दो एग्जाम, जमकर घमासान... UGC-NET परीक्षा रद्द, बॉम्बे हाईकोर्ट एग्जाम में गड़बड़ी, दिपके की भी एंट्री

Published on 16 अग॰ 2026

देशभर में प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित कराने वाली एजेंसी NTA सवालों और विवादों के घेरे से निकल नहीं पा रही है. नीट पेपर लीक के मामले में विवादित रही ये एजेंसी फिरअपनी किरकिरी करा रही है. इसमें एक मामला UGC-NET जून 2026 का है, जिसमें तीन विषयों के प्रश्नपत्रों में गंभीर गलतियां सामने आने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया है. 

वहीं महाराष्ट्र में बॉम्बे हाई कोर्ट की क्लर्क भर्ती के लिए हुई टाइपिंग परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी और सर्वर फेल होने का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए हैं. दोनों मामलों में उम्मीदवारों का सवाल एक ही है कि परीक्षा एजेंसियों की खामियों की कीमत आखिर अभ्यर्थी क्यों चुकाएं?

NTA ने अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र की UGC-NET परीक्षा दोबारा कराने का ऐलान किया है. अंग्रेजी और कॉमर्स की परीक्षा 9 सितंबर, जबकि समाजशास्त्र की परीक्षा 10 सितंबर को होगी. अभ्यर्थियों से री-एग्जाम के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा. NTA की एक्सपर्ट कमेटी ने जांच में प्रश्नपत्रों में तथ्य, टाइपिंग, ट्रांसलेशन और व्याकरण से जुड़ी कई गलतियां पाईं. कमेटी ने माना कि केवल चैलेंज प्रक्रिया से इन खामियों को ठीक करना संभव नहीं है. हालांकि बाकी 84 विषयों के नतीजे तय कार्यक्रम के मुताबिक जारी होंगे.

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NTA

बॉम्बे हाई कोर्ट क्लर्क भर्ती की परीक्षा में भी खामियां

दूसरी तरफ, छत्रपति संभाजीनगर में बॉम्बे हाई कोर्ट क्लर्क भर्ती की टाइपिंग परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन कर दोबारा परीक्षा की मांग की. उम्मीदवारों ने कंप्यूटर, माउस, कीबोर्ड और सर्वर में खराबी के आरोप लगाए. कुछ ने दावा किया कि परीक्षा शुरू होने के करीब 10 मिनट के भीतर वे सिस्टम से लॉगआउट हो गए.

हाई कोर्ट प्रशासन ने औरंगाबाद और कल्याण के कुछ केंद्रों पर तकनीकी समस्याओं की जानकारी मिलने की बात स्वीकार करते हुए कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई से अभ्यर्थियों को आधिकारिक रूप से अवगत कराया जाएगा.

NTA ने फैसला किया है कि UGC-NET के री-एग्जाम के लिए अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा. NTA ने 22 से 30 जून 2026 के बीच 87 विषयों के लिए परीक्षा आयोजित की थी. परीक्षा के बाद अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के पेपरों में खामियों को लेकर कई शिकायतें मिली थीं.

इसके बाद मामले की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी. जांच में सामने आया कि इन तीन विषयों के प्रश्नपत्रों में तथ्य, टाइपिंग, ट्रांसलेशन और व्याकरण से जुड़ी कई गंभीर गलतियां थीं. प्रसिद्ध विद्वानों के नाम गलत लिखे गए थे, किताबों के टॉपिक स्पष्ट नहीं थे और कई पुराने सवाल भी दोहराए गए थे. 

ये रहेगा परीक्षाओं का नया शेड्यूल

परीक्षा शहर, सेंटर और एडमिट कार्ड से जुड़ी जानकारी जल्द ही NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर साझा की जाएगी. समिति ने माना कि महज चैलेंज प्रोसेस के जरिए इन गलतियों को सुधारा नहीं जा सकता, इसलिए दोबारा परीक्षा कराना ही निष्पक्ष होगा. NTA के नोटिफिकेशन के मुताबिक, तीनों विषयों की परीक्षा की नई तारीखें सामने आ गई हैं.

