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एक जैसे नहीं होते सभी लिवर के सभी रोग, जानिए फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस के लक्षण, कारण और इलाज में अंतर
World Hepatitis Day: लिवर हमारे शरीर का बेहद महत्वूर्ण अंग है। जिसकी सेहत का ख्याल रखना हमारी जिम्मेदारी है। आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस के मौके पर हम आपको बताएंगे फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस के बारे में विस्तार से...
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एक जैसे नहीं हैं लिवर के सभी रोग!
World Hepatitis Day: लिवर की सेहत से जुड़े सवाल हम शायद ही कभी खुद से पूछते हैं। हालांकि इसकी वजह भी साफ है- क्योंकि दिल की धड़कन महसूस होती है, फेफड़ों की सांस का एहसास होता है, लेकिन लिवर चुपचाप अपना काम करता रहता है। यही कारण है कि इसे अक्सर 'साइलेंट वर्कर' कहा जाता है। यह तब तक शिकायत नहीं करता, जब तक इसे बहुत ज्यादा नुकसान न हो गया हो।
यही वजह है कि हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस (World Hepatitis Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सिर्फ हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना भी है कि लिवर की हर बीमारी हेपेटाइटिस नहीं होती है। आज भी बड़ी संख्या में लोग फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस को एक ही बीमारी समझ लेते हैं, जबकि तीनों की प्रकृति, कारण, इलाज और खतरे अलग-अलग हैं।
फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस लिवर की तीन अलग-अलग (Liver Health) मेडिकल कंडीशन हैं। जिन्हें अक्सर लोग एक जैसा समझ लेते हैं। इसको लेकर हमने बात की H.O.P.E Oncology, New Delhi के Director डॉ. अमिश वोरा से, डॉक्टर कहते हैं कि 'सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मरीज लिवर की हर समस्या को एक जैसा मान लेते हैं। जबकि समय रहते सही जांच और सही पहचान हो जाए तो कई गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।'
आज World Hepatitis Day के मौके पर समझते हैं कि आखिर इन तीनों बीमारियों में क्या अंतर है और किस हेल्थ कंडीशन में आपको बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
लिवर - शरीर का महत्वपूर्ण अंग
आपने कभी सोचा है कि शरीर में सबसे ज्यादा मेहनत करने वाला अंग कौन-सा है? जवाब है - लिवर। यह सिर्फ खाना पचाने में ही मदद नहीं करता, बल्कि शरीर में होने वाली सैकड़ों रासायनिक प्रक्रियाओं को भी नियंत्रित करता है। जो भी खाना हम खाते हैं, जो दवाएं लेते हैं या जो विषैले तत्व शरीर में पहुंचते हैं, उन्हें प्रोसेस करने का सबसे बड़ा काम लिवर ही करता है।
लिवर ऊर्जा को स्टोर करता है, पित्त (Bile) बनाता है, खून को साफ करता है, प्रोटीन तैयार करता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि जब लिवर बीमार पड़ता है तो उसका असर सिर्फ एक अंग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे शरीर पर दिखाई देता है।
फैटी लिवर
कुछ साल पहले तक फैटी लिवर को शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा पूरी तरह बदल चुकी है। आज बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी फैटी लिवर से जूझ रहे हैं जिन्होंने कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया। हालांकि आज इसकी सबसे बड़ी वजह हमारी बदलती लाइफस्टाइल बन रही है।दिनभर ऑफिस की कुर्सी पर बैठना, जंक फूड खाना, मीठे पेय पीना, रात देर तक जागना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी ये सभी आदतें धीरे-धीरे लिवर में एक्सट्रा फैट जमा करने लगती हैं। जब यह चर्बी एक सीमा से ज्यादा हो जाती है तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है।
सबसे चिंता की बात यह है कि फैटी लिवर की शुरुआत में कोई साफ संकेत नहीं दिखाई देता है। यही कारण है कि इससे पीड़ित व्यक्ति खुद को पूरी तरह फिट समझता रहता है, जबकि लिवर के भीतर नुकसान शुरू हो चुका होता है। कई बार केवल हेल्थ चेकअप या अल्ट्रासाउंड के दौरान ही इसका पता चलता है।
