धर्म एवं ज्योतिष न्यूज डेस्क, 17 सितंबर 2026: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का गोचर मनुष्य जीवन के साथ-साथ पूरी दुनिया पर गहरा प्रभाव डालता है। 18 सितंबर 2026 को शाम 04:44 बजे ग्रहों के सेनापति मंगल ग्रह मिथुन राशि से निकलकर अपनी नीच राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं। सामान्य नियम के अनुसार, जब कोई ग्रह अपनी नीच राशि में जाता है तो वह कमजोर हो जाता है, लेकिन इस बार गोचर मंडल में एक दुर्लभ और अत्यंत शक्तिशाली ज्योतिषीय घटना घटने जा रही है - मंगल का नीच भंग राजयोग! यह राजयोग 18 सितंबर से शुरू होकर 12 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। आइए समझते हैं कि यह राजयोग कैसे बन रहा है और आपकी राशि व दुनिया पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा:-
नीच भंग राजयोग किस प्रकार निर्मित हो रहा है?
वैदिक ज्योतिष में Dispositor Theory और उच्च-नीच ग्रहों के नियमों के अनुसार जब कोई नीच ग्रह अपनी शक्ति खोता है, लेकिन कुछ विशेष योगों से उसकी स्थिति में सुधार होकर वह अत्यधिक शुभ फल देने लगता है, तो उसे 'नीच भंग राजयोग' कहते हैं। इस बार कर्क राशि में यह योग निम्नलिखित कारणों से निर्मित हो रहा है:
1. मंगल का नीच होना: मंगल ग्रह कर्क राशि में नीच राशि के माने जाते हैं, जहाँ वे अपनी स्वाभाविक आक्रामकता में असहज होते हैं।
2. देवगुरु बृहस्पति का उच्च होना: कर्क राशि देवगुरु बृहस्पति की उच्च राशि है और वर्तमान गोचर में गुरु पहले से ही कर्क राशि में विराजमान हैं।
3. युति और नीच भंग नियम: ज्योतिष शास्त्र का नियम है कि यदि नीच का ग्रह (मंगल) जिस राशि में बैठा हो, उसी राशि में उस भाव में उच्च होने वाला ग्रह (गुरु) भी साथ बैठा हो, तो नीचत्व पूरी तरह समाप्त (भंग) हो जाता है।
4. गुरु-मंगल का शुभ प्रभाव: उच्च के गुरु और नीच के मंगल की इस प्रत्यक्ष युति से 'नीच भंग राजयोग' के साथ-साथ एक बेहद शुभ 'गुरु-मंगल योग' बन रहा है। यहाँ गुरु अपनी आध्यात्मिक व सकारात्मक ऊर्जा से मंगल के उग्र स्वभाव को नियंत्रित कर उसे सही दिशा प्रदान करेंगे।
वैश्विक स्तर और आम जनजीवन पर प्रभाव
अग्नि तत्व के कारक मंगल और जल तत्व की राशि कर्क के मिलन से दुनिया भर में कुछ मिश्रित और दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे:
- शुरुआती दिनों में आम जनता में अधीरता और जल्दबाजी में फैसले लेने की प्रवृत्ति दिख सकती है।
- गुरु की संगति के कारण वैश्विक संकटों में भी बुद्धिजीवियों, नीतियों और सही निर्णयों के बल पर समाधान का रास्ता निकलेगा।
- रियल एस्टेट, भूमि-भवन, निर्माण (Construction) और धातुओं के व्यापार में तेजी और बड़े ढांचागत सुधार देखने को मिलेंगे।
- जल तत्व की राशि में मंगल की उपस्थिति के कारण कुछ देशों या क्षेत्रों में मौसम में अचानक बदलाव या भारी वर्षा/जल से जुड़े घटनाक्रम संभव हैं।
12 राशियों के लिए मंगल के गोचर फलित
मेष राशि - चौथा भाव
• फल: लग्न स्वामी मंगल का नीच भंग होना आपके आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि करेगा।
• प्रभाव: भूमि, भवन या नया वाहन खरीदने के प्रबल योग हैं। माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा। कार्यक्षेत्र में स्थिति मजबूत होगी, हालांकि घर में भाषा पर संयम रखें।
वृषभ राशि - तीसरा भाव
• फल: पराक्रम, साहस और भाई-बहनों के सहयोग में वृद्धि होगी।
