मुंबई, 26 अक्टूबर (भाषा) वित्तीय सेवा उद्योग के दिग्गज उदय कोटक ने सोमवार को कहा कि भारत को विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) यानी एफएनसीआर(बी) के जरिये जुटाई गई जमा राशि पर 160 अरब डॉलर से अधिक का भुगतान करना होगा।
उन्होंने नीति-निर्माताओं से तीन से पांच साल में पुनर्भुगतान के मोर्चे पर पहुंचने के दौरान रणनीतिक नजरिया अपनाने का आग्रह किया।
कोटक ने यहां वार्षिक ‘बिजनेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट्स समिट’ में सोने के अत्यधिक वित्तीयकरण से जुड़े जोखिमों का जिक्र भी किया, जिसके चलते देश में इस बहुमूल्य धातु का आयात बढ़ रहा है और बाहरी संतुलन पर जोखिम पैदा हो रहा है।
रियायती स्वैप सुविधा के तहत प्रवासी भारतीयों से एफएनसीआर(बी) जमा के लिए जुटाए गए 133 अरब डॉलर को मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक अच्छा बीमा करार देते हुए, कोटक ने इसके पुनर्भुगतान के लिए तैयार रहने की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जब आज से 3-5 साल के बीच वह मौका आएगा, तो हमें ब्याज सहित 160-170 अरब डॉलर से अधिक का भुगतान जमाकर्ताओं को करना होगा।
कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक और गैर-कार्यकारी निदेशक कोटक ने कहा, ‘‘चुकाने का समय आएगा। हमें आज इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन हमें इस बात को लेकर रणनीतिक नजरिया रखना चाहिए कि हम उस समय के लिए भारत की आर्थिक संरचना और वित्तीय संरचना का निर्माण कैसे करें, जो वक्त अनिवार्य रूप से आएगा।’’
उन्होंने कहा कि भारत ने एफएनसीआर(बी) योजना के समय का बिल्कुल सही चयन किया क्योंकि अमेरिकी बॉण्ड पर प्रतिफल के पांच प्रतिशत के आंकड़े को छूने से कुछ दिन पहले यह योजना समाप्त हो गई, और जोड़ा कि वर्ना हमारे कोष जुटाने की लागत एक प्रतिशत अधिक होती।
उन्होंने कहा, ''कुछ लोगों ने एफएनसीआर(बी) को एक 'स्टेरॉयड' कहा है, लेकिन मैं इसे एक मजबूत बीमा पॉलिसी के रूप में देखता हूं।''
कोटक ने कहा कि भारतीय मानक प्रतिफल की तुलना में अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल में उछाल ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि दोनों के बीच ब्याज दर का अंतर कम हो गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए कोटक ने कहा कि यह कदम पर्याप्त नहीं है, और लंबे समय के लिए नीति-निर्माताओं से अधिक काम की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा, ''हमें अपनी कर संरचनाओं, अपनी ब्याज दर संरचनाओं, अपनी पूंजीगत लाभ संरचनाओं के बारे में सोचने की जरूरत है क्योंकि हम रुपये में इक्विटी निवेशकों को तो ला सकते हैं लेकिन विदेशी निवेशक डॉलर में बाहर निकलता है।'' उनकी यह टिप्पणी रुपये में गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारी बिकवाली के बीच आई।
भाषा पाण्डेय अजय
अजय
Web Title: विदेशी मुद्रा जमा एक अच्छा बीमा, पुनर्भुगतान के लिए रणनीतिक नजरिये की जरूरत: उदय कोटक