लद्दाख में शुरू हुआ भारत का सबसे व्यावसायिक लिलियम फूलों का खेत, किसानों और महिला समूहों को मिलेगा नया रोजगार
इस परियोजना को CSIR-इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी , पालमपुर के वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग से विकसित किया जा रहा है.
Published byJalaj Kumar Mishra
इस परियोजना को CSIR-इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी , पालमपुर के वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग से विकसित किया जा रहा है.
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केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भारत के सबसे ऊंचाई पर स्थित व्यावसायिक लिलियम फूलों के खेत के विकास की शुरुआत हो गई है. लेह के चोगलामसर में सिंधु नदी के किनारे विकसित किए जा रहे इस फ्लोरीकल्चर प्रोजेक्ट का उद्देश्य किसानों, स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों के लिए आय के नए और टिकाऊ स्रोत तैयार करना है.
करीब 3,265 मीटर की ऊंचाई पर विकसित हो रहा यह फ्लावर फील्ड देश का सबसे ऊंचाई पर स्थित संगठित व्यावसायिक फूलों का पार्क होगा. इससे पहले उत्तराखंड के माणा में 3,200 मीटर की ऊंचाई पर भारत का सबसे ऊंचाई वाला फ्लावर फील्ड मौजूद है. करीब 93,000 वर्गमीटर क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट में पिछले तीन दिनों के दौरान 50 हजार से अधिक प्रीमियम लिलियम बल्ब लगाए जा चुके हैं. इन फूलों की पहली खेप सितंबर के पहले सप्ताह तक खिलने की उम्मीद है.
इस परियोजना को CSIR-इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी , पालमपुर के वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग से विकसित किया जा रहा है. इस परियोजना की आधारशिला 22 जून 2026 को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने रखी थी.
इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊंची कीमत पाने वाले प्रीमियम लिलियम फूलों और कलियों का उत्पादन कर लद्दाख के किसानों के लिए आय का नया स्रोत तैयार करना है. यह परियोजना केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के "सहकार से समृद्धि" विजन के अनुरूप सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में भी अहम कदम मानी जा रही है.
फूलों की मार्केटिंग में भी सहयोग
योजना के तहत पहले वर्ष कृषि विभाग इस फ्लावर फील्ड का विकास करेगा और फूल खिलने के बाद इसे चयनित SHGs और सहकारी समितियों को सौंप देगा. विभाग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फूलों की मार्केटिंग में भी सहयोग करेगा. अगले वर्ष से सहकारी समितियां स्वयं लिलियम की व्यावसायिक खेती, कटाई और वैल्यू एडिशन का कार्य संभालेंगी.
विशेषज्ञों के अनुसार लद्दाख की ठंडी जलवायु लिलियम की खेती के लिए बेहद अनुकूल है. -4 डिग्री से 4 डिग्री सेल्सियस तापमान में इसके बल्ब बेहतर विकसित होते हैं. खास बात यह है कि तीन वर्षों के भीतर लिलियम के बल्ब स्वतः बढ़ने लगते हैं, जिससे बिना अतिरिक्त निवेश के उत्पादन और किसानों की आय दोनों में वृद्धि संभव होगी.
आय के नए अवसर पैदा होंगे
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि लद्दाख की जलवायु, जिसे अक्सर चुनौती माना जाता है, वास्तव में क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत है. व्यावसायिक लिलियम खेती के जरिए किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए आय के नए अवसर पैदा होंगे तथा लद्दाख को देश के प्रमुख हाई-एल्टीट्यूड फ्लोरीकल्चर हब के रूप में विकसित किया जाएगा. साथ ही यह फ्लावर पार्क पर्यटन के लिए भी नया आकर्षण बनेगा.
घरेलू बाजार में प्रीमियम लिलियम फूल की कीमत 150 से 200 रुपये प्रति स्टिक तक होती है और इसकी लंबी शेल्फ लाइफ के कारण राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फ्लोरिकल्चर और हॉस्पिटैलिटी उद्योग में इसकी काफी मांग रहती है.
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