Repo Rate Hike: होम लोन महंगा होने की आहट, फेस्टिवल सीजन में घर खरीदना कितना मुफीद?

Published on 7 अक्टू॰ 2026

RBI के रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के सामने अब एक बड़ा सवाल है-क्या ब्याज दरों के और बढ़ने का इंतजार करें या मौजूदा समय में ही प्रॉपर्टी खरीद लें? रेपो रेट में बदलाव का असर बैंकों की ब्याज दरों और इसके बाद होम लोन की लागत पर पड़ सकता है. हालांकि, रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीमित बढ़ोतरी को देखकर घर खरीदने का फैसला पूरी तरह टालना सही रणनीति नहीं होगी.

विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में खरीदारों को ब्याज दर के बजाय अपनी आय, EMI चुकाने की क्षमता, डाउन पेमेंट, प्रॉपर्टी की लोकेशन और भविष्य में उसकी वैल्यू जैसे पहलुओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. जिन लोगों की घर खरीदने की योजना पहले से बनी हुई है और जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत है, उनके लिए सिर्फ रेपो रेट में बदलाव के कारण खरीदारी रोकना जरूरी नहीं है.

EMI का दबाव किन खरीदारों पर ज्यादा?

रेपो रेट बढ़ने का असर सबसे पहले होम लोन की ब्याज दरों के जरिए दिखाई दे सकता है. हालांकि, RBI की दर में हुई बढ़ोतरी का कितना हिस्सा बैंक ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, यह उनकी लेंडिंग रणनीति पर निर्भर करेगा. ऐसे में हर होम लोन ग्राहक की EMI पर एक जैसा असर नहीं होगा.

न्यूमैक्स ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील गोयल के मुताबिक, ब्याज दर बढ़ने का असर खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों के उन खरीदारों पर पड़ सकता है जो EMI में छोटे बदलाव के प्रति भी संवेदनशील हैं. हालांकि, उनका मानना है कि किफायती और मिड-सेगमेंट घरों की मजबूत मांग के कारण इसका प्रभाव बहुत ज्यादा नहीं होगा. रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में सुधार इन शहरों के बाजार को लंबे समय तक सपोर्ट करता रहेगा.

ब्याज दर से आगे देख रहे हैं होमबायर्स

रियल एस्टेट बाजार में खरीदारों का व्यवहार भी बदल रहा है. अब प्रॉपर्टी खरीदते समय केवल लोन की ब्याज दर या कीमत ही निर्णायक नहीं है. लोकेशन, प्रोजेक्ट की गुणवत्ता, सुविधाएं, कनेक्टिविटी और भविष्य में प्रॉपर्टी की वैल्यू भी फैसले में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

त्रेहान आईरिस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अमन त्रेहान ने कहा कि मौजूदा होमबायर्स ब्याज दर और लोन की लागत के माहौल के साथ खुद को काफी हद तक ढाल चुके हैं. उनके अनुसार, घर खरीदने वाले अब ब्याज दर के साथ-साथ प्रॉपर्टी की गुणवत्ता, लोकेशन और अर्थव्यवस्था की स्थिति को भी देखते हैं. इसलिए हालिया बढ़ोतरी से रियल एस्टेट की कुल मांग पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है. उनका मानना है कि त्योहारी सीजन के दौरान पिछले कुछ समय से प्रॉपर्टी तलाश रहे गंभीर खरीदार अपने फैसले को आगे बढ़ा सकते हैं. वहीं, डेवलपर्स के लिए बाजार की जरूरत के अनुसार सही प्रोजेक्ट और बेहतर ऑफर तैयार करना महत्वपूर्ण होगा.

घर की जरूरत और लंबी अवधि का नजरिया बाजार को दे रहा सहारा

रेपो रेट में बदलाव के बावजूद रेजिडेंशियल रियल एस्टेट की बुनियादी मांग मजबूत बनी हुई है. खासकर ऐसे शहरों में जहां रोजगार के अवसर और इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां घर खरीदने की जरूरत ब्याज दरों के असर को कुछ हद तक संतुलित कर सकती है.

नॉर्थविंड एस्टेट्स के चेयरमैन मनोज कुमार गर्ग ने कहा कि महंगाई के दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच रेपो रेट में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन घरों की मांग अभी भी मजबूत है. उनके मुताबिक, लोग घर खरीदने का फैसला लंबे समय के नजरिए से कर रहे हैं और अर्थव्यवस्था पर भरोसा भी मांग को बनाए हुए है. त्योहारी सीजन में रेजिडेंशियल बाजार के स्थिर रहने की उम्मीद है.

