बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। एसपी राज ने इसकी पुष्टि की है।
बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।
- Published: 31 Jul 2026, 10:42 AM IST
- Last Updated: 31 Jul 2026, 10:42 AM IST
Bharat Tiwari encounter Case: बिहार के सबसे चर्चित पुलिस एनकाउंटर मामलों में शुमार 'भरत तिवारी प्रकरण' में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। भरत तिवारी पर कथित तौर पर गोलियां बरसाने वाले स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि स्थानीय एसपी राज द्वारा कर दी गई है।
इस बहुचर्चित मामले में भरत तिवारी के परिजनों की तरफ से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में जगदीशपुर के तत्कालीन डीएसपी राजेश शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार और एसटीएफ जवान अक्षय कुमार सहित अन्य को नामजद आरोपी बनाया गया था। वहीं, भरत के भाई चंदन तिवारी का कहना है कि इस मामले में शामिल सभी आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए।
क्या है 17 जून 2026 की पूरी घटना?
यह पूरी घटना 17 जून 2026 की है, जब बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी का कथित पुलिस एनकाउंटर हुआ था। पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत को कुल पांच गोलियां मारी गई थीं। परिजनों और स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए कि पुलिस ने सरेंडर करने के बाद भरत तिवारी को अपनी हिरासत में ले लिया और इसके बाद उसे गोली मार दी।
घटना के वक्त भरत तिवारी के हाथ में कथित तौर पर पिस्टल थी, जिसे उसने पुलिस के निर्देश पर फेंक दिया था। परिजनों का आरोप है कि हथियार पूरी तरह जब्त कर लिए जाने के बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया था।
हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज कर रहे जांच
इस घटना को लेकर जब चारों तरफ फेक एनकाउंटर के गंभीर आरोप लगने लगे और इसके विरोध में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए, तब प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद डीएसपी और थानेदार समेत कुल पांच पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी के बयान के आधार पर इन पुलिस कर्मियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के विशेष आदेश पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया। पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में इस आयोग की जांच चल रही है, जिसके तहत अब तक लगभग 15 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों से पूछताछ की जा चुकी है।
आयोग के अध्यक्ष ने खुद भरत तिवारी के घर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की और घटनास्थल पर पहुंचकर क्राइम सीन का भी बारीकी से अवलोकन किया है।
परिजनों की मुख्यमंत्री से मुलाकात और एनडीए नेताओं की मांग
पिछले सप्ताह भरत तिवारी के पीड़ित परिवार के सदस्यों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात को कराने में बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने अहम भूमिका निभाई थी। मुलाकात के दौरान परिजनों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखी और सरकार पर पूरा भरोसा जताया था।
इस पूरे प्रकरण को लेकर बिहार सरकार के मंत्री मिथिलेश तिवारी, अशोक चौधरी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत एनडीए के कई दिग्गज नेताओं ने खुलकर यह आरोप लगाया कि भरत तिवारी का फर्जी एनकाउंटर (Fake Encounter) किया गया है।
इन सभी नेताओं ने एनकाउंटर में संलिप्त पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई थी। न्याय की इस मांग को लेकर परिजनों, संबंधियों और समर्थकों ने पटना से लेकर दिल्ली तक जोरदार प्रदर्शन किए थे।
परिजनों ने जताया संतोष, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
पुलिस की इस ताजा कार्रवाई के बाद पीड़ित परिवार ने सरकार और प्रशासन का आभार व्यक्त किया है, जिससे उन्हें अब न्याय मिलने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। हालांकि, भरत के भाई चंदन तिवारी ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक इस मामले से जुड़े सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक वे लोग चुप नहीं बैठेंगे।
परिवार की ओर से उस मुख्य पदाधिकारी के खिलाफ भी कठोरतम कानूनी कार्रवाई की लगातार मांग की जा रही है, जिसके स्पष्ट आदेश पर भरत तिवारी को गोली मारी गई थी।