जैश से लेकर लश्कर तक... जम्मू-कश्मीर बन रहा आतंकियों की कब्रगाह, कैसे कामयाब हुआ नलिन प्रभात का ऑपरेशन मंत्र

Published on 30 सित॰ 2026

जैश से लेकर लश्कर तक… जम्मू-कश्मीर बन रहा आतंकियों की कब्रगाह, कैसे कामयाब हुआ नलिन प्रभात का ऑपरेशन मंत्र

डीजीपी नलिन प्रभात Image Credit source: TV9

जम्मू-कश्मीर में दो साल पहले तस्वीर कुछ और थी. जम्मू संभाग के घने जंगल आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन चुके थे. Jaish-e-Mohammed और Lashkar-e-Taiba के विदेशी आतंकी जंगलों में छिपकर सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले कर रहे थे. एक हमले के बाद आतंकी जंगलों में गायब हो जाते और सुरक्षा बलों के सामने उन्हें तलाशना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता था. लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है.

जिस जम्मू के जंगलों में कभी आतंकी सुरक्षा बलों को चुनौती दे रहे थे, आज उन्हीं जंगलों में सुरक्षा बल आतंकियों का पीछा कर रहे हैं. Jaish और Lashkar के कई बड़े कमांडर मारे जा चुके हैं, उनके ऑपरेशनल नेटवर्क को लगातार बड़े झटके लगे हैं और बचे हुए आतंकी अब एक जगह टिककर ऑपरेशन करने की स्थिति में नहीं हैं.

इसी बदली हुई रणनीति को DGP नलिन प्रभात की एक लाइन में समझा जा सकता हैः You Can Run, But You Cant Hide. यानी आतंकी भाग सकते हैं, अपना ठिकाना बदल सकते हैं, एक जंगल से दूसरे जंगल में जा सकते हैं, लेकिन सुरक्षा बलों से छिप नहीं सकते. यही जम्मू-कश्मीर पुलिस की नई ऑपरेशनल सोच का सार बन चुका है.

2024 में नलिन प्रभात ने संभाली थी कमान

जब 2024 में नलिन प्रभात को जम्मू-कश्मीर पुलिस की कमान सौंपी गई, तब जम्मू जोन में आतंकवाद एक बड़ी चुनौती बन चुका था. कठुआ, उधमपुर, डोडा, किश्तवाड़, राजौरी और पुंछ के जंगलों में विदेशी आतंकियों की मौजूदगी थी. सुरक्षा बलों पर हमले हो रहे थे और आतंकी पहाड़ी और जंगल वाले इलाकों का फायदा उठाकर लंबे समय तक छिपने में कामयाब हो रहे थे.

नलिन प्रभात को जम्मू-कश्मीर भेजे जाने के पीछे सबसे बड़ी वजह उनका ऑपरेशनल अनुभव था. Greyhounds से लेकर CRPF के Kashmir operations और NSG की कमान तक, उनका पूरा करियर counter-insurgency और high-risk operations से जुड़ा रहा है. 1 अक्टूबर 2024 को उन्होंने जम्मू-कश्मीर के DGP का पद संभाला. इसके बाद ऑपरेशन को आतंकियों के इलाके तक ले जाने की रणनीति पर जोर दिया गया.

जानें किस तरह तोड़ी आंतकियों की कमर

जंगलों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाई गई. Army, CRPF और Jammu-Kashmir Police के बीच coordination मजबूत किया गया. आतंकियों के ठिकानों, movement और support network पर intelligence-based operations तेज किए गए. और इसका असर जम्मू के जंगलों में दिखाई देने लगा. नलिन प्रभात के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने कई बड़े ऑपरेशनों में Jaish और Lashkar के आतंकियों को ढेर किया.

आतंकियों पर कहर बनकर टूटे नलिन प्रभात

26 जून 2025 को उधमपुर के बसंतगढ़ इलाके में Jaish commander Haider मारा गया. 23 जनवरी 2026 को कठुआ के बिलावर इलाके में Jaish commander Abu Maviya को सुरक्षा बलों ने मार गिराया. 24 फरवरी 2026 को Operation Trashi के दौरान किश्तवाड़ में Jaish commander Saifullah समेत दो अन्य आतंकी मारे गए. 5 सितंबर 2026 को बडगाम में Lashkar terrorist Yasir मारा गया. 17 सितंबर 2026 को उधमपुर के मजालता इलाके में Jaish terrorists Saddam और Mustafa ढेर किए गए. 29 सितंबर 2026 को बडगाम के युसमर्ग इलाके में Hasim Mussa alias Fouji को सुरक्षा बलों ने मार गिराया.

