Explainer: SCO Summit के दौरान नेताओं की एक ग्रुप फोटो को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की गई तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कुछ अन्य नेताओं के नजर नहीं आने के बाद सवाल उठने लगे हैं. खासतौर पर यह चर्चा हो रही है कि क्या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में नेता अपनी मर्जी से ग्रुप फोटो के लिए खड़े होते हैं या फिर उनके स्थान पहले से तय किए जाते हैं.
इस विवाद को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के शिखर सम्मेलन में नेताओं की ग्रुप फोटो केवल सामान्य फोटो सेशन नहीं होती. इसमें कूटनीतिक प्रोटोकॉल, मेजबान देश की व्यवस्था और कार्यक्रम की आधिकारिक योजना का महत्वपूर्ण योगदान होता है.
ग्रुप फोटो के लिए नेताओं की जगह कैसे तय होती है?
अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों में ग्रुप फोटो की तैयारी आमतौर पर पहले से की जाती है. मेजबान देश के प्रोटोकॉल अधिकारी यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि कौन सा नेता किस स्थान पर खड़ा होगा.
इसमें केवल यह नहीं देखा जाता कि कौन सा नेता किस देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है, बल्कि पद, संगठन में भूमिका, सम्मेलन की मेजबानी और कई बार राजनयिक वरिष्ठता जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है.
यही वजह है कि किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तस्वीर में नेताओं का खड़ा होना आमतौर पर पूरी तरह संयोग या मनमाना फैसला नहीं होता.
क्या मेजबान नेता को मिलता है खास स्थान?
कई अंतरराष्ट्रीय बैठकों में मेजबान देश के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख को फोटो में प्रमुख स्थान दिया जाता है. इसका कारण केवल राजनीतिक महत्व नहीं, बल्कि प्रोटोकॉल भी होता है.
मेजबान नेता के आसपास दूसरे देशों के प्रमुखों और संगठन के महत्वपूर्ण पदाधिकारियों को खड़ा किया जा सकता है. हालांकि, हर सम्मेलन में व्यवस्था बिल्कुल एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है. मंच का आकार, नेताओं की संख्या, कार्यक्रम का प्रारूप और सुरक्षा व्यवस्था के अनुसार पोजिशनिंग बदल सकती है.
इसलिए किसी एक तस्वीर के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बीच की जगह हमेशा सबसे शक्तिशाली देश को ही मिलती है.
क्या क्रम हमेशा वरिष्ठता के आधार पर होता है?
यह भी एक महत्वपूर्ण सवाल है. ग्रुप फोटो में नेताओं की जगह तय करने का कोई एक सार्वभौमिक फॉर्मूला नहीं है. अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संगठनों और कार्यक्रमों में अलग प्रोटोकॉल हो सकते हैं.
कई मामलों में पद और वरिष्ठता महत्वपूर्ण होती है, जबकि कहीं वर्णक्रम, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व या संगठन में किसी देश की भूमिका को ध्यान में रखा जा सकता है.
इसके अलावा संगठन के महासचिव या किसी महत्वपूर्ण अधिकारी को भी फोटो में निर्धारित स्थान मिल सकता है. इसलिए तस्वीर में किसी नेता का बाएं या दाएं खड़ा होना अपने आप में उसके राजनीतिक महत्व का प्रमाण नहीं माना जा सकता.
क्या नेता अपनी मर्जी से कहीं भी खड़े हो सकते हैं?
आमतौर पर नेताओं को फोटो से पहले उनकी निर्धारित जगह के बारे में बताया जाता है. प्रोटोकॉल अधिकारी और आयोजक यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी प्रतिनिधि सही स्थान पर खड़े हों.
हालांकि, वास्तविक फोटो सेशन के दौरान थोड़े-बहुत बदलाव हो सकते हैं. कोई नेता बातचीत करते हुए कुछ कदम आगे या पीछे हो सकता है या दूसरे नेता के साथ अभिवादन के दौरान स्थान बदल सकता है.
लेकिन पूरी व्यवस्था को मनमाना कहना उचित नहीं होगा. बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में फोटो सेशन भी कार्यक्रम के आधिकारिक प्रोटोकॉल का हिस्सा होता है.
SCO Summit की तस्वीर से जुड़ा विवाद क्या है?
अब यही बात SCO Summit की विवादित तस्वीर पर लागू होती है. सम्मेलन के दौरान ली गई मूल ग्रुप फोटो में विभिन्न सदस्य देशों के नेता एक साथ दिखाई देते हैं. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे.
बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया पर जो तस्वीर साझा की गई, उसमें मोदी समेत कुछ अन्य नेता दिखाई नहीं दिए. इसी अंतर को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हुई.
कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा, जबकि दूसरी तरफ यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी तस्वीर को क्रॉप करने या उसका अलग फ्रेम इस्तेमाल करने का मतलब जरूरी नहीं कि मूल फोटो में मौजूद व्यक्ति को डिजिटल रूप से मिटाया गया हो.
अंतरराष्ट्रीय फोटो में हर पोजिशन का राजनीतिक मतलब नहीं
सोशल मीडिया के दौर में किसी अंतरराष्ट्रीय बैठक की तस्वीर कुछ ही मिनटों में राजनीतिक बहस का विषय बन सकती है. लेकिन तस्वीर में किसी नेता का एक तरफ खड़ा होना या दूसरे नेता का बीच में होना हमेशा किसी विशेष राजनीतिक संदेश का संकेत नहीं होता.
कई बार कैमरे का एंगल, मंच की बनावट, नेताओं की संख्या और प्रोटोकॉल के कारण तस्वीर में स्थान निर्धारित होता है. इसके अलावा अलग-अलग कैमरों से ली गई तस्वीरों में भी फ्रेम बदल सकता है. इसलिए फोटो की व्याख्या करते समय मूल तस्वीर और उसके संपादित या क्रॉप किए गए संस्करण की तुलना करना जरूरी है.
SCO जैसे मंच पर फोटो क्यों महत्वपूर्ण होती है?
SCO केवल एक सामान्य सम्मेलन नहीं है. यह कई देशों को एक साझा बहुपक्षीय मंच पर लाने वाला महत्वपूर्ण संगठन है. ऐसे में नेताओं की सामूहिक तस्वीर सम्मेलन की आधिकारिक गतिविधियों का हिस्सा होती है.
ग्रुप फोटो में अलग-अलग देशों के नेता एक साथ नजर आते हैं, इसलिए ऐसी तस्वीरें अक्सर कूटनीतिक संदेश और मीडिया कवरेज का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती हैं.
भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को देखते हुए दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की एक ही फ्रेम में मौजूदगी भी स्वाभाविक रूप से ज्यादा ध्यान आकर्षित करती है.
विवाद पर निष्कर्ष निकालने से पहले क्या देखना चाहिए?
SCO Summit की तस्वीर को लेकर विवाद में सबसे जरूरी बात यह है कि मूल तस्वीर और पाकिस्तान PMO की ओर से साझा तस्वीर के बीच अंतर को तकनीकी रूप से समझा जाए.
यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में ग्रुप फोटो की पोजिशनिंग आमतौर पर प्रोटोकॉल और आयोजकों की व्यवस्था के अनुसार होती है. नेता आमतौर पर अपनी इच्छा से किसी भी स्थान पर खड़े नहीं हो जाते.
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