Why is Shradh Performed: पितृ पक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है. इस दौरान लोग अपने दिवंगत परिजनों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं. मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों के निमित्त किए गए श्राद्ध कर्म से उन्हें शांति मिलती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. साल 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से हुई है और इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा. इन दिनों लोग अपने पितरों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करते हैं और अन्न, जल, पिंडदान व दान-पुण्य जैसे कर्म करते हैं.
लेकिन कभी आपने सोचा है कि आखिर पितरों के लिए श्राद्ध करना इतना जरूरी क्यों माना जाता है? क्या सिर्फ परंपरा निभाने के लिए ही श्राद्ध किया जाता है या इसके पीछे कोई धार्मिक महत्व भी है? शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं में श्राद्ध को पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, उनकी आत्मा की तृप्ति और परिवार के कल्याण से जोड़कर देखा गया है. वहीं, श्राद्ध और तर्पण न करने को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं.
श्राद्ध करना क्यों है जरूरी?
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध करना बेहद जरूरी माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, हमारे पूर्वजों ने हमें जीवन, संस्कार और संबल दिया है. उनके प्रति सम्मान और धन्यवाद प्रकट करने का माध्यम श्राद्ध है. पितृ पक्ष या श्राद्ध के दिनों में पिंडदान, तर्पण और अन्न-जल दान करने से दिवंगत आत्माओं को संतुष्टि और शांति मिलती है.ऐसा माना जाता है कि संतुष्ट पितर अपने परिवार को सुख, समृद्धि, लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं.
श्राद्ध नहीं करने से क्या होता है?
धर्म ग्रंथों के अनुसार, पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण न करने से पितृ दोष लगता है और जीवन में कई तरह की गंभीर परेशानियां आ सकती हैं.
पितृ दोष का निर्माण:- श्राद्ध न करने से पितर असंतुष्ट होते हैं, जिससे कुंडली में पितृ दोष लगता है.
आर्थिक तंगी:- परिवार में धन की हानि, आय में रुकावट और लगातार आर्थिक अस्थिरता बनी रहती है.
वंश वृद्धि में बाधा:- ऐसी मान्यता है कि परिवार में संतान की प्राप्ति में बाधा आती है या वंश आगे बढ़ने में कठिनाई होती है.
स्वास्थ्य समस्याएं:- घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अक्सर खराब रहता है और कोई न कोई बीमारी बनी रहती है.
पारिवारिक कलह:- घर-परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम खत्म होता है और रोज-रोज के झगड़े व तनाव बढ़ते हैं.
मानसिक अशांति और असफलता:- किए गए कार्यों में लगातार असफलता मिलती है और जीवनभर बाधाओं का सामना करना पड़ता है.
पितरों का कष्ट:- धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भोजन और जल न मिलने से मृत आत्मा को तृप्ति नहीं मिलती और वे कष्ट महसूस करते हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

सना चौधरी
सना यूपी के गाजियाबाद की रहने वाली हैं. सना ने हाईटेक इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है. पढ़ाई के साथ-साथ कंटेंट ऑप्टिमाईजेशन और वीडियो एडिटिंग भी सीखा है. जिसके बाद सना ने अलग-अलग जगहों पर डिजिटल कॉन्टेंट राइटर और वीडियो एडिटर के तौर पर काम किया. इससे पहले सना Zee मीडिया में बतौर वीडियो और कंटेंट एडिटर काम कर चुकी हैं. उन्होंने जी न्यूज में सोशल मीडिया पेज मैनेज किया है. Zee के बाद सना ने टीवी9 भारतवर्ष की वेबसाइट TV9hindi.com में बतौर ट्रेनी ज्वाइन किया. सना को न्यूज़ एंकरिंग का भी शौक है.
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