Updated: Wednesday, September 2, 2026, 13:32 [IST]
Disha Salian: बॉलीवुड के दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की एक्स मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज यानी 2 सितंबर 2026 (बुधवार) को दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को जांच का आदेश दिया है। अदालत ने सीबीआई को मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।
दिशा सालियान की मौत के मामले में CBI जांच का आदेश
जानकारी के अनुसार दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई थी। दिशा बॉलीवुड के दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की एक्स मैनेजर थीं। उनकी मौत सुशांत सिंह राजपूत की मौत से कुछ दिन पहले ही हुई थी, जिसके बाद दोनों मामलों को लेकर लंबे समय से सवाल और विवाद उठते रहे हैं।
दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका पर हुई थी सुनवाई
दरअसल बॉम्बे हाईकोर्ट का ये आदेश दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की याचिका पर आया है। उन्होंने मुंबई पुलिस की जांच में कथित खामियों का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने और नए सिरे से जांच की मांग की थी।
आपको बता दें कि सतीश सालियान ने अपनी याचिका में बेटी के साथ रेप के बाद हत्या किए जाने का आरोप लगाया है। वहीं सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की जांच और दिशा सालियान की मौत से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल किए थे। खास तौर पर इन्क्वेस्ट पंचनामा और अस्पताल में शव की स्थिति को लेकर कोर्ट ने सरकारी वकील से स्पष्टीकरण मांगा था।
दिशा सालियान की बॉडी पर कपड़े क्यों नहीं थे?
सुनवाई के दौरान दिशा सालियान के इन्क्वेस्ट पंचनामे में शव पर कपड़े नहीं होने का उल्लेख सामने आया था। इस पर अदालत ने सरकारी वकील से सवाल किया था कि अगर अस्पताल के पंचनामे में शव पर कपड़े नहीं होने की बात दर्ज है, तो आखिर कपड़े किसने उतारे थे? कोर्ट ने ये भी पूछा कि इस संबंध में डॉक्टर का बयान क्यों दर्ज नहीं किया गया?
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि कपड़े नहीं होने का पंचनामा अस्पताल का है, घटनास्थल का नहीं। उन्होंने दिशा की मौत के बाद अस्पताल में ली गई तस्वीर भी अदालत के सामने पेश की। इसके अलावा एक ऐसी तस्वीर भी दिखाई गई जिसमें शव पर कपड़े नजर आ रहे थे। तस्वीरों को लेकर भी जजों ने सरकारी पक्ष से सवाल किए।
14वीं मंजिल से गिरने पर चोटों को लेकर कोर्ट ने जताई जिज्ञासा
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि अगर दिशा 14वीं मंजिल से नीचे गिरी थीं तो उनके शरीर पर चोटों की स्थिति कैसी थी। कोर्ट ने पूछा कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद क्या केवल दांत टूटने और मुंह से खून आने जैसी चोटें हो सकती हैं? अदालत ने ये भी कहा कि तस्वीरों में चेहरे पर बहुत ज्यादा चोटें दिखाई नहीं दे रही हैं और शरीर पर किसी बड़ी चोट का भी स्पष्ट उल्लेख नहीं दिखता।
इसके जवाब में सरकारी वकील ने कहा कि दिशा गिरते समय मुंह के बल नीचे गिरी थीं। उनके मुताबिक इस वजह से स्कल फ्रैक्चर और जबड़े में गंभीर चोट आई थी। सरकारी पक्ष ने यह भी कहा कि शरीर पर अन्य चोटें भी थीं।
कोई मेन बोन फ्रैक्चर कैसे नहीं हुआ?