फैटी लिवर के शुरुआती संकेत
सबसे बड़ी समस्या यही है कि शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखते। हालांकि धीरे-धीरे कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं। जबकि कई बार यह बीमारी केवल हेल्थ चेकअप या अल्ट्रासाउंड में पता चलती है।
- लगातार थकान
- पेट के दाईं ओर भारीपन
- वजन बढ़ना
- कमजोरी
- भूख कम लगना
डॉ. अमीश वोरा बताते हैं कि फैटी लिवर को हल्के में लेना सबसे बड़ी गलती है। यदि समय रहते खानपान और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया तो यही बीमारी आगे चलकर लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस और आखिरकार सिरोसिस तक पहुंच सकती है।
हालांकि अच्छी बात यह है कि शुरुआती अवस्था में फैटी लिवर को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। इसके लिए बैलेंस डाइट , डेली एक्सरसाइज , वजन कम करना और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं।

फैटी लिवर
हेपेटाइटिस
विश्व हेपेटाइटिस दिवस (28 जुलाई) का उद्देश्य इसी बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक करना है। लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हेपेटाइटिस का मतलब लिवर में सूजन (Inflammation) है। यह अपने आप में कोई एक वायरस नहीं है। हेपेटाइटिस कई कारणों से हो सकता है। सबसे आम कारण वायरल संक्रमण हैं, जिन्हें हेपेटाइटिस A, B, C, D और E के नाम से जाना जाता है। इनमें से कुछ दूषित भोजन और पानी से फैलते हैं, जबकि कुछ संक्रमित खून, असुरक्षित यौन संबंध या संक्रमित सुई के जरिए फैल सकते हैं।
यही वजह है कि हेपेटाइटिस की पहचान केवल लक्षण देखकर नहीं की जा सकती है। इसके लिए डॉक्टर की सलाह पर खून की जांच कराना जरूरी होता है।
हेपेटाइटिस के लक्षण
हेपेटाइटिस के कई मरीजों में लंबे समय तक कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ मरीजों में लक्षण दिख सकते हैं। जिसमें-
- पीलिया
- बुखार
- भूख कम लगना
- मतली और उल्टी
- गहरे रंग का पेशाब
- शरीर में दर्द
- अत्यधिक थकान
डॉ. अमीश वोरा कहते हैं कि हेपेटाइटिस बी और सी जैसे संक्रमण लंबे समय तक बिना इलाज के रहने पर सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकते हैं। इसलिए जोखिम वाले लोगों को समय-समय पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए।
क्या हेपेटाइटिस जानलेवा होता है?
डॉ. अमीश वोरा एक शब्द में इसका जवाब देते हैं- नहीं। डॉक्टर कहते हैं कि यही सबसे बड़ा भ्रम है। कुछ प्रकार के हेपेटाइटिस, जैसे हेपेटाइटिस A और E के ज्याादातर मामलों में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। वहीं हेपेटाइटिस B और C लंबे समय तक शरीर में बने रह सकते हैं और धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आज कई प्रकार के वायरल हेपेटाइटिस का प्रभावी इलाज उपलब्ध है और हेपेटाइटिस B से बचाव के लिए वैक्सीन भी मौजूद है। इसलिए समय पर जांच और उपचार बेहद महत्वपूर्ण है।

हेपेटाइटिस
सिरोसिस
कल्पना कीजिए कि किसी सड़क पर बार-बार गड्ढे पड़ते रहें और हर बार उसकी मरम्मत के बजाय उस पर सीमेंट की मोटी परत चढ़ा दी जाए। कुछ समय बाद सड़क अपनी मूल स्थिति खो देती है। सिरोसिस में लिवर के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। जब कई सालों तक लिवर को लगातार नुकसान पहुंचता रहता है, तो उसकी हेल्दी कोशिकाओं की जगह कठोर दागदार ऊतक बनने लगते हैं। इस प्रक्रिया को सिरोसिस कहा जाता है। यह बीमारी अचानक नहीं होती, बल्कि यह अक्सर फैटी लिवर, लंबे समय तक शराब के सेवन या क्रोनिक हेपेटाइटिस के बाद विकसित होती है।
सिरोसिस के लक्षण
- पेट में पानी भरना
- पैरों में सूजन
- तेजी से वजन घटना
- लगातार कमजोरी
- त्वचा और आंखों का पीला होना
- खून की उल्टी
- बार-बार संक्रमण
- भ्रम या याददाश्त प्रभावित होना
डॉ. अमीश वोरा के अनुसार, सिरोसिस में लिवर को हुआ नुकसान पूरी तरह वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन समय पर इलाज शुरू कर इसके नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सिरोसिस
युवाओं में क्यों बढ़ रहे लिवर रोग?
