दिव्यांग बच्चों के साथ मारपीट, डीसी को सौंपा ज्ञापन
July 24, 2026

Violence against disabled children : मंडी। सराज विधानसभा की ग्राम पंचायत भाटकीधार में बीते दिनों दलित समाज के दो दिव्यांग बच्चों के साथ जो मारपीट हुई है। उस पर जल्द से जल्द कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
दिव्यांग बच्चों से मारपीट पर फूटा गुस्सा
इसी मुद्दे के लिए जिला कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर में भारतीय दलित साहित्य अकादमी का प्रतिनिधिमंडल डीसी से मिला और डीसी के माध्यम से ज्ञापन भी प्रदेश सरकार को भेजा गया। ज्ञापन में मांग रखी गई कि जिस तरह से बच्चों के साथ मारपीट की गई और उनका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल किया गया। यह पूरी तरह से निंदनीय है। ऐसे में इस प्रकरण में जो भी शामिल है। उन पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। अखिल भारतीय दलित साहित्य अकादमी के जिला उपप्रधान महेंद्र सिंह ने बताया कि पूरे भारत वर्ष की जनता आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने पर आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रही है। लेकिन दलित साहित्य अकादमी कुल्लू इन घटनाओं से पूर्णतया आहत है। उन्होंने कहा कि जिला मंडी सराज के कुलथनी क्षेत्र ग्राम पंचायत भाटकीधार का जो मामला है। वहां दिव्यांग भाईओं के साथ रात को बन्धक बनाकर मारपीट की गई और बुरी तरह से दिव्यांग बच्चों को पीटा गया तथा जातीय अत्याचार किया गया।
दिव्यांग भाइयों से मारपीट पर कार्रवाई की मांग
महेंद्र सिंह ने बताया कि इस दौरान यह पाया गया है कि कुलथनी/भाटकीधार/सराची क्षेत्र में सामान्य वर्ग की एक गैंग सक्रिय है।।जो अनुसूचित जाति के लोगों व बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रही है। उसकी वीडिओ भी सोशल मीडिया पर डालते हैं और बाद में डिलीट करते हैं। उस दिन भी दो दिव्यांग भाईओं को पूरी रात बंधक बनाकर पीटा गया। इससे पहले इन्हें स्कूल में भी 2 सालों से प्रताड़ित किया जा रहा था। महेंद्र सिंह का कहना है कि दलित साहित्य अकादमी के उपप्रधान महेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों भाईओं में से एक को तो इतनी बेरहमी से पीटा गया। जिसे अब इलाज के लिए PGI रैफर किया गया है। दोनों भाई सफेद मोतियाबिन्द के मरीज हैं और बिना लैंस के इनको दिखता नहीं है, लेकिन कथित मारपीट की FIR में भी आनाकानी की जा रही है और इस कृत्य ने दलित समाज के साथ-साथ पूरी मानवता को भी शर्मसार किया है।
लीला भारद्वाज बताती हैं कि अकादमी इसकी कठोर निन्दा व भर्त्सना करती है तथा दोषी को सज़ा देने की मांग करती है। अकादमी से जुड़ी लीला भारद्वाज का कहना हैं कि ऐसे अमानवीय कृत्यों में संलिप्त व्यक्तियों को कठोर से कठोर सज़ा दी जाए, ताकि ऐसी संकीर्ण सोच वाले भविष्य में ऐसी पशुता की पुनरावृति न कर सके। इन्हें नियमों के तहत दंडित किया जाए। ताकि भविष्य में ऐसे अपराधियों को नसीहत मिले तथा समाज में आपसी भाईचारा, सद्भावना और एकता कायम रह सके ।