
पुतिन, ट्रंप और शी जिनपिंग.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान और उसकी सेना को ट्रंप की सबसे नई धमकी दी है. आधी रात ईरान को फिर से दहलाने की धमकी दी है. ट्रंप की तरफ से ये धमकी तब आई है, जब ईरान और अमेरिका में युद्ध का नया चरण शुरू हो गया.30 और 31 अगस्त की रात अमेरिका और ईरान ने एक दूसरे पर बारूदी प्रहार किया. अमेरिका ने ईरानी सेना IRGC को चोट पहुंचाई, तो ईरान ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों को दहला दिया.
अमेरिका और ईरान में जंग का नया राउंड ठीक शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक के बीच शुरू हुआ. 1 सितंबर को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO समिट हो रही है. इस समिट में सभी देशों के राष्ट्रप्रमुख शामिल हो रहे हैं.
सवाल यही है कि आखिर SCO समिट की बैठक से पहले अमेरिका ने ईरान पर इतना बड़ा हमला क्यों किया? ट्रंप ने जंग की आग को फिर से क्यों भड़काई? क्या ट्रंप ने ईरान के साथ साथ रूस और चीन को संदेश दे दिया है? अगर हां तो वो संदेश क्या है, आज हम इसी का विश्लेषण करने जा रहे हैं, लेकिन सबसे पहले उस नई जंग की रिपोर्ट, जो अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई है.
अमेरिका-ईरान में फिर छिड़ी जंग
ईरानी सेना का कहना है कि युद्ध की शुरुआत अमेरिका ने ईरानी द्वीप पर हमला कर किया. इसीलिए ईरान ने अमेरिकी सेना के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की, लेकिन अमेरिका की थ्योरी दूसरी है. अमेरिका का कहना है कि उसके हमले का मकसद ईरान के नए हमलों को पहले ही विफल करना था.
अमेरिका के मुताबिक-ईरानी सेना अरब देशों में मौजूद उसके सैन्य ठिकानों पर मिसाइल लॉन्च करने की तैयारी कर रही थी. ईरान ऐसा कर पाता, उससे पहले ही अमेरिका ने उसके मिसाइल लॉन्चर को तबाह कर दिया. अमेरिका ने जो हमला किया, वो ईरान के लराक द्वीप पर किया. IRGC के ठिकानों पर तीन बार विस्फोट किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक-हमले में मिसाइल लॉन्च करने वाले ईरान के 2 प्लैटफॉर्म बर्बाद हो गए.
अमेरिका के इसी हमले के बाद जंग शुरू हो गई. ईरानी सेना ने आधी रात को ही ताबड़तोड़ हमले करने शुरू कर दिए. ईरानी सेना ने जॉर्डन में अमेरिका के दो बेस की तरफ बैलिस्टिक मिसाइलें दागी. ईरान का कहना है कि हमला सफल रहा. अमेरिकी सैन्य बेस को नुकसान पहुंचा, लेकिन जॉर्डन का कहना है कि उसने ईरान की सभी 8 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही तबाह कर दिया.
ईरान को ट्रंप की नई धमकी
ईरान का दावा है कि उसने सिर्फ जॉर्डन ही नहीं बल्कि UAE, कतर, कुवैत और बहरीन में भी हमला किया. हालांकि UAE ने इस बात से इनकार किया है कि ईरान ने उसके देश में मौजूद अमेरिकी बेस पर हमला किया.
UAE का दावा अपनी जगह लेकिन सच ये है कि जॉर्डन, UAE, कतर, कुवैत और बहरीन में कई धमाके हुए. ईरानी मिसाइलों के टारगेट पर अमेरिकी सेना के बेस थे. IRGC का दावा है कि उसके हमले में अमेरिकी सेना को जबरदस्त चोट पहुंची है.
ईरान का दावा इसलिए भी सही लग रहा है, क्योंकि ईरान के हमलों के बाद ट्रंप ने फिर से जबरदस्त बमबारी करने की धमकी जारी कर दी है. माना जा रहा है कि नुकसान का आंकलन लगने के बाद ट्रंप क्रोध से भर गए हैं और अब वो ईरान से इस नुकसान का बदला लेना चाहते है.
SCO समिट के बीच ट्रंप का हमला क्यों?
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ कर दिया है कि युद्ध के बाद ईरान कमजोर नहीं हुआ, बल्कि और भी ताकतवर बन गया है. इतना ताकतवर की दुश्मन को युद्ध के मैदान में परास्त करने की क्षमता रखता है. दुश्मन चाहे इजराइल हो या फिर अमेरिका. ईरान न सिर्फ खुद को पहले से ताकतवर बता रहा है, बल्कि अमेरिका के खिलाफ नया सैन्य अभियान शुरू करने की हुंकार भी भर रहा है.
