एक्सप्लोरर
Shukra Vakri 2026: शुक्र वक्री होने पर क्या नई कार, ज्वेलरी और महंगी चीजें खरीदना अशुभ है? जानें खरीदारी के मुहूर्त में क्या देखें और वक्री-अस्त का अंतर.
Written By : Hirdesh Kumar Singh | Updated at : 03 Oct 2026 02:28 PM (IST)

शुक्र वक्री में कार खरीद सकते हैं या नहीं?
Source : abplive
Shukra Vakri 2026: कार पसंद कर ली. बुकिंग का पैसा भी दे दिया. अब डिलीवरी से पहले किसी ने कह दिया, शुक्र वक्री हो गया है, अभी गाडी मत लेना. क्या सच में खरीदारी रोक देनी चाहिए? शादी के लिए गहने लेने हैं तो क्या उसके लिए भी इंतजार जरूरी है?
सिर्फ शुक्र के वक्री होने से हर नई कार, ज्वेलरी या महंगी चीज की खरीदारी अशुभ नहीं हो जाती. खरीदारी का मुहूर्त कई बातों को देखकर तय होता है. एक ग्रह की चाल के आधार पर सभी लोगों को एक जैसा फैसला सुनाना अधूरी ज्योतिषीय सलाह है.
हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्र 3 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:45 बजे वक्री और 14 नवंबर को सुबह 5:57 बजे मार्गी होगा. ये समय भारतीय मानक समय के अनुसार हैं.
शुक्र का नाम आते ही खरीदारी की चिंता क्यों?
ज्योतिषीय परंपरा में शुक्र को सुंदरता, आभूषण, आराम और भौतिक सुखों से जोडा जाता है. इसलिए नई कार या लग्जरी सामान खरीदने की चर्चा में शुक्र की स्थिति देखी जाती है.
लेकिन यहां एक फर्क समझना जरूरी है. किसी वस्तु का कारक ग्रह होना और उसके वक्री होते ही उस वस्तु की खरीद पर रोक लग जाना, दो अलग बातें हैं. शुक्र वक्री है, इसलिए खरीदी गई हर चीज नुकसान देगी जैसे दावे को निश्चित नियम मानना सही नहीं है.
वाहन खरीदने का मुहूर्त कैसे देखा जाता है?
हिंदू पंचांग की वाहन खरीद मुहूर्त पद्धति में वार, तिथि और नक्षत्र की शुद्धि देखी जाती है. इसके बाद उपयुक्त लग्न से समय को मजबूत करने और मुहूर्त में राहुकाल पडने पर उससे बचने की सलाह दी गई है. समय शहर के अनुसार बदलता है. यानी केवल शुक्रवार होना या शुक्र का मार्गी होना पर्याप्त नहीं है.
इसीलिए कोई व्यक्ति मुहूर्त का पालन करना चाहता है तो उसे खरीदारी की तय तारीख और अपने शहर का पंचांग देखना चाहिए. किसी पोस्ट में बताया गया समय पूरे देश के लिए लागू नहीं होता.
वक्री और अस्त को एक न समझें
वक्री होने का अर्थ है कि पृथ्वी से देखने पर ग्रह की चाल पीछे जाती हुई दिखाई देती है. अस्त होने का संबंध सूर्य के निकट आने और ग्रह की दृश्यता से है.
इन दोनों स्थितियों को मिलाकर शुक्र खराब है, सब शुभ काम बंद कहना भ्रम पैदा करता है. विवाह, वाहन खरीद और सामान्य सामान लेने के नियम भी बिना जांचे एक-दूसरे पर लागू नहीं करने चाहिए.
कार बुक है तो अब क्या करें?
सिर्फ वक्री होने की खबर सुनकर बुकिंग रद्द करने की जरूरत नहीं है. पहले समझें कि आपकी चिंता किस बात की है. मुहूर्त की आस्था है तो डिलीवरी का स्थानीय समय जांचें. खरीदारी को लेकर संदेह है तो गाडी, कुल कीमत, भुगतान की शर्तें और जरूरी कागजात दोबारा देखें.
बुकिंग, भुगतान और डिलीवरी अलग चरण हैं. सलाह लेते समय साफ बताएं कि इनमें से किस काम का समय तय करना है.
ज्वेलरी और महंगे सामान के लिए क्या समझें?
शादी की जरूरी ज्वेलरी और अचानक पसंद आया महंगा हार, दोनों की जरूरत अलग है. केवल डर के कारण जरूरी खरीद टालना और केवल ऑफर देखकर गैरजरूरी खरीद करना, दोनों से बचें.
ज्वेलरी में शुद्धता, वजन, मेकिंग चार्ज और वापसी की शर्तें समझें. महंगे फोन या दूसरे सामान में उपयोग और वारंटी देखें. ये जांच हर तारीख पर काम आती है.
शुक्र वक्री होने को खरीदारी पर पूरी रोक समझना सही नहीं है. आस्था के अनुसार मुहूर्त चुनें, लेकिन वस्तु की गुणवत्ता और अपनी जरूरत की जांच भी करें. ग्रह की चाल खरीदारी खराब होने का प्रमाण नहीं है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
और पढ़ें

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader
'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'
हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.
वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.
उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University, Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है. इसके साथ ही उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush’ सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है, जिसमें Keyword Research, Topic Clusters, E-E-A-T आधारित कंटेंट और AI Search Optimization शामिल हैं. वे Astrosage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम कर चुके हैं. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.
हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है.
वर्तमान में Youth Protest, CJP आंदोलन और एक्टर शाहरुख खान को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.
वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों के विशेषज्ञ है और लेखन करते हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.
डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.
उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.
श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.
ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.
Read More
Published at : 03 Oct 2026 02:28 PM (IST)
Breaking News, Anytime, Anywhere - Download ABPLIVE on Android and iOS now!
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
वीडियोज




