Pakistan Saudi Arabia: सऊदी पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाई है। मक्का डिफेंस पैक्ट पर बदले रुख के बाद अब शहबाज शरीफ ने MBS से बात की है।
Pakistan Saudi Arabia Relations: सऊदी अरब से दोस्ती की बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वाले पाकिस्तान ने एक बार फिर अपना पुराना रंग दिखा दिया है। कुछ ही दिन पहले सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' साइन हुआ था, जिसमें वादा किया गया था कि तीनों में से किसी एक पर भी हमला हुआ तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। लेकिन जैसे ही यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन और रिहायशी इलाकों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे, पाकिस्तानी सेना मैदान छोड़कर पीछे हट गई। अब सऊदी अरब की नाराजगी के डर से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को फोन घुमाकर सफाई पेश की है।
एक हफ्ते में कैसे बदले पाकिस्तान के सुर?
इसकी शुरुआत पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बयान से हुई थी, जिसके बाद अब इस्लामाबाद बैकफुट पर आ गया है। ख्वाजा आसिफ ने पिछले हफ्ते शेखी बघारते हुए कहा था कि अगर यमन की जंग का असर सऊदी अरब तक पहुंचा या कोई उकसावे वाली कार्रवाई हुई, तो मक्का डिफेंस पैक्ट तुरंत लागू हो जाएगा और पाकिस्तान चुप नहीं बैठेगा। लेकिन जैसे ही हूतियों ने सऊदी अरब पर ताजा हमले तेज किए, पाकिस्तान ने यू-टर्न ले लिया। इस्लामाबाद ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी कर दिया कि ये समझौता सिर्फ 'डिफेंसिव' (बचाव) के लिए है। इसका मतलब ये कतई नहीं है कि पाकिस्तान हूतियों पर हमला करने के लिए अपनी फौज सऊदी अरब भेजेगा।
फोन पर MBS के सामने शहबाज शरीफ की सफाई
सऊदी के नाराज होने के अंदेशे के बीच शहबाज शरीफ ने रविवार को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर लंबी बात की। शहबाज ने हूती हमलों की 'कड़े शब्दों में निंदा' की और सऊदी नेतृत्व के साथ पूरी एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि वे खुद, फील्ड मार्शल असीम मुनीर और उप-प्रधानमंत्री इशाक डार मिलकर तनाव कम करने और शांति की कोशिशों में लगे हैं। जानकारों का कहना है कि यह बातचीत सिर्फ सऊदी नेतृत्व का गुस्सा शांत करने और डैमेज कंट्रोल की एक कोशिश थी, क्योंकि पाकिस्तान सऊदी से मिलने वाली वित्तीय मदद खोना नहीं चाहता है।
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यमन में क्यों भड़की है जंग?
यमन में ईरान समर्थित हूती लड़ाकों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच लड़ाई फिर तेज हो गई है। हूतियों ने हाल में लाल सागर के अहम बंदरगाह 'मोखा पोर्ट' और बाब अल-मंडेब के पास एक द्वीप पर कब्जे का दावा किया है। बाब अल-मंडेब बेहद अहम समुद्री रास्ता है। यहां कोई बड़ा सिक्योरिटी क्राइसिस पैदा होता है तो जहाजों की आवाजाही और ग्लोबल ट्रेड पर असर पड़ सकता है। रविवार को सऊदी समर्थित सरकारी फौजों ने ताइज प्रांत के मोखा और धुबाब में हूती ठिकानों पर बमबारी की है। दूसरी ओर हूतियों की तरफ से सऊदी अरब पर हमले किए गए। ये मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र के दखल से हुए सीजफायर के बाद यह अब तक का सबसे खतरनाक टकराव बन चुका है। सितंबर की शुरुआत से 82,000 से ज्यादा लोगों के विस्थापित होने की भी रिपोर्ट सामने आई है। इससे यमन का मानवीय संकट भी और बड़ा हो गया है।
अमेरिका ने भी खड़े किए हाथ
सऊदी अरब के लिए इस समय स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। एक तरफ जहां पाकिस्तान अपनी सेना भेजने से बच रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका का रुख भी चौंकाने वाला रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ किसी भी सीधी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से साफ इनकार कर दिया है। इसके चलते रियाद अपने सुरक्षा साझेदारों की विश्वसनीयता को लेकर भारी असमंजस में है।
UN डिनर और ट्रंप से मुलाकात की जल्दी में शहबाज
जानकारों का मानना है कि पाकिस्तानी पीएम के सऊदी को फोन मिलाने के पीछे एक और कूटनीतिक टाइमिंग छिपी है। 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक के दौरान शहबाज शरीफ की मुलाकात डोनाल्ड ट्रंप से तय है। साथ ही ट्रंप और मेलानिया ट्रंप द्वारा राष्ट्राध्यक्षों के लिए रखे गए डिनर में भी शहबाज को न्योता मिला है। पाकिस्तान इस समय एक तरफ सऊदी अरब के कर्ज को साधने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के सामने अपनी साख बचाने में जुटा है। लेकिन हूतियों के खौफ से मक्का पैक्ट से पीछे हटने की की वजह से खाड़ी देशों में पाकिस्तान के भरोसे पर सवालिया निशान लगा दिया है।
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