अंग्रेजी: 9 सितंबर 2026 (पहली पाली: सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक)
कॉमर्स: 9 सितंबर 2026 (दूसरी पाली: दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक)
समाजशास्त्र: 10 सितंबर 2026 (पहली पाली: सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक)
बाकी 84 विषयों के नतीजों पर असर नहीं

NTA ने बताया कि बाकी 84 विषयों के नतीजे तय शेड्यूल के मुताबिक ही घोषित किए जाएंगे. री-एग्जाम के कारण JRF आवंटन, असिस्टेंट प्रोफेसर एलिजिलिबिटी और पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में कोई देरी नहीं होगी.

इसके अलावा, असिस्टेंट प्रोफेसर की एलिजिबिलिटी के लिए अभ्यर्थियों की संख्या जून में हुई मूल परीक्षा या री-टेस्ट में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों का 6 प्रतिशत (जो भी अधिक हो) रखी जाएगी. किसी भी स्थिति में पहले से आवंटित सीटों की संख्या घटाई नहीं जाएगी.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने की आलोचना

पवन खेड़ा ने UGC-NET के रीएक्जाम को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'बदनाम NTA एक ​​बार फिर जांच के दायरे में है. उम्मीद करते हैं कि राम मंदिर से जुड़े चंदा चोरी कांड की तरह, इस बार भी छोटे लेवल के लोगों को राजनीतिक जवाबदेही से बचाने के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा.'

शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने NTA और परीक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे सरकार की बड़ी नाकामी बताया. प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा, 'एक बार फिर वही स्थिति. न कोई नया कानून, न सजा बढ़ाने का प्रावधान और न ही Gen-Z के विरोध प्रदर्शन NTA और नौकरशाही को ज्यादा जवाबदेह बना सके हैं. यह इस सरकार की सबसे बड़ी विफलता है.'
 

यह भी पढ़िएः NTA की फिर किरकिरी! गलती के बाद रद्द करनी पड़ी UGC-NET के तीन विषयों की परीक्षा

छत्रपति संभाजीनगर में छात्रों का प्रदर्शन

महाराष्ट्र में बॉम्बे हाई कोर्ट की क्लर्क भर्ती के लिए आयोजित टाइपिंग परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ियों और सर्वर की समस्या का आरोप लगाते हुए कई अभ्यर्थियों ने रविवार को छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन किया. CJP के संयोजक अभिजीत दिपके भी प्रदर्शन में शामिल हुए. अभ्यर्थियों ने दावा किया कि कंप्यूटर, कीबोर्ड और सर्वर में खराबी के कारण वे परीक्षा ठीक से नहीं दे सके और बिना उनकी गलती के उन्हें फेल घोषित कर दिया गया. प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा दोबारा कराने की मांग की है.

NTA

हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (कार्मिक) की ओर से जारी सूचना में कहा गया कि एजेंसी के माध्यम से क्लर्क पद के लिए टाइपिंग परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की गई. इसमें यह भी स्वीकार किया गया कि कुछ परीक्षा केंद्रों, विशेष रूप से औरंगाबाद और कल्याण में कुछ तकनीकी समस्याओं की जानकारी मिली है.

हाई कोर्ट प्रशासन ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान एजेंसी की ओर से हुई संभावित तकनीकी समस्याओं की जांच की जा रही है. आगे क्या उचित कार्रवाई की जाएगी, इसकी जानकारी अभ्यर्थियों को आधिकारिक रूप से दी जाएगी.

स्क्रीन पीली होने और कीबोर्ड बंद होने की शिकायत

अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा के दौरान कुछ कंप्यूटर ठीक से काम नहीं कर रहे थे. कुछ उम्मीदवारों ने स्क्रीन पीली पड़ने की शिकायत की, जबकि कुछ ने कहा कि उनके कीबोर्ड और माउस ने काम करना बंद कर दिया.

