पितृ पक्ष: पूर्वजों के मोक्ष और परम तृप्ति की संजीवनी विष्णु सहस्रनाम

Published on 27 सित॰ 2026

पितृ पक्ष में केवल अन्न, जल और वस्त्र का दान ही नहीं, बल्कि मंत्रों और भगवान श्री हरि के पवित्र नामों की दिव्य ऊर्जा भी हमारे पितरों तक सीधे पहुँचती है। सनातन धर्म में भगवान विष्णु को सम्पूर्ण सृष्टि का पालनहार और मोक्षदाता माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जब कोई वंशज पितृ पक्ष के पावन दिनों में भक्तिभाव से विष्णु सहस्रनाम का पाठ करता है और उसका पुण्य अपने पूर्वजों को अर्पित (दान) करता है, तो यमदूत भी उस आत्मा का मार्ग निष्कंटक कर देते हैं। आइए जानते हैं कि यह दिव्य पाठ किस प्रकार पितरों को प्रेत योनि व कष्टों से मुक्त कर वैकुंठ की ओर अग्रसर करता है।

1. पितृ पक्ष में श्री हरि पूजन का महत्व

गरुड़ पुराण के 'धर्मराज वचन' में यमराज स्वयं कहते हैं कि:

हरिस्मरणशीलानं तद् भक्तान् गच्छ मा प्रपो। 

तद् व्यतिरिक्त पापिनः आनयस्व ममाज्ञया॥

जो मनुष्य निरंतर अच्युत, अनंत और नारायण नाम का कीर्तन करता है, उसके या उसके पितरों के निकट यमदूत कभी कष्ट देने नहीं आते। पूर्वजन्मों के अनजाने पापों या अकाल मृत्यु के कारण कष्ट पा रही आत्माओं के कर्मों का शोधन भगवान विष्णु की पूजा से तुरंत संभव हो जाता है। श्राद्ध और तर्पण के साथ जब श्री हरि की आराधना की जाती है, तो देवता और पितर दोनों एक साथ तृप्त होकर परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

2. गरुड़ पुराण का मुख्य प्रमाण:

गरुड़ पुराण (पूर्वखण्ड, अध्याय 15) में भगवान शिव और विष्णुजी के संवाद में इस स्तोत्र की महिमा बताई गई है-

परेश्वरं परं ब्रह्म परमात्मानामव्ययम्। 

विष्णुं नामसहस्रेण स्तुवन्मुक्तो भवेन्नरः॥

अर्थ: जो मनुष्य परमेश्वर, परब्रह्म और अविनाशी भगवान विष्णु के एक हजार नामों से स्तुति करता है, वह सब दुखों से मुक्त होता है। 

जब यही पुण्य पितरों को समर्पित किया जाता है, तो उन्हें तत्काल मोक्ष मिलता है।

3. फल दान (पुण्य अर्पण) क्यों आवश्यक है?

भौतिक वस्तुएं सूक्ष्म रूप में पितरों तक पहुँचती हैं, लेकिन मंत्रों का पुण्य ऊर्जा स्वरूप में सीधे उन तक पहुँचकर उनकी चेतना को शांति प्रदान करता है और उन्हें निम्न योनियों से मुक्त कराता है।

4. पाठ एवं पुण्य दान की सरल विधि

1. समय व संकल्प

कुतुप मुहूर्त (11:30 AM - 12:30 PM) सर्वोत्तम

स्नान कर दक्षिण दिशा की ओर बैठें। हाथ में जल व अक्षत लेकर संकल्प करें: "मैं यह पाठ अपने पितरों (नाम लें) की शांति व मोक्ष हेतु कर रहा/रही हूँ।" जल भूमि पर छोड़ दें।

2. विष्णु सहस्रनाम पाठ: भगवान विष्णु के समक्ष गाय के घी का दीपक जलाएं और एकाग्रचित्त होकर पाठ करें या सुनें। संस्कृत या हिंदी अनुवाद।

3. पुण्य दान: पाठ के अंत में आरती करें। पुनः हाथ में जल लेकर कहें: "इस पाठ का संपूर्ण पुण्य फल मेरे पितरों को प्राप्त हो।" इस जल को किसी पौधे में विसर्जित कर दें।

5. समय की कमी में उपयोगी संपुट मंत्र

यदि पूरा पाठ संभव न हो, तो पितृ पक्ष में भगवान विष्णु के इन अमोघ मंत्रों का 108 बार जाप करके फल पितरों को दान करें:

• मोक्ष मंत्र: ॐ अच्युताय नमः, ॐ केशवाय नमः, ॐ अनंताय नमः

यही सनातन धर्म का सौंदर्य है जिसमें कहा गया है कि:

विद्या धनं सर्व धन प्रधानम्। 

अर्थात्‌ विद्या धन सभी धनों में श्रेष्ठ है। धनहीन व्यक्ति भी अपने ज्ञान के द्वारा अपने पितरों को सद्गति दिला सकता है केवल श्रद्धा और ज्ञान के बल पर। जब हम पितृ पक्ष में केवल तर्पण या श्राद्ध करते हैं, तो वह हमारी नैतिक जिम्मेदारी का निर्वाह होता है। लेकिन जब हम उसमें भगवान श्री हरि के विष्णु सहस्रनाम की दिव्य ध्वनि और पुण्य का संपुट जोड़ देते हैं, तो वह साधारण अनुष्ठान एक महा-मुक्ति का मार्ग बन जाता है। 

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय! 

प्रस्तुति: श्री गीतांजलि ज्योतिष केंद्र, इंदौर।