SGPGI के 8 रिसर्च प्रोजेक्ट को ICMR से मिली मंजूरी: कैंसर से लेकर किडनी-नवजात रोगों पर रिसर्च, इस साल अब तक करीब 20 करोड़ मिले - Lucknow News

Published on 12 अग॰ 2026
  • Hindi News
  • Local
  • Uttar pradesh
  • Lucknow
  • SGPGI Lucknow Research Projects | ICMR Grants 20 Crore Funding Success

लखनऊ36 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
SGPGI के 8 रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए ICMR की 20 करोड़ की मंजूरी। - Dainik Bhaskar

SGPGI के 8 रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए ICMR की 20 करोड़ की मंजूरी।

SGPGI के 8 रिसर्च प्रोजेक्ट्स को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) को मंजूरी मिली है। इनमें पांच प्रोजेक्ट को करीब 11.2 करोड़ रुपये की फंडिंग मिलेगी, जबकि तीन अन्य प्रोजेक्ट के लिए 8.46 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इस तरह SGPGI को अगस्त 2026 तक इस साल ICMR से करीब 20 करोड़ रुपये की शोध फंडिंग मिल चुकी है।

संस्थान के निदेशक प्रो.राधा कृष्ण धीमन ने इसे शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह SGPGI के मजबूत शोध माहौल, अलग-अलग चिकित्सा क्षेत्रों की विशेषज्ञता और नई स्वास्थ्य चुनौतियों पर हो रहे शोध को दर्शाता है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य वैज्ञानिक खोजों को मरीजों के इलाज में उपयोगी तकनीक और उपचार में बदलना है।

निदेशक प्रो.आरके धीमन के साथ संस्थान के फैकल्टी मेंबर्स।

निदेशक प्रो.आरके धीमन के साथ संस्थान के फैकल्टी मेंबर्स।

81 प्रस्ताव भेजे गए, 22 को रिसर्च कमेटी ने चुना

रिसर्च की प्रभारी प्रो.विनीता अग्रवाल ने बताया कि ICMR की इस कॉल के तहत SGPGI के शिक्षकों से 81 शोध प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इनमें से 22 प्रस्तावों को संस्थान की रिसर्च कमेटी ने ICMR को भेजने के लिए चुना। राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन के बाद इनमें से पांच प्रस्तावों को फंडिंग के लिए मंजूरी मिली।

डीन प्रो.शालीन कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिस्पर्धी योजना में आठ प्रस्तावों का चयन SGPGI के शिक्षकों की वैज्ञानिक क्षमता और संस्थान में उपलब्ध शोध सुविधाओं की पहचान है।

कैंसर से लेकर किडनी और नवजात रोगों तक शोध

चयनित प्रोजेक्ट में फैटी लिवर रोग (MASLD), ग्लायोब्लास्टोमा, गर्भावस्था में एनीमिया, किडनी ट्रांसप्लांट, कैंसर इम्यूनोथेरेपी, नवजात रोग, वायरल हेपेटाइटिस और किडनी की बीमारी से जुड़े शोध शामिल हैं।

इन शोध का हुआ सेलेक्शन

  • डॉ.रोहित सिन्हा, एंडोक्राइनोलॉजी विभाग - MASLD में बीमारी बढ़ने की प्रक्रिया और नए उपचार लक्ष्य खोजने पर शोध।
  • डॉ.लोकेन्द्र शर्मा, मॉलिक्यूलर मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी विभाग - ग्लायोब्लास्टोमा में मरीज से प्राप्त ऑर्गेनॉइड के जरिए बीमारी के मॉडल, बायोबैंक और नए उपचार की संभावनाओं पर शोध।
  • डॉ.आलोक कुमार, मॉलिक्यूलर मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी विभाग - गर्भावस्था से जुड़ी एनीमिया में हेप्सिडिन की भूमिका और इलाज के असर का अध्ययन।
  • डॉ.अतुल गर्ग, माइक्रोबायोलॉजी विभाग - किडनी ट्रांसप्लांट मरीजों में वायरल संक्रमण दोबारा सक्रिय होने और किडनी के काम में खराबी के शुरुआती संकेतों की पहचान के लिए नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) का इस्तेमाल।
  • डॉ.कुलवंत सिंह, हेमेटोलॉजी विभाग - कैंसर की इम्यूनोथेरेपी के खिलाफ कोशिकाओं में विकसित होने वाले प्रतिरोध के कारण और उसके संभावित इलाज पर शोध।
  • डॉ.अमित गोयल, हेपेटोलॉजी विभाग - हेपेटाइटिस-सी और गंभीर लिवर सिरोसिस के मरीजों में इलाज की अवधि 24 से घटाकर 12 सप्ताह करने की संभावना का अध्ययन।
  • डॉ.अतुल, नेफ्रोलॉजी विभाग - IgA नेफ्रोपैथी में किडनी की मैक्रोफेज कोशिकाओं की भूमिका, बीमारी के संकेतक और नए उपचार की संभावनाओं पर शोध।
  • डॉ.कीर्ति नरांजे, नियोनेटोलॉजी विभाग - नवजात गहन चिकित्सा इकाइयों के लिए सुरक्षित और स्वचालित टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रिशन (TPN) तैयार करने वाली तकनीक विकसित करने पर शोध।

इन फील्ड में होगा रिसर्च

इन शोध परियोजनाओं से SGPGI में मॉलिक्यूलर मेडिसिन, ऑर्गेनॉइड तकनीक, जीन सीक्वेंसिंग, कैंसर रिसर्च और नए उपचारों के क्षेत्र में शोध को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

.