भारत से संबंध, डोकलाम और चीन की रणनीति... जयशंकर का भूटान दौरा क्यों अहम?

Published on 17 सित॰ 2026

भारत से संबंध, डोकलाम और चीन की रणनीति… जयशंकर का भूटान दौरा क्यों अहम?

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर 16 से 18 सितंबर तक भूटान के दौरे पर हैं. भारत-भूटान के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि सुरक्षा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और विकास साझेदारी पर आधारित हैं. जयशंकर के दौरे में इसकी तस्वीर साफ दिखाई दी. एक तरफ 500 KW लुनाना जलविद्युत परियोजना की आधारशिला रखी गई, दूसरी तरफ 65-बेड मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल और जगनाथन ब्रिज का उद्घाटन हुआ.

भारत और भूटान की हाइड्रोपॉवर पार्टनरशिप 1967 से चली आ रही है. अब इसका विस्तार दूरदराज इलाकों तक बिजली पहुंचाने से लेकर हेल्थकेयर और इन्फ्रास्ट्रक्चर तक हो रहा है.

भारत ने भूटान के 13वें फाइव इयर प्लान के लिए 10000 करोड़ की विकास सहायता की प्रतिबद्धता की है. वहीं जुलाई 2026 में एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए 4,000 करोड़ की रियायती ऋण सुविधा भी दी गई.

कनेक्टिविटी भी बड़ा रणनीतिक स्तंभ है. कोकराझार-गेलेफु और बनारहाट-समत्से सीमा-पार रेल संपर्क पर काम आगे बढ़ रहा है, जिनकी कुल अनुमानित लागत करीब 4,033 करोड़ है.

चीन का भी अहम रणनीतिक पहलू

भारत के लिए भूटान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रणनीतिक पहलू भूटान-चीन सीमा वार्ता जारी हैं. दोनों देशों ने 2021 में थ्री स्टेप रोडमैप पर सहमति बनाई थी और मार्च-अप्रैल 2026 में बीजिंग में 15वीं विशेषज्ञ समूह की बैठक में बाउंड्री निगोशिएशन की प्रोगेस और परिसीमन-सीमांकन पर चर्चा हुई.

डोकलाम क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए भूटाम में भारत की मजबूत रणनीति और डेवलप पार्टनरशिप का महत्व और बढ़ जाता है. यानी जयशंकर का दौरा नाइबर फर्स्ट के साथ-साथ Indias Himalayan security, energy और connectivity interests के लिहाज से अहम है.

और यहीं चाइना फैक्टर आता है…

भूटान और चाइना के बीच बाउंड्री निगोशिएशन भी जारी हैं. दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता 1984 से चल रही है और 2021 में थ्री स्टेप रोडमैप के जरिए इसे तेज करने पर सहमति बनी थी.

इस साल 30 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक बीजिंग में 15वीं एक्सपर्ट ग्रुप मीटिंग हुई. दोनों पक्षों ने बाउंड्री निगोशिएशन में हुई प्रोगेस की समीक्षा की और थ्री स्टेप रोडमैप को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई. Joint Technical Team ने boundary delimitation और demarcation से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की.

भारत के लिए भूटान-चाइन बाउंड्री प्रोसेस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डोकलाम क्षेत्र भारत की सुरक्षा गणनाओं से सीधे जुड़ा हुआ है. 2017 में डोकलाम में भारत और चीन के सैनिकों के बीच लंबा सैन्य गतिरोध हुआ था.

इसलिए भूटाम में भारत की मजबूत डेवलपमेंट और कनेक्टिविटी की मौजूदगी का रणनीतिक पहलू भी है. भारत भूटान को सिर्फ आर्थिक मदद देने वाला पड़ोसी नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद strategic partner के रूप में देखता है.

शिवांग माथुर

शिवांग माथुर

शिवांग माथुर टीवी 9 भारतवर्ष में एसोसियेट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं.

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