Operation Mahadev से ढूढें आतंकी

इन कार्रवाइयों ने साफ कर दिया कि सुरक्षा बल अब आतंकियों के ठिकानों तक पहुंचकर उनके कमांड और ऑपरेशनल नेटवर्क को निशाना बना रहे हैं. लेकिन नलिन प्रभात की कमान का सबसे बड़ा ऑपरेशनल टेस्ट कश्मीर में हुआ.

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने हमले में शामिल आतंकियों को तलाशने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया. इसी अभियान का बड़ा परिणाम था Operation Mahadev.

28 जुलाई 2025 को Dachigam के दुर्गम जंगलों में Army, CRPF और Jammu-Kashmir Police की संयुक्त कार्रवाई में Lashkar-e-Taiba के तीन विदेशी आतंकी जिब्रान, सुलेमान और हमजा अफगानी मारे गए. इन आतंकियों को पहलगाम आतंकी हमले से जोड़कर देखा गया था.

आतंकी भाग सकता है, लेकिन छिप नहीं सकता

Operation Mahadev ने संदेश साफ कर दिया कि कश्मीर के जंगल अब आतंकियों के लिए सुरक्षित sanctuary नहीं हैं. आतंकी भाग सकता है, लेकिन छिप नहीं सकता. यही रणनीति जम्मू जोन में भी दिखाई दी. जहां कभी आतंकी जंगलों में dominant दिखाई देते थे, अब वही आतंकी लगातार दबाव में हैं. उनके बड़े कमांडर और विदेशी ऑपरेशनल कैडर लगातार मारे गए हैं. Jaish और Lashkar के कई महत्वपूर्ण कमांडरों के सफाए के बाद इन संगठनों की जमीन पर ऑपरेशनल क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है.

आतंकी अब जंगल छोड़ भाग रहे

अब हालात ऐसे हैं कि जो आतंकी कभी जंगलों को अपनी ताकत समझते थे, वे उन्हीं जंगलों में अपनी जान बचाने के लिए एक इलाके से दूसरे इलाके में भागने को मजबूर हैं. एक जंगल से दूसरे जंगल तक भागना, लगातार ठिकाना बदलना, सुरक्षा बलों से बचना और स्थानीय नेटवर्क के सहारे जिंदा रहने की कोशिश करना बताता है कि आतंकियों की operational dominance कमजोर हुई है.

जंगल और ऊंची चोटी पर बैठे हुए आतंकियों को कमजोर करने के लिए सुरक्षा बलों की तरफ से टेंपरेरी ऑपरेटिव बेस TOB तैयार किए गए जो 24 घंटे 365 दिन ऊंची चोटियों से जंगल के इलाके में नजर रख रहे थे.

आज सुरक्षाबल आंतकियों पर भारी

नलिन प्रभात की रणनीति का फोकस सिर्फ encounter में आतंकियों को खत्म करना नहीं रहा. आतंकियों के पूरे terror ecosystem को निशाना बनाया गया है. इसमें local support network, OGWs, हथियारों की सप्लाई, infiltration routes, hideouts और logistics chain पर कार्रवाई शामिल है. यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशनल दबाव लगातार बढ़ा है. कल तक आतंकी जंगलों में सुरक्षा बलों को तलाश रहे थे, आज सुरक्षा बल आतंकियों को तलाश रहे हैं.

आखिरी आतंकी के खात्मे तक ऑपरेशन जारी

कल तक आतंकी हमले के बाद जंगलों में गायब हो जाते थे, आज उनके लिए जंगल भी सुरक्षित नहीं हैं. और अब J&K Police का संदेश साफ है:You Can Run, But You Cant Hide. आतंकी चाहे कितनी भी दूर भागे, जंगल बदले या ठिकाना बदले, security grid उसका पीछा करती रहेगी. और जम्मू कश्मीर में आखिरी आतंकी के खात्मे तक सुरक्षा बलों के ऑपरेशन जारी है.

रमन सैनी

रमन सैनी

रमन सैनी एक वरिष्ठ टेलीविजन पत्रकार हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष में स्पेशल रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले इंडिया डेली लाइव में जम्मू कश्मीर ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. रमन सैनी ने अपने करियर के 15 वर्ष इंडिया टीवी के साथ बिताए. इसके बाद उन्होंने इंडिया डेली लाइव जॉइन किया, जहां से जम्मू कश्मीर की अहम रिपोर्टिंग का नेतृत्व किया. उनकी पत्रकारिता का मुख्य फोकस संघर्ष क्षेत्र, आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर रहा है. रमन सैनी ने आतंकवाद, सीमा पार घुसपैठ और लगातार होने वाली क्रॉस बॉर्डर फायरिंग की व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन हमला, दीनानगर पुलिस स्टेशन हमला जैसे बड़े आतंकी मामलों की कवरेज के अलावा उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर जैसी सैन्य कार्रवाइयों को भी कवर किया है.

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