अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध, तेल की कीमतों और अमेरिका में महंगाई को लेकर कई दावे किए हैं। ट्रंप ने कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।
ट्रंप ने महंगाई और 'अफोर्डेबिलिटी' के मुद्दे पर डेमोक्रेटिक पार्टी को निशाना बनाया और दावा किया कि उनके प्रशासन ने कीमतों को नीचे लाने का काम किया है। उनके इन दावों के बीच अमेरिका में ईंधन की कीमतों और ईरान युद्ध के आर्थिक असर को लेकर बहस जारी है।
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ट्रंप ने कहा कि 'अफोर्डेबिलिटी' यानी चीजों को लोगों की पहुंच में रखना, यह शब्द डेमोक्रेट्स ने दिया है। उन्होंने बहुत बड़ी समस्या पैदा की और इतिहास की सबसे खराब महंगाई दी। हमने तो सिर्फ कीमतों को कम करने का काम किया है।
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'युद्ध खत्म होते ही तेल की कीमतें गिरेंगी'
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि जब ईरान के साथ युद्ध खत्म होगा, जो बहुत जल्द होने वाला है, तो तेल की कीमतें तेजी से नीचे आ जाएंगी। ईरान संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। हाल ही में जी-7 देशों ने बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच बाजार में 10 करोड़ बैरल तेल और रिफाइंड ईंधन जारी करने की योजना की घोषणा की है।
'ईरान के पास कभी नहीं होगा परमाणु हथियार'
ट्रंप ने अपने बयान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी स्पष्ट रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि सबसे पहली बात यह है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा। क्योंकि वे पागल हैं। यह काम दूसरे राष्ट्रपतियों को वर्षों पहले ही कर देना चाहिए था या किसी दूसरे देश को करना चाहिए था। ट्रंप पहले भी यह दावा कर चुके हैं कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का प्रमुख उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। अगस्त में भी उन्होंने कहा था कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।
महंगाई पर डेमोक्रेट्स को घेरा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'अफोर्डेबिलिटी' के मुद्दे पर डेमोक्रेट्स की आलोचना करते हुए कहा कि यह शब्द उनकी पार्टी की ओर से इस्तेमाल किया गया और उनके मुताबिक, पिछली नीतियों ने महंगाई की समस्या पैदा की। ट्रंप ने दावा किया कि उनके प्रशासन ने कीमतों को कम करने के लिए काम किया है। हालांकि, अमेरिका में महंगाई और जीवन-यापन की लागत को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। हालिया रिपोर्टों में ईरान युद्ध और ऊर्जा कीमतों के असर को अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बताया गया है।
ईरान की सैन्य क्षमता पर भी बोले ट्रंप
ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता का जिक्र करते हुए कहा कि उसके पास नौसेना, वायुसेना, रडार और एंटी-एयरक्राफ्ट क्षमता नहीं है। उन्होंने इन दावों के आधार पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। ट्रंप ने कहा कि उनका उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। ईरान की ओर से हालांकि अमेरिकी दावों और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। हाल में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने ट्रंप के बयानों और अमेरिका की नीतियों की आलोचना की थी।
तेल की कीमतों पर क्यों टिकी नजर?
ईरान युद्ध का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति और प्रमुख समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बढ़ी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है। ट्रंप लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि संघर्ष खत्म होने के बाद तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि, तेल की कीमतें युद्ध की स्थिति के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति, मांग, समुद्री परिवहन और बाजार की प्रतिक्रिया जैसे कई कारकों पर निर्भर करती हैं। हालिया घटनाक्रम में G7 की ओर से बाजार में अतिरिक्त तेल और ईंधन जारी करने की घोषणा भी इसी दबाव के बीच हुई है।