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर मामले को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाल रही है बल्कि ये देखना चाहती है कि घटनाक्रम में संदेह की कोई ठोस वजह बनती है या नहीं। कोर्ट ने सवाल किया कि अगर दिशा मुंह के बल गिरी थीं और गिरने की ऊंचाई इतनी अधिक थी, तो शरीर की किसी मुख्य हड्डी में फ्रैक्चर क्यों नहीं हुआ? सरकारी वकील ने जवाब में कहा कि मेडिकल रिकॉर्ड में दांत के फ्रैक्चर का जिक्र है और ऊंचाई से गिरने के बाद हर व्यक्ति के शरीर पर चोटों का पैटर्न एक जैसा नहीं होता।
दिशा के पिता के पुराने बयान का भी हुआ जिक्र
सुनवाई के दौरान दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की ओर से 15 जनवरी 2024 को दिए गए बयान को भी अदालत के सामने पढ़ा गया। इस बयान में उन्होंने कहा था कि उनकी बेटी की एक डील रद्द हो गई थी और उससे हुए आर्थिक नुकसान के कारण उन्हें लगता है कि उसने आत्महत्या की होगी। सरकारी पक्ष ने बताया कि सतीश सालियान के बयान अब तक पांच बार दर्ज किए जा चुके हैं। सरकारी वकील के मुताबिक इन बयानों में उन्होंने उस समय किसी अन्य तरह के अपराध या संदेह की बात नहीं कही थी।
सरकारी वकील ने अदालत में दलील दी कि उपलब्ध जांच और बयानों के आधार पर इस मामले में कोई संज्ञेय अपराध सामने नहीं आता है। उन्होंने कहा कि मेडिकल जांच में भी यौन हमले की पुष्टि नहीं हुई है।सरकारी पक्ष के मुताबिक डॉक्टरों की जांच में सेक्सुअल असॉल्ट से जुड़ी कोई बात सामने नहीं आई। वकील ने कहा कि मामले को लेकर लंबे समय तक अलग-अलग तरह के आरोप और प्रत्यारोप लगाए जाते रहे, जिसके कारण जांच भी आगे बढ़ती रही।
रोहित रॉय के बयान को भी बताया अहम
सरकारी वकील ने सुनवाई के दौरान बताया कि दिशा सालियान, रोहित रॉय के साथ रहती थीं और इसलिए उनका बयान जांच में जरूरी है। सरकारी पक्ष के अनुसार रोहित रॉय ने अपने बयान में दिशा के डिप्रेशन में होने की बात कही थी और इसी स्थिति को उनकी मौत से जोड़कर देखा गया। सरकारी वकील ने ये भी कहा कि रोहित रॉय के बयान में दिशा के पिता के चरित्र को लेकर कुछ बातें कही गई थीं और ये भी बताया गया कि इससे दिशा मानसिक रूप से परेशान थीं। हालांकि ये बातें सरकारी पक्ष द्वारा अदालत के सामने रखी गई दलीलों का हिस्सा हैं।
याचिका में आदित्य ठाकरे के खिलाफ भी केस की मांग
सुनवाई के दौरान आदित्य ठाकरे का नाम भी सामने आया। दिशा के पिता की ओर से दायर याचिका में आदित्य ठाकरे के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान लोगों से सामने आने की अपील भी की गई थी।
इसके लिए अखबारों में विज्ञापन तक प्रकाशित करवाए गए थे ताकि अगर किसी व्यक्ति के पास इस मामले से संबंधित कोई शिकायत या जानकारी हो तो वह सामने आ सके। हालांकि सरकारी वकील के मुताबिक इसके बाद कोई व्यक्ति ऐसी शिकायत लेकर सामने नहीं आया।
आदित्य ठाकरे की ओर से क्या दलील दी गई?
सरकारी वकील की दलील पूरी होने के बाद आदित्य ठाकरे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पासबोला ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी इसी तरह की याचिका दायर की जा चुकी है। वकील ने दलील दी कि जब रशीद खान पठान की ओर से शिकायत की गई थी, उस समय दिशा के पिता सतीश सालियान ने खुद कोई शिकायत नहीं की थी। उनके मुताबिक बाद में सुनी-सुनाई बातों के आधार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए।
राजनीतिक दुश्मनी के लिए लगाए गए आरोप
आदित्य ठाकरे के वकील ने आरोप लगाया कि याचिका में लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और इसके पीछे राजनीतिक दुश्मनी हो सकती है। सुनवाई के दौरान राणे और उनके बेटे के नाम का भी जिक्र हुआ।
वकील ने अदालत में कहा कि याचिका में लगाए गए आरोपों के पीछे राजनीतिक विरोध और दूसरे तरह की रंजिश का मकसद दिखाई देता है। उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें दिशा के पिता के प्रति पूरी सहानुभूति है और वह भी मानते हैं कि परिवार को इस मामले में क्लोजर मिलना चाहिए, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि बिना पर्याप्त तथ्यों के आपराधिक मामला दर्ज कर दिया जाए।
दिशा की मौत पर हो रही राजनीति बंद होनी चाहिए
आदित्य ठाकरे की ओर से पेश वकील ने कहा कि दिशा के पिता के दर्द और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की मौत को लेकर जिस तरह से राजनीतिक विवाद खड़ा किया जा रहा है, उसे खत्म किया जाना चाहिए।