एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन के रूप में नौ साल पूरे किए, जिसमें उन्होंने समूह का व्यापक विस्तार किया और नए क्षेत्रों में प्रवेश किया। ...और पढ़ें

इंटर्न से टाटा संस के चेयरमैन पद तक कैसे पहुंचे चंद्रशेखरन।
HighLights
चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन के रूप में नौ साल पूरे किए।
उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कई नए क्षेत्रों में विस्तार किया।
एअर इंडिया अधिग्रहण और डिजिटल कॉमर्स में महत्वपूर्ण निवेश हुए।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन का नौ वर्ष का कार्यकाल भारत के इस सबसे प्रभावशाली कारोबारी समूह में से एक के दायरे और विस्तार को बदलने वाला रहा है।
चंद्रशेखरन 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में इंटर्न के तौर पर टाटा समूह से जुड़े थे। तरक्की करते हुए वह 2009 में इस आईटी कंपनी के चीफ एक्जीक्यूटिव बने थे। 2017 में वह टाटा संस के चेयरमैन नियुक्त किए गए थे। उन्होंने साइरस मिस्त्री के हटने के बाद रतन टाटा के अंतरिम कार्यकाल के बाद यह पद संभाला था।
टाटा संस के पहले गैर-पारसी चेयरमैन
टाटा समूह के साथ 40 वर्ष बिताने वाले 63 वर्षीय चंद्रशेखरन टाटा संस के पहले गैर-पारसी चेयरमैन हैं। उनके नेतृत्व में समूह ने एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, बैटरी और डिजिटल कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया। साथ ही अपने पारंपरिक टेक्नोलॉजी, ऑटोमोटिव और स्टील व्यवसायों को भी मजबूत किया।
टाटा ने 2022 में सरकार से एअर इंडिया का अधिग्रहण किया और बाद में एअर इंडिया, विस्तारा, एअर इंडिया एक्सप्रेस और एआइएक्स कनेक्ट को मिलाकर एक बड़ी एयरलाइन कंपनी बनाई। टाटा डिजिटल ने 2021 में बिग बास्केट और 1एमजी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी, जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, समूह के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने का जरिया बनीं।
समूह ने बैटरी और मोबाइल-डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग सहित कई बड़े मैन्युफैक्चरिंग निवेश एवं रणनीतिक साझेदारियां भी कीं। इस विस्तार का असर समूह की वित्तीय स्थिति पर भी दिखा।
टाटा की कंपनियों ने 2024-25 में कुल 180 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का राजस्व दर्ज किया, 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दिया और 31 मार्च, 2025 तक समूह की 26 सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 328 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक था।
चंद्रशेखरन ने पोर्टफोलियो कंसोलिडेशन पर दिया जोर
चंद्रशेखरन ने पोर्टफोलियो कंसोलिडेशन पर भी जोर दिया। टाटा काफी का टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में विलय कर दिया गया, जबकि टिनप्लेट कंपनी ऑफ इंडिया, टाटा मेटालिक्स और टाटा स्टील लांग प्रोडक्ट्स को टाटा स्टील में मिला दिया गया। टाटा टेक्नोलॉजीज व टाटा कैपिटल की लिस्टिंग ने समूह की लिस्टेड कंपनियों के दायरे को और बढ़ाया।
समूह के इस विस्तार में कई बड़ी चुनौतियां भी थीं। सेवाओं के मानक, कामकाज में रुकावटों और पायलट से जुड़ी घटनाओं की वजह से एअर इंडिया लगातार जांच के घेरे में रही है।
इसके अलावा समूह के टेक्नोलॉजी बिजनेस को भी एआई की ओर दुनिया के बढ़ते झुकाव के कारण दबाव का सामना करना पड़ा है। जगुआर लैंड रोवर को बिक्री में भारी गिरावट और एक बड़े साइबर हमले का सामना करना पड़ा है।
कर्मचारियों को संबोधन
चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने की घोषणा के बाद कहा कि पिछले दशक में टाटा संस का नेतृत्व करना बहुत सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी की बात रही। साथ ही उन्होंने समूह के कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स का आभार व्यक्त किया।
दोपहर में बॉम्बे हाउस में एक टाउन हाल मीटिंग को संबोधित करते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कर्मचारियों से मिले प्यार और स्नेह से वह बहुत प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा, "टाटा एक सम्मानित नाम है और यह आप जैसे कर्मचारियों की कोशिशों की वजह से है।"
चंद्रशेखरन ने कर्मचारियों से कहा, "(नेतृत्व में बदलाव के बारे में) आप जो भी अफवाहें, थ्योरी या साजिश की बातें सुनें, उन पर अधिक ध्यान न दें।" उन्होंने कहा कि टाटा समूह तरक्की करता रहेगा और कर्मचारियों को संगठन के अंदर आगे बढ़ने के मौके मिलते रहेंगे।