मंत्री मिलेंगे नहीं, विभाग की चिट्ठी लिखने पर आपत्ति:सरकार में व्यावसायिक प्रशिक्षकों को राज्य कार्यालय में सीधे पत्राचार से बर्दाश्त नहीं
भोपाल3 घंटे पहले
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मोहन सरकार में जल संसाधन मंत्री द्वारा विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों से बिना अनुमति मुलाकात का मामला ठंडा भी नहीं हो पाया था कि अब स्कूल शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा अभियान में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों (VTs) को राज्य कार्यालय या सीनियर अफसर को सीधे पत्र लिखने पर आपत्ति की है। विभाग ने कहा है कि व्यवसायिक प्रशिक्षक राज्य कार्यालय को सीधे पत्र नहीं लिख सकेंगे। विभाग के इस फैसले पर अस्थायी, आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा है कि अब सरकार बोलने पर भी प्रतिबंध लगा रही है।
दरअसल समग्र शिक्षा, लोक शिक्षण संचालनालय से शुक्रवार को जारी पत्र में कहा गया है कि व्यावसायिक प्रशिक्षक राज्य कार्यालय अथवा वरिष्ठ कार्यालय से सीधे पत्राचार न करें। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि समग्र शिक्षा व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति प्राधिकारी नहीं है। प्रशिक्षकों की नियुक्ति संबंधित VTPs (Vocational Training Providers) के माध्यम से की जाती है। ऐसे में प्रशिक्षकों से जुड़े दावों और प्रकरणों की जिम्मेदारी निर्धारित व्यवस्था के अनुसार संबंधित पक्षों की होगी। पत्र में कहा गया है कि VTs/VTC द्वारा अपनी समस्याओं, दावों या अन्य मामलों को लेकर राज्य कार्यालय या वरिष्ठ कार्यालय से सीधे पत्राचार किए जाने पर संबंधित कार्यालय द्वारा ऐसे अनुरोधों पर विचार नहीं किया जाएगा।
सभी संबंधित VTs को निर्देशित किया गया है कि किसी भी परिस्थिति में राज्य कार्यालय एवं वरिष्ठ कार्यालय से सीधे पत्राचार न करें। यह निर्देश प्रदेश में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब उन्हें अपनी शिकायत या दावे के लिए निर्धारित विभागीय प्रक्रिया और संबंधित VTP के माध्यम का पालन करना होगा।
क्या अब बोलने पर भी लगेगा प्रतिबंध- वासुदेव
इस मामले में अस्थायी आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि सरकारी स्कूलों के व्यावसायिक शिक्षकों (VTs) का शोषण कब बंद होगा? प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी कौशल शिक्षा योजना चलाई जा रही है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन स्कूलों में दिन-रात पढ़ा रहे व्यावसायिक प्रशिक्षकों (VTs) की आवाज को दबाया जा रहा है। समग्र शिक्षा अभियान (सेकेंडरी एजुकेशन), भोपाल द्वारा जारी ताज़ा पत्र में साफ कहा गया है कि कोई भी व्यावसायिक शिक्षक अपनी समस्याओं को लेकर सीधे राज्य कार्यालय या वरिष्ठ अधिकारियों से पत्राचार नहीं कर सकता।
शर्मा ने कहा कि जब ये शिक्षक सरकारी स्कूलों में सरकार के ही आदेशों और नियमों के अनुसार बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, तो क्या इन्हें अपनी बात सीधे विभाग के सामने रखने का अधिकार भी नहीं है? उन्होंने कहा कि अधिकारियों के इस तरह के रवैये से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों की ही छवि को नुकसान पहुंच रहा है। शर्मा के अनुसार शिक्षकों को थर्ड-पार्टी (VTPs) के भरोसे छोड़कर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री इस पर संज्ञान लें। अगर देश की रीढ़ कहे जाने वाले शिक्षकों का इस तरह मानसिक और प्रशासनिक शोषण होगा, तो प्रदेश का भविष्य कैसे सुधरेगा? आदेश वापस हो और व्यवसायिक शिक्षकों को उनका उचित अधिकार और सम्मान मिले।
जल संसाधन मंत्री नहीं करना चाहते कर्मचारियों, अधिकारियों से मुलाकात
इसके चौबीस घंटे पहले जल संसाधन विभाग का एक आदेश वायरल हो चुका है जिसमें सभी चीफ इंजीनियर और परियोजना संचालकों से कहा गया है कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारी कर्मचारी को यह समझा दें कि जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से बगैर अपाइंटमेंट के कोई नहीं मिल सकता है। अगर कोई अधिकारी कर्मचारी बगैर अनुमति मंत्री से मिलने पहुंच गया तो उस पर अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी।
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