बुलेट ट्रेन परियोजना: सिग्नलिंग बदलाव से भारत-जापान सहयोग पर असर की आशंका, पूर्व जापानी सलाहकार ने उठाए सवाल| Navbharat Live

Published on 17 जुल॰ 2026

बुलेट ट्रेन परियोजना: सिग्नलिंग बदलाव से भारत-जापान सहयोग पर असर की आशंका, पूर्व जापानी सलाहकार ने उठाए सवाल

  • Written By:

    आलोक उमाकृष्ण

Updated On: Jul 17, 2026 | 05:54 PM IST

विज्ञापन

सार

Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में जापानी शिंकानसेन की जगह यूरोपीय सिग्नलिंग अपनाने पर पूर्व जापानी सलाहकार ने सवाल उठाए। आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार।

Bullet Train Shinkansen Signalling Row Mumbai Ahmedabad Project

बुलेट ट्रेन परियोजना (सोर्स: AI)

विस्तार

India Japan Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की तकनीक को लेकर नई बहस छिड़ गई है। भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना से पूर्व में जुड़े जापानी इंजीनियर व सलाहकार हिदेकी माकिहारा ने शिंकानसेन की मूल जापानी DS-ATS सिग्नलिंग प्रणाली के बजाय यूरोपीय ETCS-L2 प्रणाली अपनाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उनका दावा है कि शिंकानसेन ट्रेनें और उनकी मूल सिग्नलिंग प्रणाली एक-दूसरे से अविभाज्य हैं। इस बदलाव का असर परियोजना के तकनीकी ढांचे के साथ-साथ भारत-जापान के भविष्य की हाई-स्पीड रेल सहयोग पर भी पड़ सकता है। हालांकि, माकिहारा के इन दावों पर अब तक परियोजना से जुड़े अधिकारियों की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई हैं।

हिदेकी माकिहारा का दावा

हिदेकी माकिहारा ने जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की भारत यात्रा के बाद अपने ब्लॉग और सोशल मीडिया मंच एक्स पर दावा किया कि परियोजना के दौरान भारतीय पक्ष ने कई बार निर्णय और रुख बदले, जिससे इसकी प्रगति प्रभावित हुई। उन्होंने सबसे गंभीर चिंता सिग्नलिंग प्रणाली को लेकर जताते हुए कहा कि जनवरी 2025 की निविदा में पूरे कॉरिडोर के लिए ईटीसीएस-एल2 प्रणाली का उल्लेख है।

सम्बंधित ख़बरें

उनके अनुसार, यदि यही प्रणाली लागू हुई तो जापान की पारंपरिक डीएस-एटीसी प्रणाली के लिए कोई स्थान नहीं बचेगा। माकिहारा का कहना है कि शिंकानसेन केवल ट्रेन नहीं, बल्कि ट्रेन, सिग्नलिंग, नियंत्रण और परिचालन की एकीकृत तकनीक है। ऐसे में एक ही कॉरिडोर पर दो अलग-अलग सिग्नलिंग प्रणालियां साथ नहीं चल सकतीं और यह बदलाव 2015 के भारत-जापान हाई-स्पीड रेल सहयोग समझौते की मूल भावना के विपरीत है।

स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन पर भी जताए संदेह

पूर्व जापानी सलाहकार ने स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेट योजना पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बीईएमएल के पास मेट्रो कोच निर्माण का अनुभव है, लेकिन 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हाई-स्पीड ट्रेनों का नहीं। उन्होंने आशंका जताई कि महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए यूरोपीय कंपनियों पर निर्भरता बढ़ सकती है और प्रस्तावित बी28 ट्रेनसेट की तय समयसीमा में डिजाइन, निर्माण, परीक्षण व प्रमाणन पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण होगा।

डिपो डिजाइन पर भी सवाल

माकिहारा का दावा है कि परियोजना के डिपो जापान की ई5 शिंकानसेन ट्रेनों के अनुरूप डिजाइन किए गए हैं। ऐसे में भविष्य में भारतीय डिजाइन की ट्रेनें चलने पर रखरखाव और तकनीकी अनुकूलता की चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

दो ट्रेनसेट देने का दावा

उन्होंने दावा किया कि जापान ने परीक्षण, चालक प्रशिक्षण और निरीक्षण के लिए दो शिंकानसेन ट्रेनसेट निःशुल्क देने की पेशकश की थी, लेकिन जापानी सिग्नलिंग प्रणाली नहीं अपनाने के बाद यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।

यह भी पढ़ेः- सानिध्य डोंगरे बने NEET UG 2026 में मुंबई सिटी टॉपर, 700 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंकिंग में 28 वां स्थान

परियोजना पर काम जारी

508 किमी लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर निर्माण कार्य जारी है। जापानी तकनीक आधारित इस परियोजना में 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलाने की योजना है। हालांकि, सिग्नलिंग को लेकर उठे सवालों पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

Follow Navbharatlive whatsapp