इसी तरह एसकेए ग्रुप के डायरेक्टर संजय शर्मा का कहना है कि घरों की लगातार मांग, लोगों की बढ़ती आकांक्षाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूती दे रहा है. उन्होंने कहा कि खरीदार अब अच्छी गुणवत्ता, बेहतर प्लानिंग वाली सोसाइटी और लंबे समय में बेहतर वैल्यू देने वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं.

खरीदार को क्या देखना चाहिए?

एपेक एकरेज प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर करण खन्ना के अनुसार, रेपो रेट में बढ़ोतरी का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक अपनी लोन दरों में कितना बदलाव करते हैं. उनका कहना है कि खरीदारों को अपनी बजट क्षमता के साथ-साथ लोकेशन और भविष्य में मिलने वाली वैल्यू को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए. बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर वाले इलाकों में आवासीय मांग आगे भी बनी रहने की उम्मीद है.

वहीं अग्रशील इंफ्रा की सीईओ प्रेक्षा सिंह का कहना है कि ब्याज दर बढ़ने से होम लोन थोड़ा महंगा हो सकता है और इसका असर संवेदनशील खरीदारों पर पड़ सकता है. लेकिन तेजी से बढ़ते शहर, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और लोगों का भरोसा आवासीय मांग को बनाए रखने में मदद कर रहे हैं. उनके मुताबिक, डेवलपर्स को ऐसे प्रोजेक्ट तैयार करने होंगे जो खरीदारों के बजट और जरूरत के अनुरूप हों तथा लंबे समय में अच्छी वैल्यू दें.

कमर्शियल और रिटेल सेक्टर में भी बड़ी चिंता नहीं

रेपो रेट का असर केवल घर खरीदने वालों तक सीमित नहीं है. कमर्शियल और रिटेल रियल एस्टेट भी ब्याज दरों के माहौल से प्रभावित होता है, लेकिन विशेषज्ञ यहां भी मांग को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं.

एम्बिएंस ग्रुप के डायरेक्टर अर्जुन गेहलोत के मुताबिक, कमर्शियल रियल एस्टेट की मांग ब्याज दरों की तुलना में उपभोक्ता खर्च, रिटेल कंपनियों के विस्तार और कारोबारी गतिविधियों से ज्यादा प्रभावित होती है. भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत रहने से रिटेल और कमर्शियल बाजार को आगे भी समर्थन मिलने की उम्मीद है.

स्पेक्ट्रम मेट्रो के वाइस प्रेसिडेंट (सेल्स एंड मार्केटिंग) अजेंद्र सिंह ने कहा कि ग्राहकों की बदलती जरूरतें, खर्च करने की क्षमता और बेहतर शॉपिंग अनुभव की मांग रिटेल सेक्टर को मजबूत कर रही है. ऐसे रिटेल डेस्टिनेशन जहां शॉपिंग के साथ फूड और मनोरंजन की सुविधाएं उपलब्ध हों, उन्हें आगे फायदा मिल सकता है.

Biigtech के प्रेसिडेंट आजाद अहमद लोन ने भी रिटेल और कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए सकारात्मक तस्वीर पेश की. उनके अनुसार, उपभोक्ता खर्च, कारोबार का विस्तार और अच्छी गुणवत्ता वाली कमर्शियल जगहों की मांग इस सेक्टर को मजबूती दे रही है. अच्छी तरह मैनेज की जाने वाली कमर्शियल प्रॉपर्टीज में निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ रही है.

तो अभी खरीदें या इंतजार करें?

एक्सपर्ट्स की राय को देखें तो रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी अपने आप में घर खरीदने का फैसला टालने की पर्याप्त वजह नहीं है. अगर खरीदार की आय स्थिर है, डाउन पेमेंट की व्यवस्था है और EMI उसकी क्षमता के भीतर है, तो खरीदारी की जा सकती है. वहीं, जिन लोगों का बजट पहले से दबाव में है, उन्हें लोन की कुल लागत और EMI का दोबारा आकलन करना चाहिए. यानी फैसला सिर्फ इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि रेपो रेट बढ़ गया है. सही प्रॉपर्टी, सही कीमत, मजबूत लोकेशन और अपनी वित्तीय क्षमता का संतुलन इस समय घर खरीदने के फैसले का सबसे महत्वपूर्ण आधार हो सकता है.