
पैलेट गन के इस्तेमाल की जरूरत कब पड़ती है?Image Credit source: Getty Images (प्रतीकात्मक तस्वीर)
संसद में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी नेताओं ने पैलेट गन की खूब चर्चा की. उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन से हमला हुआ था. बीते बुधवार को लोकसभा में उस समय भारी हंगामा हो गया था, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर नीट परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर ये पैलेट गन है क्या और क्यों इसको लेकर इतना बवाल मचा हुआ है?
दरअसल, पैलेट गन के इस्तेमाल पर SOP (Standard Operating Procedure) का उद्देश्य भीड़ नियंत्रण के दौरान कम से कम घातक (Less Lethal) बल का इस्तेमाल करना होता है. इसका उपयोग मुख्य रूप से संवेदनशील क्षेत्रों या आपात स्थिति में सुरक्षा बलों द्वारा किया जाता है. हालांकि इसके उपयोग को लेकर समय-समय पर विवाद भी रहे हैं, क्योंकि इससे कई बार गंभीर आंखों और चेहरे की चोटें हुई हैं.
पैलेट गन क्या है?
पैलेट गन आमतौर पर 12-बोर पंप-एक्शन शॉटगन होती है, जिसमें कारतूस के अंदर सैकड़ों छोटे धातु के पैलेट (छर्रे) होते हैं. फायर करने पर ये पैलेट फैलकर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.
पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े नियम
- अंतिम विकल्प: पैलेट गन का इस्तेमाल तभी किया जाता है, जब समझाने और चेतावनी देने के प्रयास विफल हो जाएं. लाठीचार्ज, आंसू गैस, वाटर कैनन या अन्य कम घातक उपाय असरदार न हों. भीड़ हिंसक हो और जान-माल या सुरक्षा बलों को गंभीर खतरा हो.
- सक्षम अधिकारी की अनुमति: सामान्यत मौके पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारी/घटना के कमांडर की अनुमति के बाद ही इसका उपयोग किया जाता है. हर बल (CRPF, RAF, राज्य पुलिस) के अपने ऑपरेशनल आदेश और कमांड चैन होते हैं.
- निशाना कहां लगाया जाए: SOP के अनुसार, पैलेट गन से सिर, चेहरा, आंख, गर्दन और छाती पर निशाना नहीं लगाया जाता. लक्ष्य आमतौर पर कमर के नीचे, विशेषकर पैरों की ओर रखा जाता है, ताकि व्यक्ति को रोका जा सके, न कि गंभीर रूप से घायल किया जाए.
- दूरी का ध्यान: बहुत कम दूरी से फायरिंग नहीं की जाती, क्योंकि इससे गंभीर चोट या मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है. इसके इस्तेमाल पर पर्याप्त सुरक्षित दूरी बनाए रखने के निर्देश होते हैं.
- न्यूनतम आवश्यक बल: केवल उतनी ही फायरिंग की जाती है, जितनी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी हो. भीड़ के शांत होने पर तुरंत फायरिंग रोक दी जाती है.
- चिकित्सा सहायता: अगर कोई पैलेट गन से घायल होता है तो उसे जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाती है.
- घटना का रिकॉर्ड: फायरिंग की परिस्थितियों, आदेश देने वाले अधिकारी, इस्तेमाल किए गए राउंड और परिणाम का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है. कई मामलों में बाद में पोस्ट-इवेंट रिव्यू या जांच भी की जाती है.
पैलेट गन पर विवाद
मानवाधिकार संगठनों ने कई बार इसके उपयोग का विरोध किया है, क्योंकि इससे आंखों की स्थायी रोशनी जाने जैसी गंभीर चोटों के मामले सामने आए हैं. इसके बाद सुरक्षा बलों ने प्रशिक्षण, SOP के पालन और वैकल्पिक कम-घातक साधनों पर अधिक जोर दिया है.
किन परिस्थितियों में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए?
- शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर.
- जब कम घातक अन्य उपाय प्रभावी हों.
- भीड़ नियंत्रण की शुरुआती प्रतिक्रिया के रूप में.
- छोटे बच्चों, बुजुर्गों या ऐसे लोगों पर जिनसे तत्काल गंभीर खतरा न हो.
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अंजू निर्वाण
अंजू निर्वाण भारत की लीडिंग डिफेंस पत्रकारों में से एक हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर अपनी सटीक रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण के लिए जानी जाती हैं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने इंडिया टीवी, न्यूज़ 24, ज़ी न्यूज़, इंडिया न्यूज़, ईटीवी और रिपब्लिक भारत जैसे प्रमुख समाचार चैनलों में रिपोर्टर, एंकर, प्रोड्यूसर और खोजी पत्रकार के रूप में काम किया है. सितंबर 2022 से अंजू निर्वाण टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वह रक्षा मामलों की कवरेज का नेतृत्व करती हैं, भारत के सैन्य आधुनिकीकरण, नौसेना की प्रगति, मिसाइल प्रणालियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर कवरेज करती हैं. अंजू निर्वाण ने युद्ध क्षेत्रों से रिपोर्टिंग की है, अग्रिम पंक्ति के सैन्य अभ्यासों को कवर किया है और शीर्ष रक्षा अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं.
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