SI भर्ती रद्द होने के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर (इतिहास) बनी: कोटा पुलिस लाइन में थी तैनात, बोलीं- परीक्षा रद्द होने के बाद लोगों ने ताने मारे थे - Sawai Madhopur News

Published on 11 सित॰ 2026

सवाईमाधोपुर के सूरवाल कस्बे की पदमा पत्नी आत्माराम का कॉलेज शिक्षा में असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास के पद पर चयन हुआ है। बहुचर्चित SI भर्ती 2021 रद्द होने के बाद भी पदमा ने पढ़ाई जारी रखी और लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती रहीं। पदमा पहले महिल

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सवाईमाधोपुर के सूरवाल कस्बे की पदमा पत्नी आत्माराम ने कॉलेज शिक्षा में असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास के पद पर चयन होकर सफलता हासिल की है। पदमा ने बहुचर्चित SI भर्ती 2021 में भी सफलता हासिल की थी और सब इंस्पेक्टर के पद पर काम किया। भर्ती रद्द होने के बाद आलोचक उन्हें फर्जी कहकर ताने मारते थे और लोग उनका मखौल उड़ाते थे। इसके बावजूद पदमा ने हार नहीं मानी और लगातार अपनी पढ़ाई जारी रखी।

पदमा के असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास के पद पर चयन के बाद उनके परिवार और पूरे कस्बे में खुशी का माहौल है।

एसआई की नौकरी के दौरान पदमा कोटा पुलिस लाइन में तैनात रही।

एसआई की नौकरी के दौरान पदमा कोटा पुलिस लाइन में तैनात रही।

SI की नौकरी के दौरान कोटा पुलिस लाइन में तैनाती

पदमा SI की नौकरी के दौरान कोटा पुलिस लाइन में तैनात रही थीं। उन्होंने बहुचर्चित SI भर्ती 2021 में सब इंस्पेक्टर के पद पर अक्टूबर 2023 से मई 2026 तक काम किया।

इसके बाद हाई कोर्ट के आदेश से उन्हें फिर सुपरवाइजर के पद पर काम करना पड़ा। उन्होंने मासलपुर, करौली में सुपरवाइजर के पद पर दोबारा पदभार संभाला।

सुपरवाइजर की नौकरी छोड़कर बनी थीं SI

पदमा सूरवाल 26 अगस्त 2020 से 23 अक्टूबर 2023 तक महिला अधिकारिता विभाग में ब्लॉक सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत रही थीं। इसके बाद अक्टूबर 2023 से मई 2026 तक उन्होंने बहुचर्चित SI भर्ती 2021 के तहत सब इंस्पेक्टर के पद पर काम किया।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद वह फिर सुपरवाइजर के पद पर लौट गईं और मासलपुर, करौली में पदभार संभाला। पदमा का इससे पहले भी अलग-अलग सरकारी भर्तियों में चयन हो चुका है। उनका LDC भर्ती 2018 और पटवार भर्ती 2020 में भी चयन हुआ था।

पदमा की सफलताओं में उनके पति का मार्गदर्शन, लगातार प्रयास और धैर्य मील का पत्थर साबित हुए। उनका जन्म मलारना डूंगर के पास पीलवा नदी गांव में हुआ था।

गांव से पैदल स्कूल जाती थीं

पदमा के लिए सफलता तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। स्कूल के दिनों में वह अपने गांव से पैदल चलकर मलारना स्टेशन स्कूल जाती थीं। घर पर खेती के काम में मां का हाथ भी बंटाती थीं।

इन जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने अपने सपनों को संजोए रखा और लगातार आगे बढ़ती रहीं। आज उनके सपनों का सच होना उनके संघर्ष का परिणाम है।

अब UPSC में चयन बनाना लक्ष्य

कॉलेज शिक्षा में असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास के पद पर चयन के बाद भी पदमा ने पढ़ाई जारी रखी है। अब उनका अगला लक्ष्य UPSC में चयनित होकर देश सेवा करना है। वह इसके लिए लगातार अपनी पढ़ाई में जुटी हुई हैं। पदमा कहती हैं, "आपकी सफलता ही आलोचकों को सबसे बड़ा मौन जवाब है।"