भारतीय युवाओं को साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए बिस्मटेक देशों ने उठाया बड़ा कदम, अमित शाह की मौजूदगी में बनी सहमति

Published on 16 अक्टू॰ 2026

भारतीय युवाओं को साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए बिस्मटेक देशों ने उठाया बड़ा कदम, अमित शाह की मौजूदगी में बनी सहमति

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

भारत सरकार साइबर स्लेवरी के विदेशी अड्डों को ध्वस्त करने की तैयारी में है,जहां भारतीय युवाओं को नौकरी का लालच देकर ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए मजबूर किया जाता है. म्यांमार, बर्मा, कंबोडिया और मलेशिया जैसे देशों के साथ Common Protocol बनाने पर सहमति बनी है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बिम्सटेक (BIMSTEC) देशों के साथ ये अहम समझौता हुआ.

13 अक्टूबर को नई दिल्ली में अमित शाह की अध्यक्षता में पहली BIMSTEC देशों के गृह मंत्रियों की बैठक हुई. इसमें सीमा पार अपराध, मानव तस्करी और साइबर अपराध से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. इनमें खुफिया इनपुट साझा करना, साझा कंट्रोल रूम और नौकरी लगाने वाले एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है.बैठक के बाद दिल्ली घोषणा-पत्र भी अपनाया गया.

बिस्मटेक देशों के साथ इन मुद्दों पर बनी सहमति

संयुक्त टीमों का विदेश दौरा: यूपी, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों (जैसे I4C) की संयुक्त टीमें जल्द ही इन देशों का दौरा कर वहां की एजेंसियों के साथ जमीनी खुफिया इनपुट साझा करेंगी.

साझा डेटाबेस और कंट्रोल रूम: विदेश में नौकरी के नाम पर फंसे युवाओं और वहां गिरफ्तार अपराधियों का एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है. इसके साथ ही त्वरित कार्रवाई के लिए संबंधित देशों के साथ एक साझा कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाएगा.

पासपोर्ट रद्दीकरण और सख्त कानून: युवाओं को झूठा झांसा देकर विदेश भेजने वाले घरेलू एजेंटों और सिंडिकेट पर नकेल कसने के लिए सीबीआई (CBI) और एनआईए (NIA) सक्रिय हैं, और इन एजेंटों के पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

पिछले 2 सालों में हजारों युवकों का रेस्क्यू

हालांकि, पिछले दो सालों में किए गए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों और रेस्क्यू ऑपरेशन्स के जरिए कंबोडिया और म्यांमार के स्कैम कंपाउंड्स (Scam Compounds) से हजारों भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. पिछले साल तक कंबोडिया से 2265, लाओ से 2290 और म्यांमार से 2165 साइबर स्लेवरी से पीड़ित युवकों को विदेश मंत्रालय ने मुहिम चलाकर रेस्क्यू किया है.

वहीं, अब दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय साइबर स्लेवरी नेटवर्क के खिलाफ भारत अब BIMSTEC देशों के साथ मिलकर कार्रवाई और पीड़ितों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था मजबूत करेगा. सरकार को उम्मीद है कि यह नई रणनीति भारत में बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ और वित्तीय साइबर फ्रॉड को रोकने में भी बेहद कारगर साबित होगी.

पासपोर्ट और दस्तावेज छीन लिए जाते हैं

दरअसल, साइबर स्लेवरी में युवाओं को अवैध रूप से बंधक बनाकर जबरन साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी करवाई जाती है. पीड़ितों को अक्सर नौकरी का लालच देकर धोखे से दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ले जाया जाता है. वहां पहुंचने पर उनके पासपोर्ट और दस्तावेज छीन लिए जाते हैं और हिंसा या प्रताड़ना का डर दिखाकर उनसे गैरकानूनी काम कराए जाते हैं.

Amod Rai

Amod Rai

21 सालों से राजनीतिक, सामाजिक और पॉलिसी संबंधित विषयों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव। लगातार 2 दशक से बीजेपी, संघ परिवार, संसद और केंद्र सरकार की खबरों पर विशेष निगाह

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