पहले माना जाता था कि लिवर की बीमारियां केवल अधिक उम्र के लोगों को होती हैं, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। एक्स्पर्ट के अनुसार 25 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है आधुनिक जीवनशैली। घंटों तक लैपटॉप के सामने बैठना, बाहर का खाना, तनाव, कम नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी लिवर को धीरे-धीरे प्रभावित कर रही है।
युवाओं में एक और बड़ी समस्या यह है कि वे तब तक जांच नहीं कराते जब तक बीमारी गंभीर न हो जाए। इसलिए यदि परिवार में डायबिटीज, मोटापा या लिवर रोग का इतिहास है तो नियमित हेल्थ चेकअप को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
लिवर की इन तीन बीमारियों में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
| बीमारी | मुख्य समस्या | सबसे आम कारण | क्या शुरुआती अवस्था में सुधर सकती है? |
|---|---|---|---|
| फैटी लिवर | लिवर में चर्बी जमा होना | मोटापा, डायबिटीज, खराब लाइफस्टाइल | हां |
| हेपेटाइटिस | लिवर में सूजन | वायरल संक्रमण, शराब, दवाएं | कई मामलों में हां |
| सिरोसिस | लिवर में स्थायी स्कार बनना | लंबे समय तक लिवर की क्षति | नुकसान पूरी तरह नहीं मिटता |
लिवर के लिए कौन-सी जांचें जरूरी हैं?
ऐसे तो हर एक बीमारी की जांच के लिए अलग-अलग तरह की जांच की जाती है, लेकिन डॉक्टर जरूरत के अनुसार ये जांचें लिख सकते हैं। ध्यान रखें कि सिर्फ इंटरनेट पढ़कर बीमारी का अंदाजा लगाना सही नहीं है।
- Liver Function Test (LFT)
- Ultrasound
- FibroScan
- Hepatitis Profile
- Viral Marker Test
- CT Scan या MRI
- कुछ मामलों में Liver Biopsy
क्या है डॉक्टर की सलाह?
डॉ. अमीश वोरा कहते हैं, "लिवर की बीमारियों को पहचानने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि लक्षणों का इंतजार न किया जाए। यदि किसी व्यक्ति को मोटापा, डायबिटीज, शराब का अधिक सेवन, वायरल हेपेटाइटिस का जोखिम या परिवार में लिवर रोग का इतिहास है, तो उसे नियमित रूप से लिवर की जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान ही सबसे प्रभावी इलाज है।"
World Hepatitis Day का संदेश
विश्व हेपेटाइटिस दिवस केवल हेपेटाइटिस के प्रति जागरूकता का दिन नहीं है, बल्कि यह हमें अपने पूरे लिवर स्वास्थ्य के बारे में सोचने का अवसर भी देता है। फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस तीनों अलग-अलग बीमारियां हैं और इन्हें एक नजर से देखना गंभीर भूल हो सकती है। अच्छी बात यह है कि इनमें से कई समस्याओं को समय रहते पहचाना जाए तो उनकी प्रगति रोकी जा सकती है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।