'नाना पाटेकर ने प्रोड्यूसर से पैसे दिलवाए, पत्नी की बीमारी में दिया साथ,' जिगरी दोस्त को यादकर भावुक हुए शिवाजी साटम

Published on 16 अक्टू॰ 2026

फिल्मों में खलनायक बनकर लोगों के छक्के छुड़ाने वाले नाना पाटेकर असल जिंदगी में अपने दोस्तों के लिए किसी ढाल से कम नहीं थे. उनकी दोस्ती में प्यार भी था, हक भी और जरूरत पड़ने पर सामने वाले की क्लास लगाने का दम भी. अब CID के मशहूर ACP प्रद्युमन यानी शिवाजी साटम ने नाना को याद करते हुए ऐसे किस्से सुनाए हैं, जिन्हें सुनकर आप भी भावुक हो जाएंगे. करीब 40 साल की दोस्ती, करियर बनाने में मदद और मुश्किल वक्त में भाई की तरह साथ निभाने वाले नाना का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जो पर्दे पर उनके किरदारों से बिल्कुल अलग था.

‘नाना ने प्रोड्यूसर को दो घंटे तक खड़ा रखा’

मुंबई के प्रभादेवी स्थित पी.एल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी परिसर में नाना पाटेकर की याद में ‘आठवणीतले नाना’ नाम से एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई. यहां फिल्मी दुनिया के कई लोग उन्हें याद करने पहुंचे. इसी दौरान शिवाजी साटम ने अपने पुराने दोस्त से जुड़े कुछ ऐसे किस्से साझा किए, जो उनकी दोस्ती की गहराई बताते हैं.

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शिवाजी ने बताया कि नाना के कहने पर ही उन्होंने हिंदी फिल्मों में काम करना शुरू किया था. उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘यशवंत’ थी, जिसमें उन्हें एक पुलिस अधिकारी का रोल मिला था. शुरुआत में शिवाजी यह किरदार निभाने के लिए तैयार नहीं थे. लेकिन नाना ने उन्हें समझाया और आखिरकार वह फिल्म करने के लिए मान गए.

कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आया, जब नाना को पता चला कि शिवाजी को फिल्म के लिए कितने पैसे मिले हैं. दोस्त को कम पैसे मिलने की बात सुनकर वह नाराज हो गए. शिवाजी ने उनसे कहा भी कि प्रोड्यूसर से इस बारे में बात न करें, लेकिन नाना कहां मानने वाले थे.

शिवाजी के मुताबिक, नाना ने प्रोड्यूसर को बुलाया और करीब दो घंटे तक खड़ा रखा. उन्होंने इसकी तुलना स्कूल में मिलने वाली सजा से करते हुए बताया कि जैसे शिक्षक बच्चों को खड़ा कर देते थे, वैसे ही नाना ने प्रोड्यूसर को खड़ा रखा. बेचारे प्रोड्यूसर बिना कुछ कहे खड़े रहे. दोस्त के हक के लिए नाना का यह अंदाज बताता है कि वह दोस्ती निभाने में भी किसी से पीछे नहीं थे.

पत्नी को कैंसर हुआ तो नाना बने सबसे बड़ा सहारा

नाना पाटेकर और शिवाजी साटम की दोस्ती सिर्फ फिल्मों और पैसों तक सीमित नहीं थी. शिवाजी ने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर का जिक्र करते हुए बताया कि जब वह ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ की शूटिंग कर रहे थे, उसी दौरान उनकी पत्नी को कैंसर होने का पता चला.

घर में इतनी बड़ी परेशानी आने के बाद शिवाजी के लिए फिल्म की शूटिंग जारी रखना मुश्किल हो गया था. वह फिल्म छोड़ने तक के बारे में सोचने लगे थे. लेकिन नाना ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा.

शिवाजी के मुताबिक, नाना ने फिल्म के निर्देशक पार्थो घोष और बाकी लोगों से बात की, ताकि शूटिंग का ऐसा समय तय हो सके जिसमें वह काम के बाद घर लौटकर अपनी पत्नी के साथ रह सकें. इसके बाद उन्हें दोपहर 12 बजे बुलाने और रात 8 बजे तक छोड़ने का इंतजाम किया गया.

शिवाजी ने भावुक होकर कहा कि नाना ने उनके लिए इतना कुछ किया, जितना शायद उनका अपना भाई भी नहीं कर पाता. उन्होंने नाना को एक सच्चा दोस्त और भाई बताया, जिसने मुश्किल समय में उनका हाथ थामे रखा.

कभी भी फोन करके बुला लेते थे नाना

शिवाजी ने बताया कि नाना का दोस्ती निभाने का तरीका भी बिल्कुल अलग था. वह अचानक फोन करके पूछ लेते थे कि क्या कर रहे हो और फिर सीधे अपने फार्म पर आने के लिए कह देते थे.

उनकी यही बेफिक्री और अपनापन दोस्तों को उनसे जोड़े रखता था. शिवाजी के लिए नाना सिर्फ एक शानदार अभिनेता नहीं, बल्कि ऐसे इंसान थे जो जरूरत पड़ने पर अपने दोस्तों के लिए हर हद तक जाने को तैयार रहते थे.

करीब चार दशक पुरानी दोस्ती को याद करते हुए शिवाजी ने माना कि नाना ने उनके जीवन और करियर पर गहरा असर डाला. उनकी बातों से साफ था कि यह विदाई उनके लिए किसी सहकर्मी को खोने भर की नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसे दोस्त को खोने की थी.

75 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गए नाना पाटेकर

नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 की सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा स्थित उनके घर पर उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि दिल की मुख्य कोरोनरी धमनी में खून का थक्का जमने से हृदय तक रक्त की आपूर्ति रुक गई थी, जिसके कारण हार्ट अटैक आया.

नाना के जाने से फिल्म इंडस्ट्री ने एक दमदार अभिनेता खो दिया, लेकिन शिवाजी साटम के किस्से बताते हैं कि उनके चाहने वालों ने सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक ऐसा दोस्त भी खोया जो दूसरों के लिए खड़ा होना जानता था.

नाना पाटेकर की असली विरासत शायद यही थी- पर्दे पर दमदार अभिनय और असल जिंदगी में अपनों के लिए बेपनाह अपनापन.

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