आगरा: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी स्थित स्वामी विवेकानंद परिसर में शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बैनर तले ‘अराजकता रोको-लोकतंत्र अपनाओ’ (Stop Anarchy – Embrace Democracy) अभियान के तहत एक विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। दोपहर 12:30 बजे स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा के समीप आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने देश के लोकतंत्र, संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे अहम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने का पुरजोर संकल्प लिया।
देशव्यापी आह्वान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने देश में बढ़ती अराजकता, हिंसा और असहिष्णुता की प्रवृत्तियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति, संवाद और वैचारिक मतभेदों के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए, लेकिन किसी भी प्रकार के विरोध को शांतिपूर्ण और पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से ही उठाया जाना चाहिए, न कि हिंसा के माध्यम से।
लोकतंत्र की मजबूती में युवाओं की भूमिका सर्वोपरि
धरने को संबोधित करते हुए छात्र नेताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि देश का युवा वर्ग केवल भविष्य का निर्माता ही नहीं, बल्कि वर्तमान में भी मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की धुरी है। उन्होंने आह्वान किया कि युवाओं को संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक होकर किसी भी प्रकार की अराजकता और हिंसा का डटकर विरोध करना चाहिए। स्वामी विवेकानंद के महान विचारों का स्मरण करते हुए छात्रों ने कहा कि युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और यदि इस ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दी जाए, तो समाज में लोकतांत्रिक चेतना, स्वस्थ संवाद और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकता है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पूर्ण अनुशासन और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखकर लोकतंत्र की रक्षा का सामूहिक संदेश दिया।
‘अराजकता किसी भी समाज के विकास का मार्ग नहीं हो सकती’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत सह मंत्री पुनीत कुमार ने कहा कि अराजकता और उपद्रव कभी भी किसी सभ्य समाज के विकास का रास्ता नहीं बन सकते। उनके अनुसार, केवल लोकतंत्र ही वह एकमात्र सशक्त माध्यम है, जिसके जरिए राष्ट्र को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज का जागरूक युवा अराजकता की संस्कृति को सिरे से नकारते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मर्यादाओं को अपनाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। उनके इस वक्तव्य को कार्यक्रम के मुख्य संदेश के रूप में देखा गया, जिसमें युवाओं से हिंसा से दूर रहने की अपील की गई।
‘विश्वविद्यालय ज्ञान और संवाद का केंद्र हैं’
विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष शिवम कोली ने अपने संबोधन में कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान और विश्वविद्यालय परिसर केवल किताबी शिक्षा हासिल करने की जगह नहीं हैं, बल्कि ये ज्ञान, बौद्धिक संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों के सृजन व विकास के मुख्य केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों की यह भारी एकजुटता इस बात का स्पष्ट संदेश है कि छात्र शक्ति हर हाल में अराजकता के विरोध और लोकतंत्र के पक्ष में चट्टान की तरह खड़ी है। उन्होंने सभी छात्रों से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में बढ़-चढ़कर भाग लेने और संविधान प्रदत्त मूल्यों के प्रति सदैव जागरूक रहने का आह्वान किया।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के जरिए दिया गया कड़ा संदेश
विश्वविद्यालय इकाई मंत्री रचित यादव ने इस पूरे प्रदर्शन को पूरी तरह अनुशासित, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक करार दिया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को संविधान के प्रति सजग करना और समाज में अराजकता फैलाने वाली ताकतों का लोकतांत्रिक तरीके से प्रतिकार करना था। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपने हाथों में तख्तियां लेकर नारों और सामूहिक संकल्प के माध्यम से अपनी बात रखी।
‘अराजकता रोको-लोकतंत्र अपनाओ’ राष्ट्रीय अभियान के तहत आगरा के इस परिसर में हुए इस आयोजन के अंत में सभी छात्र-छात्राओं ने लोकतंत्र की रक्षा, संवैधानिक मर्यादाओं को मजबूत करने और अराजकता के खिलाफ अहिंसक व शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखने का सामूहिक संकल्प दोहराया।
ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद
इस अनुशासित एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन में विभाग संगठन मंत्री रजत जोशी, शिवांग खंडेलवाल, नितिन दुबे, अश्वनी इंदौलिया, विवेक सिंह, ललित चौधरी, जीतू चौधरी, हर्षवर्धन, जितेन्द्र चौधरी, ध्रुव, अनिरुद्ध, विनय और धीरू यादव सहित तमाम संगठनात्मक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।