ये कैसा विकास: हर नए प्लान के साथ पुराने शहर की समस्याएं आगे खिसकती रहीं - Bhopal News

Published on 22 अक्टू॰ 2026

ये कैसा विकास:हर नए प्लान के साथ पुराने शहर की समस्याएं आगे खिसकती रहीं

भोपाल18 मिनट पहले

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लंबे इंतजार के बाद मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट जारी हो गया, लेकिन शहर की 50 साल पुरानी समस्याएं जस की तस हैं। भारत टॉकीज की आरा मशीनें, छोला-स्टेशन क्षेत्र का कबाड़खाना और पुराने शहर का थोक कारोबार आज भी आबादी के बीच हैं।

इन्हें 1975 में मंजूर पहले मास्टर प्लान में ही बाहर ले जाने की बात कही गई थी। इस दौरान प्लानिंग एरिया 241.40 वर्ग किमी से बढ़कर 1,016 वर्ग किमी यानी चार गुना से ज्यादा हो गया, लेकिन इन कारोबारों की शिफ्टिंग का मामला नहीं सुलझा।

हर नए मास्टर प्लान में शहर के विस्तार के लिए जमीन बढ़ती रही, लेकिन पुराने शहर की समस्याओं का समाधान टलता रहा। कुछ कारोबार हटे ही नहीं, कुछ बाहर गए तो शहर फिर उनके आसपास पहुंच गया। कई उद्योग शिफ्ट करने से पहले बंद हो गए।

मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में आउटर लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित हैं, लेकिन पुराने कारोबारों को कब, कहां और कैसे शिफ्ट किया जाएगा, इसका स्पष्ट रोडमैप नहीं है। पहले के प्लान की तरह गतिविधिवार शिफ्टिंग सूची और समयसीमा भी नहीं दी गई है।

आरा मशीनें: मेट्रो के लिए हटाने की तैयारी, पर शिफ्टिंग अटकी

1975 के प्लान में भारत टॉकीज क्षेत्र की आरा मशीनों को आबादी से बाहर ले जाने का प्रस्ताव था। 2005 के प्लान में इन्हें फिर टिंबर मार्केट में शिफ्ट करने की सूची में रखा गया। आज इस इलाके में 100 से अधिक आरा मशीनें हैं।

मेट्रो में बाधा बन रही करीब 40 आरा मशीनों को छोटा रातीबड़ ले जाने की योजना बनी, लेकिन शिफ्टिंग अब तक अटकी है। भारी मात्रा में लकड़ी का भंडारण, संकरी सड़कें और आसपास घनी आबादी होने से आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं।

थोक बाजार: बाहर मंडियां बनीं, पुराने शहर पर दबाव कायम... करोंद में मंडी बनाई गई, लेकिन जुमेराती, मंगलवारा और हनुमानगंज जैसे पुराने बाजारों से थोक गतिविधियां खत्म नहीं हुईं। भीड़ के कारण यातायात प्रभावित होता है।

स्लॉटर हाउस: शिफ्ट नहीं हुआ, नया प्लांट भी बंद... जहांगीराबाद-जिंसी के स्लॉटर हाउस को शहर से बाहर ले जाने की योजना थी। आदमपुर छावनी में

कबाड़खाना : कारोबार बाहर ले जाने की कोशिश, लेकिन वहीं फैलता गया

पुराने शहर के कबाड़ी कारोबार को बाहर ले जाने के लिए छोला क्षेत्र में कैटेगराइज्ड मार्केट विकसित किया गया। मंगलवारा का कबाड़ी कारोबार वहां शिफ्ट हुआ, लेकिन छोला-स्टेशन क्षेत्र का कबाड़खाना आज भी बड़ी समस्या है।

आसपास आबादी बढ़ने के साथ स्क्रैप कारोबार, भारी वाहनों की आवाजाही, सड़क पर फैला सामान और आग का खतरा बढ़ गया है। जिस शिफ्टिंग से पुराने शहर को राहत मिलनी थी, उसने दूसरे इलाके में वही परेशानी खड़ी कर दी। यानी समस्या खत्म नहीं हुई, सिर्फ उसका पता बदल गया।

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