Published: Sunday, August 9, 2026, 12:43 [IST]
India gifts peacocks to UN: भारत ने 45 साल बाद स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को एक बार फिर अपने राष्ट्रीय पक्षी मोर का तोहफा दिया है। इस बार भारत की ओर से पांच नर मोर भेंट किए गए हैं, जिनमें चार नीले और एक सफेद मोर शामिल है।
शुक्रवार को एक खास कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अरिंदम बागची ने इन मोरों को UNOG की महानिदेशक तातियाना वालोवाया को सौंपा। यह सिर्फ एक उपहार नहीं, बल्कि भारत और संयुक्त राष्ट्र के पुराने रिश्ते की याद भी है। इन मोरों का जिनेवा परिसर से दशकों पुराना रिश्ता रहा है।
45 साल बाद फिर पहुंचा भारत का मोर
भारत ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को 45 साल बाद फिर पांच मोर भेंट किए हैं। इनमें चार नीले और एक सफेद मोर है और सभी नर हैं। शुक्रवार को आयोजित विशेष कार्यक्रम में राजदूत अरिंदम बागची ने इन्हें UNOG की महानिदेशक तातियाना वालोवाया को सौंपा। भारत के मुताबिक, यह उपहार दोनों के लंबे रिश्तों और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाता है। साथ ही, भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर सुंदरता, गरिमा और मजबूती का प्रतीक भी माना जाता है।
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1951 में भी चर्चा में आया था मोर
जिनेवा के संयुक्त राष्ट्र परिसर में मोरों की कहानी कोई नई नहीं है। साल 1951 में एक स्विस अखबार ने वहां मौजूद आखिरी मोर को लेकर खबर प्रकाशित की थी। उसका नाम पियरे था। उस समय सवाल उठाया गया था कि क्या इस अकेले मोर को कोई साथी मिलेगा या उसकी जगह दूसरा मोर आएगा। इसके बाद भी परिसर में समय-समय पर मोर नजर आते रहे। 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली चिड़ियाघर से मोरों की एक प्रजनन जोड़ी संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को उपहार में भेजी थी।
सोवियत प्रतिनिधिमंडल की कार पर चढ़ गया था मोर
संयुक्त राष्ट्र जिनेवा परिसर में मोरों का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। जिस जगह आज UNOG का कार्यालय है, वह कभी स्विट्जरलैंड के कला संग्राहक गुस्ताव रेविलियोड की निजी संपत्ति थी। यहां 100 साल से ज्यादा समय से मोर मौजूद रहे हैं। साल 1954 में एक मोर सोवियत प्रतिनिधिमंडल की कार पर चढ़ गया था। इस अनोखी घटना ने वहां मौजूद फोटोग्राफरों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। मोर की तस्वीरें उस समय काफी चर्चा में रही थीं।
तीन महीने अस्थायी घर में रहेंगे पांचों मोर
नए पांचों मोरों के लिए संयुक्त राष्ट्र परिसर में फिलहाल एक अस्थायी घर तैयार किया गया है। UNOG की महानिदेशक तातियाना वालोवाया के मुताबिक, सभी मोर करीब तीन महीने तक इसी जगह रहेंगे। इसके बाद उन्हें एरियाना पार्क में खुले तौर पर घूमने दिया जाएगा। शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में पांचों मोर काफी शांत नजर आए और वहां मौजूद लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। इनकी देखभाल की जिम्मेदारी प्रशिक्षित पशु चिकित्सक और जिनेवा बायोपार्क के निदेशक डॉ. टोबियास ब्लाहा संभालेंगे।
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जल्द होगा पांचों मोरों का नामकरण
भारत की ओर से दिए गए इन पांचों मोरों को सिर्फ एक सांस्कृतिक उपहार के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। भारत का कहना है कि राष्ट्रीय पक्षी मोर जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है। UNOG इन पांचों मोरों के नाम रखने के लिए जल्द ही एक प्रतियोगिता आयोजित करेगा। यानी आने वाले दिनों में जिनेवा के लोगों को इन नए मेहमानों के नाम चुनने का मौका मिलेगा। फिलहाल पांचों मोर अपने नए घर में पहुंच चुके हैं और जल्द ही पार्क में खुले में नजर आएंगे।