Sankashti Chaturthi 2026: कब है हेरंब संकष्टी चतुर्थी? जानें डेट, पूजा मुहूर्त और विधि
Updated: Sat, 29 Aug 2026 10:34 PM (IST)
भगवान गणेश और उनकी पूजा करते लोग. इमेज- एआई
Sankashti Chaturthi 2026: 31 अगस्त 2026 को हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा. मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संकटों से मुक्ति मिलती है. जानें इस व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि क्या है. मान्यतानुसार, इस व्रत को पौराणिक काल में दम्यंकती ने राजा नल की पुनः प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखा था.
Heramba Sankashti Chaturthi 2026: पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि संकष्टी चतुर्थी कहलाती है. भाद्रपद यानी भादो का महीना 29 अगस्त से शुरू हो चुका है. ऐसे में इस महीने की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजन किया जाएगा. धार्मिक मान्यता और परंपरा के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी को हेरंब चतुर्थी कहते हैं. मान्यतानुसार, इस दिन सही तरीके के व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा करने से हर प्रकार के संकटों से छुटकारा मिलता है. हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत के लिए शुभ मुहूर्त, और पूजन विधि क्या है?
हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब रखें?
पंचांग के अनुसार, हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत सोमवार, 31 अगस्त 2026 को रखा जाएगा. चतुर्थी तिथि की शुरुआत 31 अगस्त को सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर होगी. जबकि, यह तिथि 1 सितंबर को सुबह 8 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी. संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 29 मिनट पर होगी. हालांकि, स्थानीय समय के अनुसार, कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.
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हेरंब संकष्टी चतुर्थी 2026 पूजा विधि
- सुबह सूर्योदय से पहले उठकर दैनिक कर्म (शौच, स्नान इत्यादि) कर लें.
- लाल या पीले कपड़े पहनकर दाहिने हाथ में जल, अक्षत लेकर संकल्प करें.
- घर के पूजा स्थल की साफ करें और गंगाजल छिड़कें.
- गणपति की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें. अगर पहले से स्थापित हैं, तो उनका ध्यान करें.
- पूजन के दौरान भगवान गणेश को लाल फूल, दूर्वा, चंदन, कुमकुम, अक्षत और हल्दी, जनेऊ अर्पित करें.
- भगवान गणेश को लड्डू, मोदक, पान और फल का भोग लगाएं.
- शुद्ध घी का दीया जलाएं. साथ ही गणपति के सामने धूप जलाएं.
- गं गणपतये नमः या गणेशाय नमः मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करें.
- हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें.
- शाम के समय फिर से भगवान गणेश की आरती करें.
- रात को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें जल से अर्घ्य दें.
- चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद गणेश को भोग लगाएं और प्रसाद खाकर व्रत का पारण करें.
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क्यों रखा जाता है हेरंब संकष्टी चतुर्थी व्रत?
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत असहाय और निर्बलों की रक्षा करने वाली है. विधि-विधान से इस व्रत को रखने पर कठिन से कठिन संकटों से भी छुटकारा मिल जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दमयन्ती ने महर्षि शरभंग के कहने पर यह व्रत रखा था. कहते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से दमयन्ती का नल से पुनः मिलन हुआ था.
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