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका के कई देशों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। इथियोपिया, तंजानिया, जिम्बाब्वे, सेनेगल और जाम्बिया में भूख की स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। वहीं, डोमिनिकन गणराज्य अब वैश्विक भूख मानचित्र में शामिल देशों की श्रेणी से बाहर हो गया है।
खाद्य सुरक्षा मजबूत करने की यूएन की अपील
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि गाजा में जारी युद्ध का वैश्विक भूख के आंकड़ों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट दीर्घकालिक और लगातार रहने वाले कुपोषण को मापती है, न कि युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न होने वाली तात्कालिक खाद्य असुरक्षा को।
गाजा में खाद्य आपूर्ति में वृद्धी
टोरेरो ने कहा कि हाल के समय में गाजा में खाद्य आपूर्ति बढ़ी है, जिससे वहां की स्थिति कुछ हद तक स्थिर हुई है। हालांकि, युद्ध में कृषि ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और कृषि उत्पादन को पूरी तरह बहाल करने में कई वर्ष लगेंगे।
कुपोषण और एनीमिया अब भी चुनौती
उन्होंने कहा हमारा उद्देश्य कृषि उत्पादन को फिर से स्थापित करने में मदद करना है, क्योंकि कृषि से जुड़ा बड़ा बुनियादी ढांचा नष्ट हो चुका है।हालांकि भूख की समस्या में कमी आई है, लेकिन रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बच्चों में कुपोषण अब भी गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके अलावा महिलाओं में एनीमिया के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है और वयस्कों में मोटापे की समस्या भी लगातार बढ़ रही है।
जलवायु परिवर्तन से प्रगति पर खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए अब भी पौष्टिक और संतुलित आहार तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र ने सरकारों से ऐसी नीतियां अपनाने का आह्वान किया है जो भोजन की उपलब्धता के साथ-साथ उसके पोषण स्तर और वहनीयता को भी सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही दुनिया को एक चेतावनी भी दी गई है। कहा है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाएं और वैश्विक व्यापार में व्यवधान इस प्रगति को प्रभावित कर सकते हैं।
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यूएन की एजेंसियों ने जारी किया रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र की पांच एजेंसियों ने संयुक्त रूप से रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट ‘द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड’ के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया की लगभग 64.5 करोड़ (645 मिलियन) आबादी, यानी 7.8 प्रतिशत लोग भूख से प्रभावित रहे। यह आंकड़ा 2024 में 8.1 प्रतिशत और 2022 में 8.6 प्रतिशत था।
