कोर्ट बोला- TI-ASI ने बेईमानी की हदें पार कीं: डकैती में 12 की जगह 4 आरोपी बनाए, क्लोजर रिपोर्ट दबाई; एक्शन नहीं लिया तो कराएंगे FIR - Dhamnod News

Published on 9 अक्टू॰ 2026

मध्यप्रदेश के धार जिले के धरमपुरी में 2017 की डकैती के मामले में पुलिस की जांच पर कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विवेक जैन ने पुलिस की खात्मा रिपोर्ट खारिज कर दी।

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कोर्ट ने तत्कालीन थाना प्रभारी कुशलसिंह रावत और विवेचक एएसआई प्रकाश सरोदे की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि दोनों ने अकर्मण्यता, बेईमानी और जालसाजी की हदें पार कर दीं।

कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले की दोबारा जांच कर 30 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश की जाए। मामले में कोर्ट का आदेश 22 सितंबर का है। इसकी कॉपी 8 अक्टूबर को सामने आई।

घर में घुसकर पति-पत्नी से मारपीट, जेवर और नकदी लूटी

घटना 16 दिसंबर 2017 की देर रात ग्राम टवलाई की है। फरियादी शंकरलाल जायसवाल के घर में 10 से 12 बदमाश घुस आए थे। उन्होंने पति-पत्नी के साथ मारपीट की और अलमारी व गल्ले तोड़कर सोने-चांदी के जेवर, नकदी और मोबाइल लूट लिए थे। फरियादी ने उसी रात डायल-100 पर सूचना दी थी, लेकिन पुलिस ने अगले दिन दोपहर में जाकर रिपोर्ट दर्ज की।

तत्कालीन थाना प्रभारी कुशलसिंह रावत।

तत्कालीन थाना प्रभारी कुशलसिंह रावत।

पुलिस ने मुख्य गवाह का बयान नहीं लिया अदालत के सामने सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। पुलिस ने डकैती के मामले में केवल चार लोगों के खिलाफ मामूली धाराओं में केस दर्ज किया। मेडिकल रिपोर्ट में कई चोटों का जिक्र होने के बावजूद मारपीट की धारा नहीं लगाई गई। विवेचक एएसआई प्रकाश सरोदे ने पीड़ित की पत्नी, जो मामले की मुख्य गवाह थीं, उनका बयान तक दर्ज नहीं किया। केस डायरी में फरियादी के बयानों में काट-छांट किए जाने की बात भी सामने आई।

विवेचक एएसआई प्रकाश सरोदे।

विवेचक एएसआई प्रकाश सरोदे।

मोहर्रिर ने कहा- FIR मैंने नहीं लिखी, हस्ताक्षर भी मेरे नहीं

अदालत में तत्कालीन मोहर्रिर राकेश कुमार शुक्ला ने बयान दिया कि FIR उन्होंने न तो लिखी थी और न ही उस पर उनके हस्ताक्षर थे। उनके मुताबिक, तत्कालीन थाना प्रभारी कुशलसिंह रावत के कहने पर कंप्यूटर ऑपरेटर ने रिपोर्ट तैयार की थी। पुलिस ने घटना के करीब तीन महीने बाद खात्मा रिपोर्ट तैयार कर ली थी, लेकिन उसे सात साल तक थाने में लंबित रखा। यह रिपोर्ट 26 अप्रैल 2025 को अदालत में पेश की गई।

कोर्ट ने नए सिरे से जांच करने के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने नए सिरे से जांच करने के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने कहा- कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट खुद कराएगा FIR

अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मामले सिस्टम पर लोगों के भरोसे को कमजोर करते हैं। कोर्ट ने खात्मा रिपोर्ट खारिज करते हुए वर्तमान थाना प्रभारी को 15 दिन के भीतर नए विवेचक की नियुक्ति करने और 30 दिन के भीतर नए सिरे से जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस विभाग दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं करता है, तो न्यायालय उनके खिलाफ FIR या परिवाद दर्ज कराने की कार्रवाई करेगा।