कथित गड़बड़ी सुबह 10 बजे से 11:15 बजे के बीच आयोजित सेशन में सामने आई. छत्रपति संभाजीनगर के विभिन्न केंद्रों पर मराठवाड़ा और विदर्भ के करीब 2,900 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी. वहीं, महाराष्ट्र में करीब 13,000 अभ्यर्थी तीन सेशन में आयोजित परीक्षा के लिए पात्र थे. यह भर्ती हाई कोर्ट की नागपुर और औरंगाबाद बेंच के तहत क्लर्क के करीब 1,300 पदों के लिए हो रही है.

अभिजीत दिपके की एंट्री

अभिजीत दिपके को गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद वह छत्रपति संभाजीनगर के सुरानानगर इलाके स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचे और अभ्यर्थियों से मुलाकात की.उन्होंने कहा कि बीड, अंबाजोगाई, अमरावती, लातूर समेत महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों से अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंचे थे. 

'ऑनलाइन पेपर कराना बस का नहीं तो एग्जाम क्यों लेते हैं?' 

अभिजीत दिपके ने X पर पोस्ट में लिखा कि 'महाराष्ट्र में हाई कोर्ट की ऑनलाइन परीक्षा में पूरी तरह अव्यवस्था फैल गई है. सर्वर की समस्या के कारण कई अभ्यर्थियों को फेल घोषित कर दिया गया. राज्य के ज्यादातर परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर तक ठीक से काम नहीं कर रहे थे. मैं अभ्यर्थियों के प्रदर्शन में शामिल हो गया हूं और जब तक दोबारा परीक्षा कराने की उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक उनके साथ यहीं रहूंगा.'

Online examination for the High Court in Maharashtra has created complete chaos!

Several students have been marked as failed due to server issues. At majority of the centres across the state the computers were not even functional.

I have joined the students and will stay here… pic.twitter.com/fjxe7OcsKt

— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) August 16, 2026

'10 मिनट में अभ्यर्थी हो गए लॉगआउट'

दिपके ने दावा किया, 'जब अभ्यर्थी परीक्षा देने बैठे तो कुछ कंप्यूटर ठीक से काम नहीं कर रहे थे. कहीं माउस और कीबोर्ड नहीं चल रहे थे तो कहीं स्क्रीन काम नहीं कर रही थी. 10 मिनट के भीतर अभ्यर्थी लॉगआउट हो गए.'

उन्होंने इसे अभ्यर्थियों की नहीं बल्कि सिस्टम की नाकामी बताया. दिपके ने आरोप लगाया कि शिकायत करने पर अधिकारियों ने उम्मीदवारों से कहा कि उन्हें परीक्षा देना नहीं आता.

उन्होंने सवाल किया, 'अगर अधिकारी इतने ही सक्षम हैं तो पहले से अच्छे कंप्यूटर और काम करने वाले कीबोर्ड क्यों नहीं लगाए गए? सर्वर ठीक से काम कर रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित क्यों नहीं किया गया?'

दिपके ने कहा कि कई उम्मीदवार छह-सात महीने से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और लंबी दूरी तय करके केंद्र पहुंचे थे. उन्होंने सवाल किया कि तकनीकी खराबी की वजह से असफल हुए अभ्यर्थी अब अपने परिवार को क्या जवाब देंगे.

लिखित में दोबारा परीक्षा की घोषणा की मांग

CJP संस्थापक ने मांग की कि प्रशासन तत्काल लिखित नोटिफिकेशन जारी कर प्रभावित अभ्यर्थियों की परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा करे. साथ ही दोबारा परीक्षा उन्हीं कंप्यूटरों पर नहीं कराई जाए.

दिपके ने कहा कि जब तक अभ्यर्थियों की मांग पूरी नहीं होती, वह उनके प्रदर्शन का समर्थन करेंगे. उन्होंने ऑनलाइन परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर प्रशासन काम करने वाले कंप्यूटर और सर्वर सुनिश्चित नहीं कर सकता तो ऐसी ऑनलाइन परीक्षाएं आयोजित कर अभ्यर्थियों का भविष्य खतरे में नहीं डालना चाहिए.

फिलहाल हाई कोर्ट प्रशासन ने तकनीकी समस्याओं की जांच की बात कही है और अभ्यर्थियों को आगे की कार्रवाई की आधिकारिक सूचना देने का आश्वासन दिया है.

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