पंजाब और हरियाणा सरकारें सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। ...और पढ़ें
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पंजाब-हरियाणा SYL नहर विवाद समाधान की ओर अग्रसर
HighLights
पंजाब-हरियाणा SYL नहर विवाद समाधान की ओर अग्रसर
सुप्रीम कोर्ट को अटार्नी जनरल ने दी प्रगति की जानकारी
कोर्ट ने दोनों राज्यों के प्रयासों की सराहना की
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पंजाब और हरियाणा सरकारें सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के दशकों पुराने विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। यह जानकारी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को दी गई।
अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दोनों राज्य अब एक आम सहमति की ओर काम कर रहे हैं, जिसमें पंजाब विवाद को सुलझाने की रुचि दिखा रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने प्रगति को देखते हुए टिप्पणी की- "जब दिल खुलता है तो दरवाजा भी खुलता है।'
पंजाब-हरियाणा SYL नहर विवाद समाधान की ओर अग्रसर
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और वी. मोहन की पीठ पंजाब और हरियाणा के बीच लंबे समय से चल रहे एसवाईएल नहर जल बंटवारे के विवाद की सुनवाई कर रही थी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी इस मामले में प्रगति की बात की।
अटार्नी जनरल ने थोड़ी मोहलत मांगी और सुनवाई को 20 अगस्त या अगले सप्ताह की किसी तारीख का सुझाव दिया। सीजेआइ ने इस बात पर सहमति जताई कि समझौते की दिशा में हो रही प्रगति को देखते हुए थोड़ी मोहलत लेने से कार्यवाही पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की थी कि उसने नहर के लिए अधिग्रहित भूमि को डीनोटिफाई कर दिया। कोर्ट ने इसे 'अत्याचार' करार देते हुए दोनों राज्यों से केंद्र के साथ मिलकर सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने का आग्रह किया था।
कोर्ट ने दोनों राज्यों के प्रयासों की सराहना की
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के खिलाफ हरियाणा के 1996 के उस मूल मुकदमे पर सुनवाई शुरू की है, जिसमें एसवाईएल नहर को पूरा करने की मांग की गई है ताकि राज्य को रावी-ब्यास नदियों के पानी में अपना हिस्सा मिल सके।
यह समस्या 1966 में पंजाब से अलग होकर हरियाणा के बनने के बाद हुए पानी के बंटवारे के 1981 के समझौते से शुरू हुई। पानी के सही बंटवारे के लिए एसवाईएल नहर बनाई जानी थी और दोनों राज्यों को अपने-अपने इलाके में नहर का अपना हिस्सा बनाना था। हरियाणा ने तो नहर का अपना हिस्सा बना लिया लेकिन शुरुआती चरण के बाद पंजाब ने काम रोक दिया।
2004 में पंजाब सरकार ने एक कानून पारित किया जिसने "एकतरफा" तरीके से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच 1981 के जल बंटवारे समझौते को रद कर दिया। हालांकि, 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को रद कर दिया था।
बाद में पंजाब ने अधिग्रहित भूमि जिस पर नहर का निर्माण होना था, उसे भूमि मालिकों को वापस कर दिया। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब को नहर परियोजना से संबंधित भूमि और संपत्तियों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)