ईरान जंग में जो दमखम दिखा रहा है, वो रूस और चीन के बल पर ही दिखा रहा है. ये बात ट्रंप और उनकी टीम भी जानती है. यही वजह है कि SCO समिट से ठीक पहले ईरान को दहला कर अमेरिका ने ये संदेश दे दिया है कि ईरान को न तो रूस बचा पाएगा और न ही चीन.
ट्रंप का ये बारूदी संदेश सिर्फ ईरान के लिए नहीं है, बल्कि रूस और चीन के लिए भी है. इन हमलों के जरिए अमेरिका ईरान से कह रहा है कि वो सरेंडर कर दे क्योंकि उसकी रक्षा रूस और चीन नहीं कर सकते हैं.
सच भी यही है कि बिना रूस और चीन की मदद के ईरान जंग में इतने लंबे समय तक टिक नहीं पाता. अमेरिकी नाकाबंदी की वजह से ईरान का तेल निर्यात बाधित है. चीन ही वो देश है जो गुप्त रूट से ईरान के कच्चे तेल को खरीद रहा है.
ट्रंप की धमकी का SCO पर क्या असर?
अमेरिका की नाकाबंदी के बाद ईरान अब भी प्रति दिन 15 लाख बैरल तेल दूसरे देशों में सप्लाई करने में कामयाब हो रहा है. ईरान इनमें से हर दिन करीब 13 लाख बैरल तेल चीन को सप्लाई करता है. यानी ईरान जो भी तेल इस वक्त दूसरे देशों में सप्लाई करता है, उसका 90 फीसदी हिस्सा चीन खरीद रहा है. ये सप्लाई सीक्रेट रूट के जरिए हो रही है.
तेल व्यापार से ईरान को जो कमाई हो रही है, उसी से ईरान की अर्थव्यवस्था चल रही है. उसी रकम से ईरानी सेना अमेरिका के साथ जंग लड़ रही है. उसी के दम पर भविष्य में बड़े युद्ध की तैयारी भी कर रही है.
नए प्रतिबंध लगाकर ट्रंप ने चीन और ईरान में होने वाले इसी सीक्रेट तेल व्यापार को बंद करने की कोशिश कर रहे हैं. एक तरफ प्रतिबंध लगाकर तो दूसरी तरफ हमला कर ट्रंप न सिर्फ ईरान को बल्कि चीन और रूस को भी संदेश दे रहे हैं कि रूस और चीन ईरान का साथ देना बंद कर दें, वरना अमेरिका कुछ भी कर सकता है.
ट्रंप की चेतावनी अपनी जगह, लेकिन सच ये है कि पुतिन और शी जिनपिंग न तो डरने वाले हैं और न ही ईरान को मदद रोकने वाले हैं. ऐसे में ईरान को लेकर महाशक्तियों में भीषण जंग की आशंका बढ़ गई है. वो जंग जिसमें एक तरफ अमेरिका हो सकता है तो दूसरी तरफ रूस और चीन. अब देखना यही है कि SCO समिट से पहले ईरान पर हमला कर ट्रंप ने पुतिन और जिनपिंग को जिस तरह से ललकारा है, उसका असर क्या होता है?
ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी9 भारतवर्ष
ये भी पढ़ें-जहां होनी है ट्रंप-पुतिन की मुलाकात, वहां चीन ने क्यों तैनात किए 5 बड़े जहाज
TV9 Bharatvarsh
टीवी9 भारतवर्ष डिजिटल TV9 नेटवर्क का प्रमुख हिंदी न्यूज़ प्लेटफॉर्म है. इस वेबसाइट पर देश-विदेश की ताज़ा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज़, विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्टिंग से पाठकों को रूबरू कराया जाता है. टीवी9 की वेबसाइट tv9hindi.com प्रमुख हिंदी वेबसाइटों में अपना स्थान रखती है. टीवी9 हिंदी का अपना मोबाइल ऐप भी है, जहां टेक्स्ट और वीडियो दोनों माध्यम से खबरें पढ़ीं और देखी जा सकती हैं. टीवी9 वेबसाइट पर राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन, स्वास्थ्य, टेक और अंतरराष्ट्रीय मामलों जैसी विविध श्रेणियों में खबरें कवर की जाती हैं. यहां एक्सप्लेनर्स, एक्सक्लूसिव स्टोरीज, वीडियो रिपोर्ट्स और लाइव अपडेट्स मिलते हैं. TV9 नेटवर्क का डिजिटल सेगमेंट तेजी से बढ़ा है और मिलियंस की संख्या में यूनिक यूजर्स तक पहुंचता है.
Read More