बांग्लादेश को बड़ा झटका, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दिया इस्तीफा, जानें क्यों बीच में ही छोड़ा कार्यकाल

Published on 24 जुल॰ 2026

बांग्लादेश को बड़ा झटका, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दिया इस्तीफा, जानें क्यों बीच में ही छोड़ा कार्यकाल

राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई 2026 को संविधान के आर्टिकल 50(3) के तहत संसद के अध्यक्ष को पत्र सौंपकर इस्तीफा दे दिया है. उनका कार्यकाल साल 2028 में समाप्त होने वाला था.

Written By : कार्तिक सागर समाधिया |  Updated at : 24 Jul 2026 05:41 PM (IST)

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

बांग्लादेश को बड़ा झटका लगा है. वहां के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई 2026 को संविधान के आर्टिकल 50(3) के तहत संसद के अध्यक्ष को पत्र सौंपकर इस्तीफा दे दिया है. उनका कार्यकाल साल 2028 में समाप्त होने वाला था. यानी उनका कार्यकाल लगभग आधा ही बीता था. 

खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर दिया इस्तीफा

बंगाली भाषा में उन्होंने एक पत्र लिखा है. बंगभवन के लेटर हेड पर 76 साल के शाहबुद्दीन ने खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि हार्ट से जुड़ी समस्या, हाई ब्लडप्रेशर, शुगर, गुर्दे की समस्याएं, पहले हुई बाईपास सर्जरी और हाल ही में ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथ का निदान, जिसके कारण उन्हें बेहोशी के दौरे पड़ते हैं. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले ट्रीटमेंट के कारण इस पद पर बने रहना असंभव है. अगस्त 2024 के विद्रोह के बाद उत्पन्न संवैधानिक संकट से देश को उबारने में उन्होंने अपने योगदान का बचाव भी इस पत्र में किया है. 

अब राष्ट्रपति का यह इस्तीफा संसदीय स्पीकर हाफिजुद्दीन अहमद को सौंपा जाएगा. यह बांग्लादेश के संविधान के अनुसार नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम करेंगे. प्रवक्ता ने बताया कि वह इस इस्तीफे पर किसी तरह की आधिकारिक टिप्पणी नहीं कर सकते. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उनका इस्तीफा ऐसे वक्त आया है, जब अटकले लगाई जा रहीं थी कि पीएम तारिक रहमान की सरकार देश के Titular Head से सहज नहीं थी.

हसीना सरकार में बने थे राष्ट्रपति
दरअसल, 1971 के मुक्ति संग्राम के पूर्व सैनिक और लोअर कोर्ट के पूर्व जज शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए शपथ ली थी. उन्होंने पिछली संसद ने इस सर्वोच्च पद के लिए चुना था. वे एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं, जो अभी भी संवैधानिक पद पर बने हुए हैं. जुलाई-अगस्त 2024 में स्टूडेंट के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने हसीना की अवामी लीग सरकार को गिरा दिया था. हसीना भारत आ गई थीं. वह 5 अगस्त 2024 से भारत की शरण में हैं.

नवंबर 2025 एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर कंसल्टेंट अपनी भूमिका निभा रहा हूं. मीडिया का अनुभव करीबन साढ़े 8 साल का है. देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं. पिछले कुछ सालों में बतौर मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर, कंटेंट एडिटर, सब एडिटर और रिजनल टीवी चैनल में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. लेखन, ग्राफिक्स और वीडियो प्रोडक्शन की बारीक समझ है. नेशनल-इंटरनेशनल डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुका हैं. मजा ग्राउंड या एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कवर करने में आता है. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा. साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना, कहानियां-कविताएं लिखना और घूमना विशेष रुचियों में दर्ज है.

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Published at : 24 Jul 2026 04:51 PM (IST)

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