Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा डेथ केस में PM रिपोर्ट पर विवाद, वकील का सवाल- चोटों की वजह में अंतर को CBI ने स्पष्ट क्यों नहीं किया?

Published on 7 सित॰ 2026

Twisha Sharma Death Case: भोपाल (Bhopal News) के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस (Twisha Sharma Death Case Update) में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर नया विवाद सामने आया है। 

दो अलग-अलग पोस्टमार्टम रिपोर्टों में ट्विशा शर्मा (Bhopal Twisha Sharma Death Case) के शरीर पर मिली चोटों की वजह में अंतर बताया गया है। सीबीआई की चार्जशीट दाखिल होने के बाद वकील अंकुर पांडेय ने दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्टों में बताए गए अंतर पर सवाल उठाए हैं। अब यह अदालत में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद स्पष्ट होगा।

वकील अंकुर पांडेय का सवाल है कि (Twisha Sharma Pm Report Controversy) जब दो मेडिकल रिपोर्टों में चोटों की वजह को लेकर अलग-अलग निष्कर्ष सामने आए थे, तो अंतिम निष्कर्ष में एक रिपोर्ट को आधार बनाने से पहले इस विरोधाभास को स्पष्ट क्यों नहीं किया गया।

भोपाल की रिपोर्ट में एंटी मॉर्टम इंजरी बताया

जानकारी के मुताबिक, (Bhopal Twisha Sharma Death Case Update) भोपाल एम्स की शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाएं हाथ और कलाई पर नीले निशान का भी उल्लेख किया गया था। इन निशानों को करीब एक से तीन दिन पुराना बताया गया था। शरीर पर मिली चोटों को मौत से पहले की चोट यानी एंटी-मॉर्टम इंजरी बताया गया था। रिपोर्ट में संघर्ष की आशंका को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया गया था।

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सीबीआई ने दिल्ली की रिपोर्ट को आधार बनाया

इसके बाद दिल्ली एम्स की रिपोर्ट में इन्हीं चोटों की वजह को शव के परिवहन के दौरान हुई क्षति से जोड़ा गया। की अलग व्याख्या सामने आई। इसमें चोटों को शव के परिवहन के दौरान लगने की संभावना से (Bhopal Crime News) जोड़ा गया। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में दिल्ली एम्स की रिपोर्ट को अपने निष्कर्ष का आधार बनाया है।

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मौत के कारण पर दोनों रिपोर्टों में समानता

पोस्टमार्टम रिपोर्टों में मौत के कारण को लेकर (Twisha Sharma Death Case Update) मुख्य तौर पर समानता बताई गई है। फांसी पर लटकाए जाने के कारण दम घुटने को मौत की वजह माना गया और मामले को आत्महत्या से जोड़ा गया।

हालांकि, शरीर पर मिली चोटों की प्रकृति और उनके लगने के समय को लेकर दोनों रिपोर्टों में अंतर सामने आया है। शुरुआती रिपोर्ट में चोटों को मौत से पहले की बताया गया था।

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