• प्रभाव: निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी। यदि छोटे भाई-बहनों से मनमुटाव था तो गुरु के प्रभाव से दूर होगा। छोटी-छोटी यात्राओं से धन लाभ और करियर में नए अवसर मिलेंगे।
मिथुन राशि - दूसरा भाव
• फल: धन और वाणी के भाव में यह योग उत्तम आर्थिक लाभ कराएगा।
• प्रभाव: लंबे समय से फंसा हुआ धन वापस मिल सकता है। पैतृक संपत्ति के विवाद सुलझेंगे। बोलते समय थोड़ा संयम रखें ताकि परिवार में शांति बनी रहे।
कर्क राशि - पहला भाव (लग्न)
• फल: यह राजयोग आपकी ही राशि में बन रहा है, जिससे आपको सबसे अधिक लाभ मिलेगा।
• प्रभाव: सामाजिक मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में भारी वृद्धि होगी। लंबे समय से अटके काम पूरे होंगे। गुरु-मंगल की युति से आपके व्यक्तित्व में तेज और सौम्यता दोनों देखने को मिलेगी।
सिंह राशि - बारहवां भाव
• फल: खर्चों में वृद्धि होगी, लेकिन विदेश से लाभ के योग बनेंगे।
• प्रभाव: कोर्ट-कचहरी या पुराने विवादों में आपकी विजय होगी। धार्मिक कार्यों या विदेश यात्रा पर धन खर्च होगा। अपनी सेहत का थोड़ा ध्यान रखें।
कन्या राशि - ग्यारहवां भाव
• फल: आर्थिक उन्नति के लिए यह गोचर वरदान साबित होगा।
• प्रभाव: आय के नए स्रोत बनेंगे और रुकी हुई इच्छाएं पूरी होंगी। बड़े भाई-बहनों व मित्रों का पूरा सहयोग मिलेगा। व्यापार में कोई बड़ी और लाभदायक डील फाइनल हो सकती है।
तुला राशि -दसवां भाव
• फल: कार्यक्षेत्र बड़ी सफलता और पद-प्रतिष्ठा का योग।
• प्रभाव: नौकरी में प्रमोशन, इंक्रीमेंट या नई नौकरी के बेहतरीन अवसर मिलेंगे। राजनीति, प्रशासन या मैनेजमेंट से जुड़े लोगों को बड़ा पद मिल सकता है। पिता से संबंध बेहतर होंगे।
वृश्चिक राशि - नौवां भाव
• फल: भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा।
• प्रभाव: राशि स्वामी मंगल का भाग्य स्थान में नीच भंग होना आपके रुके कार्यों को रफ्तार देगा। उच्च शिक्षा या विदेश जाने के रास्ते खुलेंगे। आध्यात्मिक यात्राओं के योग बनेंगे।
धनु राशि - आठवां भाव
• फल: मिले-जुले परिणाम, अचानक धन लाभ की संभावना।
• प्रभाव: रिसर्च, गुप्त विद्याओं या अचानक से बीमा/वसीयत के जरिए लाभ हो सकता है। हालांकि, वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें।
मकर राशि - सातवां भाव
• फल: वैवाहिक जीवन और पार्टनरशिप के व्यापार में सुधार।
• प्रभाव: जीवनसाथी के साथ चल रहे मतभेद खत्म होंगे। बिजनेस पार्टनरशिप में बड़ा मुनाफा हो सकता है। समाज में आपका प्रभाव और दायरा बढ़ेगा।
कुंभ राशि- छठा भाव
• फल: शत्रुओं पर विजय और कर्ज से मुक्ति।
• प्रभाव: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता मिलेगी। पुराने विरोधियों पर आपकी जीत होगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा और पुराना कर्ज चुकाने में सफल रहेंगे।
मीन राशि- पांचवां भाव
• फल: शिक्षा, संतान और प्रेम-संबंधों के लिए बेहतरीन समय।
• प्रभाव: विद्यार्थियों के लिए एकाग्रता बढ़ेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलेगा। शेयर बाजार या लॉटरी से सोच-समझकर निवेश करने पर आकस्मिक धन लाभ हो सकता है।
विशेष परामर्श
गोचर के सामान्य प्रभाव के साथ-साथ आपकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में मंगल व गुरु की स्थिति और वर्तमान में चल रही महादशा/अंतर्दशा का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। इस राजयोग का पूर्ण शुभ फल प्राप्त करने के लिए अपनी कुंडली के अनुसार हनुमान जी की आराधना या गुरु ग्रह के मंत्रों का जप करना लाभदायक रहेगा। प्रस्तुति: श्री गीतांजलि ज्योतिष केंद्र, इंदौर।
